अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी हिंसा मामले की जांच सीआईडी को सौंपी, कोर्ट ने 31 जुलाई तक गिरफ्तारी पर रोक दी
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कथित तौर पर हिंसा भड़काने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने के मामले में जांच शुक्रवार, 11 जून 2026 को राज्य पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को स्थानांतरित कर दी गई। इससे पहले यह मामला बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज था और उसी की जांच-टीम इसे देख रही थी।
मामले की पृष्ठभूमि
पिछले महीने बिधाननगर सिटी पुलिस के अंतर्गत आने वाले बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह एफआईआर चुनाव पूर्व एक जनसभा में दिए गए कथित भड़काऊ बयान पर आधारित शिकायत के बाद दर्ज हुई थी। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं।
सीआईडी को क्यों सौंपी गई जांच
राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि शुक्रवार को यह मामला आधिकारिक रूप से सीआईडी को हस्तांतरित कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि सीआईडी पहले से ही अभिषेक बनर्जी को एक अन्य मामले में तीन समन जारी कर चुकी है — वह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित कुछ पदों पर नियुक्तियों से जुड़े एक प्रस्ताव पर TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित फर्जीवाड़े से संबंधित है। इस प्रकार अभिषेक बनर्जी अब एक साथ दो अलग-अलग मामलों में सीआईडी की जांच के दायरे में हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख और फैसला
अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, लेकिन 21 मई को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने जनसभा में दिए गए कथित भड़काऊ बयान पर कड़ी टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि किसी राजनीतिक दल के महासचिव और तीन बार के सांसद द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह का बयान कैसे दिया जा सकता है — खासकर ऐसे राज्य में जहाँ चुनाव के बाद व्यापक हिंसा का इतिहास रहा है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि यदि 4 मई को घोषित विधानसभा चुनाव परिणाम अलग होते, तो राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ सकती थी। यह टिप्पणी बंगाल में चुनाव-पश्चात हिंसा की दीर्घकालिक चिंता को रेखांकित करती है।
अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत, लेकिन शर्तें सख्त
हालाँकि, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई 2026 तक गिरफ्तारी सहित किसी भी प्रकार की दमनात्मक पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। इसके साथ ही अदालत ने सख्त शर्तें भी लगाई हैं — सबसे महत्वपूर्ण यह कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते।
आगे क्या होगा
सीआईडी को जांच सौंपे जाने के बाद यह देखना होगा कि एजेंसी अभिषेक बनर्जी को इस मामले में भी समन जारी करती है या नहीं। 31 जुलाई के बाद की स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और अदालत अगली सुनवाई में क्या रुख अपनाती है। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकता है।