अभिषेक बनर्जी से सीआईडी की पूछताछ: चुनाव से पहले हिंसा भड़काने और अमित शाह को धमकाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी मंगलवार, 16 जून को कोलकाता स्थित भवानी भवन में सीआईडी (अपराध जांच विभाग) के समक्ष पेश हुए। यह पेशी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने और धमकी देने के मामले में दर्ज एफआईआर के संदर्भ में हुई। रिपोर्ट लिखे जाने तक सीआईडी अधिकारी उनसे करीब दो घंटे से पूछताछ कर रहे थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह एफआईआर पिछले महीने बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में बनर्जी के खिलाफ दर्ज की गई थी। प्रारंभ में बिधाननगर सिटी पुलिस के तहत साइबर क्राइम अधिकारी जांच कर रहे थे, लेकिन 11 जून को यह जांच सीआईडी को स्थानांतरित कर दी गई। बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने राज्य में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों से पहले हिंसा भड़काने और गृह मंत्री शाह को धमकाने का काम किया।
लगातार तीन दिन, तीन जांच एजेंसियाँ
गौरतलब है कि यह लगातार तीसरा दिन था जब किसी जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की। रविवार को सीआईडी अधिकारियों ने उनसे साढ़े आठ घंटे तक पूछताछ की थी। वह मामला तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के जाली हस्ताक्षर से जुड़ा है — राज्य विधानसभा में सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित करने वाले प्रस्ताव पर दस्तावेजों में गड़बड़ी पाए जाने पर सीआईडी ने जांच शुरू की थी।
सोमवार को पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपये के कथित 'स्कूल-नौकरी-के-बदले-नकद' घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने उनसे 11 घंटे तक पूछताछ की थी।
भवानी भवन में पहुँचने का ब्यौरा
अभिषेक बनर्जी को मंगलवार दोपहर तक दक्षिण कोलकाता स्थित भवानी भवन में सीआईडी मुख्यालय पहुँचने का निर्देश था। वे निर्धारित समय से कुछ मिनट पहले ही वहाँ पहुँचे, प्रवेश द्वार पर विज़िटर रजिस्टर में हस्ताक्षर किए और पूछताछ के लिए अंदर चले गए।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच तनाव चरम पर है। तीन दिनों में तीन अलग-अलग जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ — सीआईडी, ईडी, और फिर सीआईडी — ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। आलोचकों का कहना है कि यह केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक उपयोग है, जबकि जांच एजेंसियाँ इसे नियमित कानूनी प्रक्रिया बता रही हैं। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चल रही इन जांचों का अगला कदम क्या होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।