अभिषेक बनर्जी के भड़काऊ भाषण मामले में सीआईडी ने भाजपा विधायक बिकर्ण नास्कर का बयान दर्ज किया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने 9 जुलाई 2026 को दक्षिण 24 परगना के गोसाबा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक बिकर्ण नास्कर का बयान दर्ज किया। यह बयान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी के विरुद्ध दर्ज उस मामले में गवाह के रूप में लिया गया है, जिसमें उन पर हालिया विधानसभा चुनाव से पूर्व कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण देने का आरोप है।
मुख्य घटनाक्रम
भाजपा विधायक बिकर्ण नास्कर गुरुवार दोपहर दक्षिण कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय पहुँचे और अपना बयान दर्ज कराया। आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले एक चुनावी रैली में डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने कथित तौर पर भड़काऊ बयान दिए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की।
आरोप यह भी है कि इसी कथित भड़काऊ भाषण के बाद TMC के कुछ कार्यकर्ताओं ने विधायक नास्कर पर हमला किया था, जिसकी शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई थी। इसके बाद इस मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई।
अदालती आदेशों की अनदेखी
विधायक नास्कर का बयान इस मामले में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि अभिषेक बनर्जी उत्तर 24 परगना की बिधाननगर अदालत के दो लगातार आदेशों का पालन करने में विफल रहे हैं। अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायिक मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में अपनी आवाज़ का नमूना सीआईडी को सौंपने का निर्देश दिया था।
अभिषेक बनर्जी को बुधवार तक बिधाननगर अदालत में उपस्थित होना था, किंतु वह निर्धारित तिथि पर अदालत नहीं पहुँचे।
सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया
मामले के लोक अभियोजक बिवास चट्टोपाध्याय ने बिधाननगर अदालत में लिखित आवेदन दायर कर कहा कि अभिषेक बनर्जी ने अदालत के आदेशों का बार-बार उल्लंघन किया है। उन्होंने अदालत से उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की माँग की।
लोक अभियोजक ने अपने आवेदन में आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के महासचिव दूसरी बार भी आवाज़ का नमूना देने से बचे, जो कथित तौर पर जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और उसमें विलंब करने का प्रयास दर्शाता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक हिंसा और भड़काऊ भाषण की व्यापक बहस के बीच सामने आया है। कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालती आदेश की बार-बार अवहेलना अवमानना की श्रेणी में आ सकती है, जिसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
आगे क्या होगा
बिधाननगर अदालत अब लोक अभियोजक के आवेदन पर सुनवाई करेगी और अभिषेक बनर्जी की अनुपस्थिति पर अगला कदम तय करेगी। सीआईडी की जांच जारी है और अदालत का अगला आदेश इस मामले की दिशा निर्धारित करेगा।