कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: फाल्टा में 'सेवाश्रय' शिविर के दो अवैध ढांचे तत्काल गिराए जाएं
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा क्षेत्र में स्थित 'सेवाश्रय' स्वास्थ्य शिविर से जुड़े दो अस्थायी ढांचों को तत्काल ध्वस्त करने का निर्देश दिया। यह स्वास्थ्य पहल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव एवं डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़ी मानी जाती है। अदालत ने यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये ढांचे एक सार्वजनिक खेल मैदान पर अवैध रूप से खड़े किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अमीनुद्दीन खान की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। खान ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि दोनों ढांचे स्वास्थ्य शिविर बंद हो जाने के बाद भी मैदान पर कब्जा किए हुए हैं, जिससे स्थानीय निवासी उस भूमि का उपयोग नहीं कर पा रहे।
याचिका के अनुसार, यह मैदान पहले स्कूलों के खेलकूद कार्यक्रमों, क्रिकेट और फुटबॉल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक आयोजनों के लिए नियमित रूप से उपयोग में आता था। शिविर बंद होने के बाद भी ढांचे न हटाए जाने से यह सामुदायिक भूमि अवरुद्ध पड़ी है।
'सेवाश्रय' की पृष्ठभूमि
कथित तौर पर अभिषेक बनर्जी की पहल पर पिछले वर्ष डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में 'सेवाश्रय' स्वास्थ्य शिविर शुरू किए गए थे, जिनका उद्देश्य स्थानीय जनता को निःशुल्क या सुलभ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना बताया गया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले इस अभियान के तहत कई अस्थायी शिविर स्थापित किए गए थे।
गौरतलब है कि इस वर्ष पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद इन शिविरों को लेकर कई शिकायतें सामने आईं। आरोपों में कथित अनियमितताएं और गंभीर चिकित्सीय लापरवाही शामिल हैं।
शिकायतों की प्रकृति
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कुछ शिविरों का संचालन पंजीकृत चिकित्सकों के बजाय मेडिकल छात्रों और इंटर्नों द्वारा किया जा रहा था। यह भी आरोप लगाया गया कि वहां उपचार कराने वाले कुछ मरीजों को कथित गलत इलाज के कारण बाद में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
सरकार की प्रतिक्रिया
जुलाई में पश्चिम बंगाल विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग 'सेवाश्रय' शिविरों में कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया था जब शिविरों से जुड़ी शिकायतें विधानसभा तक पहुंच चुकी थीं।
क्या होगा आगे
अदालत के आदेश के बाद संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर दोनों ढांचों को तत्काल हटाने की जिम्मेदारी आ गई है। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि इसमें सत्तारूढ़ दल के एक प्रमुख नेता से जुड़ी पहल पर न्यायिक हस्तक्षेप हुआ है। मामले में आगे की कार्यवाही और जांच की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी हैं।