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अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी हिंसा मामले की जांच सीआईडी को सौंपी, कोर्ट ने 31 जुलाई तक गिरफ्तारी पर रोक दी

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अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी हिंसा मामले की जांच सीआईडी को सौंपी, कोर्ट ने 31 जुलाई तक गिरफ्तारी पर रोक दी

सारांश

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी हिंसा भड़काने का मामला अब सीआईडी के हाथ में है — और वे पहले से ही फर्जी हस्ताक्षर मामले में तीन समन झेल चुके हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने एफआईआर खारिज करने से इनकार करते हुए 31 जुलाई तक गिरफ्तारी पर रोक दी है, लेकिन विदेश यात्रा प्रतिबंधित की है।

मुख्य बातें

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनावी हिंसा भड़काने के मामले की जांच 11 जून 2026 को सीआईडी को सौंपी गई।
मामला पहले बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज था; पिछले महीने एफआईआर दर्ज हुई थी।
सीआईडी पहले से ही अभिषेक बनर्जी को विधानसभा नियुक्तियों में कथित फर्जीवाड़े के मामले में तीन समन जारी कर चुकी है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 21 मई को एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज की; न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कथित बयान पर कड़ी टिप्पणी की।
अदालत ने 31 जुलाई 2026 तक गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक दी, लेकिन अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कथित तौर पर हिंसा भड़काने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने के मामले में जांच शुक्रवार, 11 जून 2026 को राज्य पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को स्थानांतरित कर दी गई। इससे पहले यह मामला बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज था और उसी की जांच-टीम इसे देख रही थी।

मामले की पृष्ठभूमि

पिछले महीने बिधाननगर सिटी पुलिस के अंतर्गत आने वाले बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह एफआईआर चुनाव पूर्व एक जनसभा में दिए गए कथित भड़काऊ बयान पर आधारित शिकायत के बाद दर्ज हुई थी। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं।

सीआईडी को क्यों सौंपी गई जांच

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि शुक्रवार को यह मामला आधिकारिक रूप से सीआईडी को हस्तांतरित कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि सीआईडी पहले से ही अभिषेक बनर्जी को एक अन्य मामले में तीन समन जारी कर चुकी है — वह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित कुछ पदों पर नियुक्तियों से जुड़े एक प्रस्ताव पर TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित फर्जीवाड़े से संबंधित है। इस प्रकार अभिषेक बनर्जी अब एक साथ दो अलग-अलग मामलों में सीआईडी की जांच के दायरे में हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख और फैसला

अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, लेकिन 21 मई को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने जनसभा में दिए गए कथित भड़काऊ बयान पर कड़ी टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि किसी राजनीतिक दल के महासचिव और तीन बार के सांसद द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह का बयान कैसे दिया जा सकता है — खासकर ऐसे राज्य में जहाँ चुनाव के बाद व्यापक हिंसा का इतिहास रहा है।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि यदि 4 मई को घोषित विधानसभा चुनाव परिणाम अलग होते, तो राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ सकती थी। यह टिप्पणी बंगाल में चुनाव-पश्चात हिंसा की दीर्घकालिक चिंता को रेखांकित करती है।

अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत, लेकिन शर्तें सख्त

हालाँकि, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई 2026 तक गिरफ्तारी सहित किसी भी प्रकार की दमनात्मक पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। इसके साथ ही अदालत ने सख्त शर्तें भी लगाई हैं — सबसे महत्वपूर्ण यह कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते।

आगे क्या होगा

सीआईडी को जांच सौंपे जाने के बाद यह देखना होगा कि एजेंसी अभिषेक बनर्जी को इस मामले में भी समन जारी करती है या नहीं। 31 जुलाई के बाद की स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और अदालत अगली सुनवाई में क्या रुख अपनाती है। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो खुद राज्य सरकार के अधीन है, अब अभिषेक बनर्जी को दो अलग-अलग मामलों में जांच रही है — यह विरोधाभास अपने आप में सवाल उठाता है कि जांच कितनी स्वतंत्र होगी। कलकत्ता हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी — कि परिणाम अलग होते तो कानून-व्यवस्था चरमरा जाती — बंगाल में चुनाव-पश्चात हिंसा की उस पुरानी बीमारी को रेखांकित करती है जिसे हर दल सत्ता में आने के बाद सुविधानुसार भूल जाता है। 31 जुलाई के बाद की स्थिति ही असली कसौटी होगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ सीआईडी को सौंपा गया मामला क्या है?
यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक जनसभा में कथित भड़काऊ बयान देकर हिंसा भड़काने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने से संबंधित है। एफआईआर बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज थी, जिसे 11 जून 2026 को सीआईडी को स्थानांतरित किया गया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर क्या फैसला दिया?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने 21 मई को एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कथित भड़काऊ बयान पर कड़ी टिप्पणी की, लेकिन 31 जुलाई 2026 तक गिरफ्तारी सहित दमनात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक भी दी।
अभिषेक बनर्जी पर अदालत ने क्या शर्तें लगाई हैं?
अदालत ने अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई 2026 तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है। साथ ही शर्त रखी है कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते।
क्या अभिषेक बनर्जी किसी अन्य मामले में भी सीआईडी की जांच में हैं?
हाँ, सीआईडी पहले से ही अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित पदों पर नियुक्तियों से जुड़े एक प्रस्ताव पर TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित फर्जीवाड़े के मामले में तीन समन जारी कर चुकी है।
31 जुलाई 2026 के बाद अभिषेक बनर्जी की स्थिति क्या होगी?
31 जुलाई के बाद अंतरिम राहत की अवधि समाप्त हो जाएगी। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सीआईडी की जांच किस दिशा में बढ़ती है और अदालत अगली सुनवाई में क्या आदेश देती है।
राष्ट्र प्रेस
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