गुजरात में ₹133.41 करोड़ से 10 तीर्थ-पर्यटन स्थलों का कायाकल्प, ग्रेटर गिर को सबसे बड़ा हिस्सा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 2 सितंबर 2026 को राज्य के 10 धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों पर कुल ₹133.41 करोड़ के विकास कार्यों को औपचारिक मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में मंदिरों का पुनर्निर्माण, तीर्थयात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएँ, रूफटॉप सोलर ऊर्जा प्रणाली और पर्यटन से जुड़ी बुनियादी संरचना का विकास शामिल है। यह मंजूरी उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी द्वारा दी गई है।
मुख्य परियोजनाएँ और आवंटित राशि
सबसे बड़ी स्वीकृति ग्रेटर गिर परियोजना को मिली है, जिसके तहत विभिन्न स्थलों पर पर्यटन-केंद्रित विकास के लिए ₹46.91 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसका उद्देश्य पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएँ सुदृढ़ करना और स्थानीय रोज़गार के अवसर पैदा करना है।
गांधीनगर जिले के रूपाल में स्थित श्री वरदायिनी माताजी मंदिर के समग्र विकास के लिए ₹35 करोड़ मंजूर किए गए हैं, जिसमें तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का विस्तार भी शामिल है। अहमदाबाद जिले के बावला तालुका के केसार्डी गाँव में श्री जोदलपीर मंदिर के पुनर्निर्माण और परिसर विकास हेतु ₹21.75 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
कच्छ जिले के अंजर में 'गोवर्धन पर्वत विकास परियोजना' के लिए ₹12.98 करोड़ स्वीकृत हुए हैं, जिसका घोषित उद्देश्य स्थल का सौंदर्यीकरण और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाना है।
अन्य स्थलों पर विकास कार्य
राजकोट जिले के गोंडल तालुका में अनालगढ़ किले और महाकाली माताजी मंदिर के आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए ₹5.06 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। नवसारी जिले के वंसदा में श्री उनाई माताजी मंदिर परिसर के व्यापक विकास के लिए ₹5.03 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
इस परियोजना में श्री रामचंद्र और हनुमान मंदिरों, परिक्रमा पथ, प्रवेश द्वार, भूनिर्माण, चारदीवारी, जलाशय, सांस्कृतिक हॉल, भोजन कक्ष और पुस्तकालय के निर्माण कार्य शामिल हैं। वडोदरा जिले के भादरवा में चेहर माताजी मंदिर के निकट महिसागर नदी के तट पर घाट, पैदल मार्ग, पेवर ब्लॉक, रेलिंग और लैंडस्केपिंग सहित बुनियादी सुविधाओं के लिए ₹3.31 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
मेहसाना जिले के विसनगर तालुका के ताराभ स्थित श्री वलीनाथ महादेव मंदिर में विद्युतीकरण और 100 किलोवाट की रूफटॉप सोलर प्रणाली स्थापना के लिए ₹2.68 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, दो अन्य मंदिरों में छोटे स्तर के विकास कार्यों को भी स्वीकृति दी गई है।
सरकार की मंशा और नीतिगत संदर्भ
यह मंजूरी गुजरात सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है जिसके तहत राज्यभर के तीर्थ और पर्यटन स्थलों पर सुविधाएँ उन्नत की जानी हैं। राज्य का पर्यटन विभाग धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक आकर्षणों को गुजरात पर्यटन की मूल पहचान मानता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में देखने की प्रवृत्ति तेज़ हुई है।
आम जनता और स्थानीय समुदायों पर असर
इन परियोजनाओं से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों दोनों को बेहतर सुविधाएँ मिलने की उम्मीद है। ग्रेटर गिर और अन्य स्थलों पर बुनियादी ढाँचे के विकास से स्थानीय रोज़गार और छोटे व्यवसायों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। रूफटॉप सोलर प्रणाली जैसे हरित ऊर्जा उपाय दीर्घकालिक संचालन लागत को कम करने में सहायक होंगे।
आगे क्या होगा
स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और निविदा प्रक्रिया अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। राज्य सरकार के अनुसार इन कार्यों से गुजरात को धार्मिक और इको-पर्यटन के मानचित्र पर और मज़बूती से स्थापित करने का लक्ष्य है।