कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 3 और FIR में अंतरिम राहत दी, अब 16 में से 8 मामलों में संरक्षण
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 21 अगस्त 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को उनके विरुद्ध दर्ज तीन और एफआईआर मामलों में गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। इस आदेश के साथ अभिषेक बनर्जी को राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज कुल 16 एफआईआर में से अब 8 मामलों में अदालती सुरक्षा मिल चुकी है।
किन मामलों में मिली राहत
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने शुक्रवार को जिन तीन मामलों में राहत दी, उनमें से दो मामले बिष्णुपुर थाने और एक मामला रवींद्र नगर थाने में दर्ज हैं। ये दोनों थाने दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर पुलिस जिले के अंतर्गत आते हैं। अदालत ने यह अंतरिम संरक्षण 11 सितंबर तक के लिए दिया है, और इन तीन मामलों की अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित है।
मामलों की पृष्ठभूमि
सभी एफआईआर कथित तौर पर पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान संचालित निःशुल्क 'सेबाश्रय' स्वास्थ्य शिविरों में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं से संबंधित हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन शिविरों के संचालन में अभिषेक बनर्जी ने अपने अधिकारों का व्यापक दुरुपयोग किया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में इस वर्ष हुए विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता परिवर्तन हो चुका है।
अभिषेक बनर्जी का पक्ष
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। उनका दावा है कि राज्य में नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के सत्ता में आने के बाद उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और उनके विरुद्ध बेबुनियाद एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं।
शिकायतकर्ताओं का पक्ष
दूसरी ओर, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पिछली सरकार के दौरान उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की अनुमति ही नहीं मिलती थी। सरकार बदलने के बाद ही उन्हें यह अवसर मिला, जिसके चलते एफआईआर की संख्या लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी वरिष्ठ TMC नेता पर सत्ता परिवर्तन के बाद इस तरह के मामले दर्ज हुए हों।
आगे क्या होगा
जिन 8 शेष मामलों में अभिषेक बनर्जी को अभी तक अंतरिम राहत नहीं मिली है, उनकी सुनवाई 25 अगस्त को होनी है। अदालत की आगामी सुनवाइयों का परिणाम यह तय करेगा कि क्या बनर्जी को सभी 16 मामलों में संरक्षण मिल पाता है या उनमें से कुछ में जाँच एजेंसियों को कार्रवाई की छूट दी जाती है।