9 जुलाई 2026
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प्राइवेट क्रेडिट बनेगा भारतीय अर्थव्यवस्था का नया इंजन, स्टार्टअप और एमएसएमई को मिलेगी लचीली फंडिंग: IVCA समिट 2026

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प्राइवेट क्रेडिट बनेगा भारतीय अर्थव्यवस्था का नया इंजन, स्टार्टअप और एमएसएमई को मिलेगी लचीली फंडिंग: IVCA समिट 2026

सारांश

भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार सिर्फ एक वित्तीय उत्पाद नहीं — यह स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए इक्विटी खोए बिना पूँजी पाने का नया रास्ता है। रियल एस्टेट निवेश का 40% पहले से इसी माध्यम से आ रहा है और निवेशकों को डबल-डिजिट रिटर्न की संभावना इसे तेज़ी से मुख्यधारा बना रही है।

मुख्य बातें

IVCA प्राइवेट क्रेडिट समिट 2026 में उद्योग विशेषज्ञों ने 9 जुलाई 2026 को मुंबई में प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार के तेज़ विस्तार का अनुमान जताया।
रियल एस्टेट क्षेत्र के कुल निवेश का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा आज प्राइवेट क्रेडिट के माध्यम से आ रहा है: रजत टंडन, आईवीसीए अध्यक्ष ।
प्राइवेट क्रेडिट पारंपरिक FD और डेट म्यूचुअल फंड की तुलना में निवेशकों को डबल-डिजिट रिटर्न देने में सक्षम: कार्तिक आत्रेय, सुंदरम अल्टरनेट्स ।
RBI ने हाल ही में प्राइवेट लेंडिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किए, जो इस क्षेत्र के लिए अनुकूल माने जा रहे हैं।
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से एमएसएमई के लिए फंडिंग प्रक्रिया तेज़, लेकिन साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा पर ध्यान देने की ज़रूरत।

मुंबई में 9 जुलाई 2026 को आयोजित आईवीसीए प्राइवेट क्रेडिट समिट 2026 में उद्योग विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार आने वाले वर्षों में तेज़ रफ़्तार से विस्तार करेगा। बढ़ती जागरूकता, नियामकीय समर्थन, डिजिटल नवाचार और वैकल्पिक वित्तपोषण की बढ़ती माँग इस विस्तार के प्रमुख चालक होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राइवेट क्रेडिट अब स्टार्टअप, एमएसएमई और मिड-मार्केट कंपनियों के लिए पारंपरिक बैंक ऋण का एक सशक्त विकल्प बनकर उभर रहा है।

समिट का उद्देश्य और मुख्य संदेश

आविष्कार कैपिटल की पार्टनर और आईवीसीए प्राइवेट क्रेडिट काउंसिल की सह-अध्यक्ष मोनू जैन ने कहा कि इस समिट का केंद्रीय उद्देश्य प्राइवेट क्रेडिट के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि तेज़ विकास की संभावनाओं के बावजूद यह क्षेत्र अभी भी अपेक्षाकृत छोटा है।

जैन ने कहा, 'इस समिट में फंड, निवेशक और पूरे इकोसिस्टम से जुड़े लोग एक साथ आए हैं, ताकि वे प्राइवेट क्रेडिट के विभिन्न स्वरूपों, इसके उपयोगकर्ताओं, उधार लेने वाली कंपनियों की तैयारी और इस पूरे तंत्र को सहयोग देने वाले संस्थानों को बेहतर ढंग से समझ सकें।'

इक्विटी डायल्यूशन से बचाव का रास्ता

आईवीसीए के अध्यक्ष रजत टंडन ने कहा कि प्राइवेट क्रेडिट अब पूँजी जुटाने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, क्योंकि स्टार्टअप और ग्रोथ-स्टेज कंपनियाँ अपनी हिस्सेदारी (इक्विटी) कम किए बिना ऋण के ज़रिए पूँजी जुटाने को प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ पारंपरिक बैंक आमतौर पर संपार्श्विक (कोलेटरल) के आधार पर ऋण देते हैं, वहीं वेंचर डेट और प्राइवेट क्रेडिट कारोबार के अलग-अलग चरणों में कंपनियों को अधिक लचीले वित्तपोषण विकल्प उपलब्ध कराते हैं।

टंडन ने एक उल्लेखनीय आँकड़ा साझा किया: 'रियल एस्टेट क्षेत्र में होने वाले कुल निवेश का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा आज प्राइवेट क्रेडिट के माध्यम से आ रहा है।' उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में प्राइवेट लेंडिंग से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जो इस क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

डिजिटलीकरण: अवसर और चुनौतियाँ

टंडन ने डिजिटल पहलू पर ज़ोर देते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए जानकारी तक आसान पहुँच से विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए फंडिंग प्रक्रिया अधिक तेज़ और प्रभावी हो रही है। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस इकोसिस्टम के विस्तार के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और डिजिटल जानकारी के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा।

निवेशकों के लिए डबल-डिजिट रिटर्न की संभावना

सुंदरम अल्टरनेट्स के प्रबंध निदेशक कार्तिक आत्रेय ने प्राइवेट क्रेडिट को एक उभरता हुआ एसेट क्लास बताया, जो धीरे-धीरे निवेशकों के मुख्य पोर्टफोलियो का हिस्सा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा, 'प्राइवेट क्रेडिट एक उभरता हुआ निवेश विकल्प है, जो धीरे-धीरे मुख्यधारा के निवेश का हिस्सा बनता जा रहा है, खासकर भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में।'

आत्रेय ने बताया कि बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) या डेट म्यूचुअल फंड जैसे पारंपरिक फिक्स्ड-इनकम निवेश विकल्पों की तुलना में प्राइवेट क्रेडिट निवेशकों को दो अंकों (डबल डिजिट) का रिटर्न देने की क्षमता रखता है। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब पारंपरिक निवेश माध्यमों पर रिटर्न दबाव में है और निवेशक वैकल्पिक एसेट क्लास की तलाश में हैं।

गौरतलब है कि भारत में प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार वैश्विक स्तर पर अमेरिका और यूरोप की तुलना में अभी भी शुरुआती दौर में है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र तेज़ी से परिपक्व होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह क्षेत्र अभी भी नियामकीय परिपक्वता की राह पर है। रियल एस्टेट में 40% हिस्सेदारी प्रभावशाली है, पर यह एकाग्रता जोखिम की ओर भी इशारा करती है — खासकर तब जब रियल एस्टेट चक्र पलटता है। RBI के हालिया नियामकीय बदलावों का स्वागत है, लेकिन एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए 'लचीली फंडिंग' की असली कसौटी यह होगी कि संकट के समय ये शर्तें कितनी लचीली रहती हैं। डबल-डिजिट रिटर्न का आकर्षण खुदरा निवेशकों को इस एसेट क्लास की ओर खींच सकता है, जिसके लिए पारदर्शी जोखिम प्रकटीकरण ढाँचा अभी भी अपेक्षित है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्राइवेट क्रेडिट क्या है और यह बैंक ऋण से कैसे अलग है?
प्राइवेट क्रेडिट वह वित्तपोषण है जो गैर-बैंकिंग संस्थाओं — जैसे निजी फंड और वैकल्पिक निवेशकों — द्वारा सीधे कंपनियों को दिया जाता है। पारंपरिक बैंक आमतौर पर संपार्श्विक (कोलेटरल) के आधार पर ऋण देते हैं, जबकि प्राइवेट क्रेडिट कारोबार के विभिन्न चरणों में अधिक लचीले शर्तों पर पूँजी उपलब्ध कराता है।
भारत में प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार के विस्तार के पीछे क्या कारण हैं?
IVCA समिट 2026 में विशेषज्ञों ने बताया कि बढ़ती जागरूकता, RBI का नियामकीय समर्थन, डिजिटल नवाचार और वैकल्पिक वित्तपोषण की बढ़ती माँग इस विस्तार के प्रमुख कारण हैं। स्टार्टअप और एमएसएमई का इक्विटी डायल्यूशन से बचने का रुझान भी इस माँग को बढ़ा रहा है।
प्राइवेट क्रेडिट से निवेशकों को कितना रिटर्न मिल सकता है?
सुंदरम अल्टरनेट्स के प्रबंध निदेशक कार्तिक आत्रेय के अनुसार, प्राइवेट क्रेडिट बैंक FD या डेट म्यूचुअल फंड जैसे पारंपरिक विकल्पों की तुलना में निवेशकों को दो अंकों (डबल डिजिट) का रिटर्न देने की क्षमता रखता है। हालाँकि, यह रिटर्न उच्च जोखिम के साथ भी जुड़ा होता है।
रियल एस्टेट में प्राइवेट क्रेडिट की क्या भूमिका है?
आईवीसीए अध्यक्ष रजत टंडन के अनुसार, रियल एस्टेट क्षेत्र में होने वाले कुल निवेश का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा आज प्राइवेट क्रेडिट के माध्यम से आ रहा है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि यह क्षेत्र पहले से ही एक प्रमुख वित्तपोषण माध्यम बन चुका है।
डिजिटलीकरण से एमएसएमई को प्राइवेट क्रेडिट तक पहुँचने में कैसे मदद मिलती है?
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए जानकारी तक आसान पहुँच से एमएसएमई के लिए फंडिंग प्रक्रिया अधिक तेज़ और प्रभावी हो रही है। हालाँकि विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता भी रेखांकित की है।
राष्ट्र प्रेस
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