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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 3 और FIR में अंतरिम राहत, 30 नवंबर तक गिरफ्तारी पर रोक

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 3 और FIR में अंतरिम राहत, 30 नवंबर तक गिरफ्तारी पर रोक

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन और FIR में 30 नवंबर तक गिरफ्तारी से राहत दी — अब 16 में से 11 मामलों में अदालती सुरक्षा मिल गई है। अदालत ने सहयोग और 48 घंटे पूर्व सूचना की शर्त भी लगाई।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 25 अगस्त को अभिषेक बनर्जी को तीन और FIR में 30 नवंबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी।
अब 16 FIR में से 11 मामलों में अभिषेक बनर्जी को अदालती संरक्षण प्राप्त है।
राहत पाने वाली FIR भवानीपुर , कालीतला और विष्णुपुर थानों में दर्ज हैं।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने शर्त रखी — समन पर उपस्थिति अनिवार्य, पेशी से 48 घंटे पहले सूचना देनी होगी।
अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा पर रोक; हालाँकि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति से आँखों के इलाज की यात्रा पर असर नहीं।
मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार, 25 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन और प्राथमिकी (FIR) में गिरफ्तारी सहित किसी भी कड़ी पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। यह राहत 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। इस आदेश के बाद अभिषेक बनर्जी को राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज कुल 16 FIR में से 11 मामलों में अदालती संरक्षण प्राप्त हो गया है।

किन थानों की FIR में मिली राहत

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने जिन तीन FIR में अंतरिम सुरक्षा दी है, उनमें से एक दक्षिण कोलकाता के कोलकाता पुलिस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भवानीपुर थाने में दर्ज है। शेष दो FIR दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर पुलिस जिले के कालीतला और विष्णुपुर थानों में दर्ज हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बनर्जी के खिलाफ राज्य के अलग-अलग जिलों में मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

अदालत की शर्तें और निर्देश

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया कि इन तीन FIR के संदर्भ में हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। हालाँकि, अदालत ने यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी को जाँचकर्ताओं के साथ पूरा सहयोग करना होगा। यदि जाँच एजेंसी समन जारी करती है, तो उन्हें उपस्थित होना अनिवार्य होगा — और इसके लिए उन्हें पेशी से कम-से-कम 48 घंटे पहले सूचित किया जाना होगा।

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि सांसद जाँच में सहयोग नहीं करते, तो राज्य सरकार न्यायालय का ध्यान इस ओर आकर्षित कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित की गई है।

FIR की प्रतियाँ और विदेश यात्रा पर रोक

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने आदेश में यह भी निर्देश दिया कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अब तक दर्ज सभी FIR की प्रतियाँ उनके अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाएँ। इसके अलावा, अदालत ने स्पष्ट किया कि वे न्यायालय की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। हालाँकि, एकल पीठ ने यह भी जोड़ा कि चूँकि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही उन्हें आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दे रखी है, इसलिए यह नया आदेश उस यात्रा में कोई बाधा नहीं बनेगा।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। अभिषेक बनर्जी, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे भी हैं, राज्य में TMC के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। कुल 16 FIR में से अब 11 में अदालती सुरक्षा मिलना उनके लिए कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी, जबकि अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। शेष पाँच FIR में उनकी कानूनी स्थिति अभी भी अनिश्चित है और उन पर अदालत का अगला रुख तय करेगा कि यह कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तस्वीर का एक ही पहलू है — शेष पाँच मामले अभी भी लटके हैं। यह पैटर्न बताता है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की प्रवृत्ति अदालतों पर बोझ बढ़ा रही है। अदालत का '48 घंटे पूर्व सूचना' वाला निर्देश एक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत संतुलन है — यह सांसद को जाँच से मुक्त नहीं करता, बल्कि मनमानी गिरफ्तारी पर लगाम लगाता है। असली सवाल यह है कि क्या यह राहत दीर्घकालिक होगी या 30 नवंबर के बाद राजनीतिक समीकरण बदलते हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को किन मामलों में राहत दी है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 25 अगस्त को अभिषेक बनर्जी को भवानीपुर, कालीतला और विष्णुपुर थानों में दर्ज तीन FIR में 30 नवंबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है। इससे कुल 16 FIR में से 11 मामलों में उन्हें अदालती सुरक्षा मिल गई है।
यह अंतरिम राहत कब तक प्रभावी रहेगी?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ द्वारा दी गई यह अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक लागू रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित की गई है।
क्या अभिषेक बनर्जी को जाँच में सहयोग करना होगा?
हाँ, अदालत ने स्पष्ट शर्त रखी है कि अभिषेक बनर्जी को जाँचकर्ताओं के साथ पूरा सहयोग करना होगा। यदि जाँच एजेंसी समन भेजती है तो उन्हें उपस्थित होना अनिवार्य होगा, और पेशी से कम-से-कम 48 घंटे पहले उन्हें सूचित किया जाना होगा।
क्या अभिषेक बनर्जी विदेश यात्रा कर सकते हैं?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि वे न्यायालय की अनुमति के बिना विदेश नहीं जा सकते। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही उन्हें आँखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दे रखी है, इसलिए यह नया आदेश उस यात्रा पर लागू नहीं होगा।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कुल कितनी FIR दर्ज हैं?
पश्चिम बंगाल के अलग-अलग थानों में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कुल 16 FIR दर्ज हैं। इनमें से 11 में उन्हें अब तक अंतरिम अदालती सुरक्षा मिल चुकी है, जबकि शेष 5 मामलों में उनकी कानूनी स्थिति अभी अनिश्चित है।
राष्ट्र प्रेस
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