एमएसएमई की अगली विकास यात्रा: इनोवेशन, डिजिटलीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा होंगे तीन स्तंभ — भारत खेड़ा
सारांश
मुख्य बातें
एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई एमएसएमई राइज समिट के उद्घाटन सत्र में स्पष्ट किया कि भारत की आर्थिक प्रगति का अगला चरण उन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर टिका है, जो उत्पादक, नवाचार-आधारित, तकनीक-संचालित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की प्राप्ति में एमएसएमई क्षेत्र की भूमिका सर्वाधिक निर्णायक होगी।
एमएसएमई क्षेत्र की मौजूदा स्थिति
भारत खेड़ा ने बताया कि एमएसएमई क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग एक-तिहाई का योगदान देता है, कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब आधी है और रोज़गार सृजन में यह कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक बदलाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने भारतीय उद्योगों के लिए नई चुनौतियों के साथ-साथ नए अवसर भी पैदा किए हैं।
गौरतलब है कि पिछले तीन वर्षों में उद्यम पंजीकरण की संख्या पाँच गुना बढ़कर 8.8 करोड़ से अधिक हो गई है। एमएसएमई क्षेत्र को मिलने वाला संस्थागत ऋण वर्ष 2014 के लगभग ₹10 लाख करोड़ से बढ़कर अब करीब ₹37 लाख करोड़ पहुँच गया है। इसके अतिरिक्त, क्रेडिट गारंटी योजना के तहत लगभग ₹30 लाख करोड़ के ऋण को गारंटी उपलब्ध कराई गई है।
सरकारी पहलें और डिजिटल अवसंरचना
भारत खेड़ा ने सरकार के 53 टेक्नोलॉजी सेंटर, एमएसएमई चैंपियंस प्रोग्राम, आत्मनिर्भर भारत फंड, डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक खरीद (पब्लिक प्रोक्योरमेंट) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये एमएसएमई इकाइयों को विस्तार देने और वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक हैं। उन्होंने एमएसएमई उद्यमियों से डिजिटलीकरण, इंडस्ट्री 4.0, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नवाचार को अपनाने का आह्वान किया।
गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मिहिर कुमार ने बताया कि वर्तमान में जीईएम के माध्यम से होने वाली लगभग 45 प्रतिशत सरकारी खरीद एमएसएमई क्षेत्र से की जा रही है, जो सरकार के निर्धारित लक्ष्य से भी अधिक है। ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्कर्ष गोस्वामी ने कहा कि ओएनडीसी, आधार और यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म छोटे उद्यमों के लिए बाज़ार में प्रवेश की लागत कम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय और उद्योग जगत का नज़रिया
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अतिरिक्त सचिव अतीश कुमार सिंह ने एमएसएमई उद्यमियों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और उनके क्रियान्वयन की समस्याएँ सरकार के साथ साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने पारदर्शिता, कर अनुपालन और जिम्मेदार कारोबारी व्यवहार पर भी विशेष बल दिया।
सिडबी के उप प्रबंध निदेशक प्रकाश कुमार ने कहा कि एमएसएमई के भविष्य की वृद्धि में औपचारिककरण, डिजिटलीकरण, गुणवत्ता सुधार और सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने हरित वित्त (ग्रीन फाइनेंस), डिजिटल लेंडिंग, एआई, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता और निर्यात क्षमता में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।
उद्योग संगठनों का आह्वान
सीआईआई राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद के अध्यक्ष एवं राजरतन ग्लोबल वायर लिमिटेड के सीएमडी सुनील चोरड़िया ने कहा कि भारतीय एमएसएमई की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पाँच प्रमुख स्तंभों — नीतिगत सुधार, वित्त एवं जोखिम प्रबंधन, उत्पादकता एवं वैश्विक बाज़ार तक पहुँच, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और क्षमता निर्माण — पर आधारित होगी।
सीआईआई एमएसएमई परिषद के सस्टेनेबिलिटी एवं सीबीएएम रेडीनेस के अध्यक्ष तथा सोमानी सेरामिक्स लिमिटेड के सीएमडी श्रीकांत सोमानी ने कहा कि अब भारतीय एमएसएमई को केवल अस्तित्व बनाए रखने से आगे बढ़कर प्रतिस्पर्धी, मज़बूत और टिकाऊ उद्यम बनने की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने औद्योगिक क्लस्टरों को सुदृढ़ करने, ओईएम और एमएसएमई के बीच बेहतर साझेदारी तथा केंद्र-राज्य नीतियों के समन्वित क्रियान्वयन पर बल दिया।
आगे की राह
सीआईआई एमएसएमई राइज समिट में उभरी सहमति यह है कि भारत के एमएसएमई क्षेत्र को 'विकसित भारत 2047' की रीढ़ बनने के लिए तकनीकी उन्नयन, वित्तीय समावेश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में गहरी पैठ — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच यह संवाद आने वाले समय में एमएसएमई नीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।