प्राइवेट क्रेडिट बनेगा भारतीय अर्थव्यवस्था का नया इंजन, स्टार्टअप और एमएसएमई को मिलेगी लचीली फंडिंग: IVCA समिट 2026
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 9 जुलाई 2026 को आयोजित आईवीसीए प्राइवेट क्रेडिट समिट 2026 में उद्योग विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार आने वाले वर्षों में तेज़ रफ़्तार से विस्तार करेगा। बढ़ती जागरूकता, नियामकीय समर्थन, डिजिटल नवाचार और वैकल्पिक वित्तपोषण की बढ़ती माँग इस विस्तार के प्रमुख चालक होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राइवेट क्रेडिट अब स्टार्टअप, एमएसएमई और मिड-मार्केट कंपनियों के लिए पारंपरिक बैंक ऋण का एक सशक्त विकल्प बनकर उभर रहा है।
समिट का उद्देश्य और मुख्य संदेश
आविष्कार कैपिटल की पार्टनर और आईवीसीए प्राइवेट क्रेडिट काउंसिल की सह-अध्यक्ष मोनू जैन ने कहा कि इस समिट का केंद्रीय उद्देश्य प्राइवेट क्रेडिट के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि तेज़ विकास की संभावनाओं के बावजूद यह क्षेत्र अभी भी अपेक्षाकृत छोटा है।
जैन ने कहा, 'इस समिट में फंड, निवेशक और पूरे इकोसिस्टम से जुड़े लोग एक साथ आए हैं, ताकि वे प्राइवेट क्रेडिट के विभिन्न स्वरूपों, इसके उपयोगकर्ताओं, उधार लेने वाली कंपनियों की तैयारी और इस पूरे तंत्र को सहयोग देने वाले संस्थानों को बेहतर ढंग से समझ सकें।'
इक्विटी डायल्यूशन से बचाव का रास्ता
आईवीसीए के अध्यक्ष रजत टंडन ने कहा कि प्राइवेट क्रेडिट अब पूँजी जुटाने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, क्योंकि स्टार्टअप और ग्रोथ-स्टेज कंपनियाँ अपनी हिस्सेदारी (इक्विटी) कम किए बिना ऋण के ज़रिए पूँजी जुटाने को प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ पारंपरिक बैंक आमतौर पर संपार्श्विक (कोलेटरल) के आधार पर ऋण देते हैं, वहीं वेंचर डेट और प्राइवेट क्रेडिट कारोबार के अलग-अलग चरणों में कंपनियों को अधिक लचीले वित्तपोषण विकल्प उपलब्ध कराते हैं।
टंडन ने एक उल्लेखनीय आँकड़ा साझा किया: 'रियल एस्टेट क्षेत्र में होने वाले कुल निवेश का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा आज प्राइवेट क्रेडिट के माध्यम से आ रहा है।' उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में प्राइवेट लेंडिंग से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जो इस क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
डिजिटलीकरण: अवसर और चुनौतियाँ
टंडन ने डिजिटल पहलू पर ज़ोर देते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए जानकारी तक आसान पहुँच से विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए फंडिंग प्रक्रिया अधिक तेज़ और प्रभावी हो रही है। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस इकोसिस्टम के विस्तार के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और डिजिटल जानकारी के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा।
निवेशकों के लिए डबल-डिजिट रिटर्न की संभावना
सुंदरम अल्टरनेट्स के प्रबंध निदेशक कार्तिक आत्रेय ने प्राइवेट क्रेडिट को एक उभरता हुआ एसेट क्लास बताया, जो धीरे-धीरे निवेशकों के मुख्य पोर्टफोलियो का हिस्सा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा, 'प्राइवेट क्रेडिट एक उभरता हुआ निवेश विकल्प है, जो धीरे-धीरे मुख्यधारा के निवेश का हिस्सा बनता जा रहा है, खासकर भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में।'
आत्रेय ने बताया कि बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) या डेट म्यूचुअल फंड जैसे पारंपरिक फिक्स्ड-इनकम निवेश विकल्पों की तुलना में प्राइवेट क्रेडिट निवेशकों को दो अंकों (डबल डिजिट) का रिटर्न देने की क्षमता रखता है। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब पारंपरिक निवेश माध्यमों पर रिटर्न दबाव में है और निवेशक वैकल्पिक एसेट क्लास की तलाश में हैं।
गौरतलब है कि भारत में प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार वैश्विक स्तर पर अमेरिका और यूरोप की तुलना में अभी भी शुरुआती दौर में है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र तेज़ी से परिपक्व होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।