एसआईआर विवाद: उपेंद्र कुशवाहा का राहुल गांधी पर तंज — 'बिहार में भी विरोध किया, क्या नतीजा निकला?'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 2 सितंबर 2026 को एक बार फिर एसआईआर (SIR) का मुद्दा उठाते हुए महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के उदाहरण दिए और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया। उनके इस बयान पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने तीखा पलटवार किया और कहा कि राहुल गांधी के विरोध का जनता पर कोई असर नहीं पड़ता।
राहुल गांधी का आरोप — 'वोट चोरी से बनी सरकार'
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि BJP पर 'वोट चोरी' से सरकार बनाने का आरोप है, इसीलिए वह न तो जनता की सुनती है और न ही उसके आदेश का पालन करती है। उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में एसआईआर के विरोध को अपने तर्क का आधार बनाया। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है।
उपेंद्र कुशवाहा का पलटवार
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने राहुल गांधी के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार में भी एसआईआर का विरोध किया था, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला। कुशवाहा के अनुसार, महाराष्ट्र में भी जनता ने राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान एनडीए के वोट बढ़ाने में ही मददगार होते हैं।
कुशवाहा ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें जनता के मौलिक सवालों — किसानों और युवाओं के मुद्दों — पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि इस तरह के राजनीतिक आरोपों पर।
बिहार बाढ़ और सरकार की सक्रियता
बिहार में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नदियों का जलस्तर बढ़ना चिंता का विषय है, लेकिन राज्य सरकार स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव उपाय कर रही है।
आरक्षण और एनडीए के आंतरिक मतभेद
कुशवाहा ने कहा कि आरक्षण की हर 10 वर्ष में समीक्षा का संवैधानिक प्रावधान है। उन्होंने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी से आपस में नहीं उलझने की अपील की और कहा कि वे चिराग पासवान के रुख से सहमत हैं। गौरतलब है कि एनडीए के भीतर आरक्षण को लेकर बयानबाज़ी ने हाल के दिनों में नई बहस छेड़ दी है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को मिली कथित धमकी पर कहा कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान दलित समाज के प्रमुख नेता हैं और आरक्षण के पक्षधर हैं। पारस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में आरक्षण की वकालत की थी और कमज़ोर वर्गों को 15 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए।
आगे क्या
एसआईआर को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच यह वाकयुद्ध आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और तीखा होने की संभावना है। बिहार में चुनावी माहौल के बीच आरक्षण, बाढ़ राहत और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए केंद्रीय एजेंडा बने रहेंगे।