कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को भविष्य की एफआईआर में ब्लैंकेट प्रोटेक्शन देने से किया इनकार, 3 मामलों में 6 अगस्त तक राहत
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने भविष्य में दर्ज होने वाली समस्त एफआईआर पर अग्रिम ब्लैंकेट प्रोटेक्शन की माँग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर नई एफआईआर पर अलग से याचिका दायर करनी होगी। हालाँकि, पहले से दर्ज तीन एफआईआर में बनर्जी को 6 अगस्त 2026 तक अंतरिम राहत प्रदान की गई है।
अदालत का रुख और आदेश का सार
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने कहा कि यदि भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज होती है, तो उससे संबंधित अलग पूरक याचिका दाखिल करनी होगी और संबंधित शिकायतकर्ता को पक्षकार बनाना अनिवार्य होगा। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि केवल राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका के आधार पर भविष्य की संभावित एफआईआर पर पहले से सुरक्षा नहीं दी जा सकती।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने यह भी टिप्पणी की कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद दर्ज दो अन्य मामलों में अदालत पहले ही जाँच जारी रखते हुए अंतरिम संरक्षण दे चुकी है, और ऐसे में समान आदेश देने में क्या कठिनाई है — यह सवाल उन्होंने उठाया।
किन तीन एफआईआर में मिली अंतरिम राहत
अदालत ने जिन तीन मामलों में 6 अगस्त 2026 तक गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाई है, वे क्रमशः 27 मई को भवानीपुर थाने, 1 जून को कालीतला थाने और 16 जून को बिष्णुपुर थाने में दर्ज की गई थीं। अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित है।
पहले से मिली राहतें और आरोपों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल सीआईडी की दो अलग जाँचों में अंतरिम राहत मिल चुकी है। इनमें एक मामला TMC विधायकों के कथित 'मिसमैच' प्रकरण से जुड़ा है, जबकि दूसरा उनके विरुद्ध दर्ज कथित हेट स्पीच मामले का है। उन पर चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री को कथित तौर पर धमकी देने का आरोप लगाया गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है, और चुनाव-पश्चात हिंसा व एफआईआर की संख्या को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
सॉलिसिटर जनरल का विरोध
प्रतिवादियों की ओर से वर्चुअल माध्यम से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने भविष्य की सभी संभावित एफआईआर पर अग्रिम सुरक्षा देने की माँग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक प्रतिशोध की महज़ आशंका के आधार पर भावी एफआईआर को पहले से निरस्त या संरक्षित नहीं किया जा सकता।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी, जब अदालत तीनों मौजूदा एफआईआर पर आगे का रुख तय करेगी। यदि इस बीच कोई नई एफआईआर दर्ज होती है, तो बनर्जी को उसके लिए अलग से न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना होगा।