11 अगस्त 2026
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अभिषेक बनर्जी को अंतरिम सुरक्षा मिलने पर शिकायतकर्ता का आरोप — 'विदेश से भी हत्या का आदेश दे सकते हैं'

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अभिषेक बनर्जी को अंतरिम सुरक्षा मिलने पर शिकायतकर्ता का आरोप — 'विदेश से भी हत्या का आदेश दे सकते हैं'

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन और मामलों में अंतरिम सुरक्षा दी — अब 16 में से सभी मामलों में राहत। शिकायतकर्ता अभिजीत दास का आरोप: 'वे मनोरोगी हैं, विदेश से भी हत्या का आदेश दे सकते हैं।' CISF सुरक्षा हटने से जान खतरे में बताई।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 11 अगस्त को अभिषेक बनर्जी को 3 और मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।
पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज कुल 16 मामलों में से अब सभी में बनर्जी को अंतरिम राहत मिल चुकी है।
शिकायतकर्ता अभिजीत दास ने दावा किया कि उन पर तीन-चार बार हमले हुए और पैर में धातु की प्लेट लगवानी पड़ी।
दास ने 17 शिकायतें दर्ज कराई थीं; 10 से 12 के आधार पर एफआईआर बनी।
सर्वोच्च न्यायालय ने बनर्जी को आँख के इलाज के लिए तीन सप्ताह की विदेश यात्रा की अनुमति दी है।
दास ने आरोप लगाया कि याचिका दायर करने के बाद उनकी CISF सुरक्षा हटा ली गई।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने मंगलवार, 11 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज तीन अतिरिक्त मामलों में गिरफ्तारी समेत कड़ी पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। इस फैसले के तुरंत बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता अभिजीत दास ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बनर्जी 'मनोरोगी' हैं और विदेश में रहते हुए भी उनकी हत्या का आदेश दे सकते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल पुलिस ने डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी के विरुद्ध कुल 16 मामले दर्ज किए थे। इनमें से 13 मामलों में उन्हें पहले ही अंतरिम सुरक्षा मिल चुकी थी। मंगलवार के आदेश के बाद यह संख्या बढ़कर 16 में से 16 हो गई है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने बनर्जी को आँख के इलाज के लिए तीन सप्ताह की विदेश यात्रा की अनुमति भी दी है।

शिकायतकर्ता के आरोप

भाजपा से जुड़े शिकायतकर्ता अभिजीत दास ने कहा, 'मैं डायमंड हार्बर का रहने वाला हूँ और तृणमूल के शासनकाल में हुए अत्याचारों से अच्छी तरह वाकिफ हूँ। मुझ पर तीन-चार बार हमले हुए, जिसके कारण मुझे गंभीर चोटें आईं और यहाँ तक कि मेरे पैर में धातु की प्लेट भी लगवानी पड़ी। यह सब उन्हीं (अभिषेक) के आदेश पर हुआ था।'

दास ने यह भी दावा किया कि दिसंबर 2018 में उन पर हमला हुआ था जब वे भाजपा के जिला अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा, 'जब मैंने एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, तो वह दर्ज नहीं की गई। अगर मुझ पर ऐसे अत्याचार हुए हैं, तो कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि आम जनता ने क्या झेला होगा।'

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनर्जी को विदेश यात्रा की अनुमति दिए जाने के संदर्भ में दास ने आरोप लगाया, 'अभिषेक कितने खतरनाक हैं, इसे देखते हुए... मुझे लगता है कि वह एक मनोरोगी (साइको) हैं, इसलिए यह संभव है कि वह विदेश से भी मेरी हत्या का आदेश दे सकते हैं।' हालाँकि, दास ने यह भी जोड़ा कि वे डरते नहीं हैं।

सुरक्षा हटाए जाने का दावा

दास ने दावा किया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के बाद उनकी CISF सुरक्षा हटा ली गई। उन्होंने कहा, 'इस वजह से अब मेरी जान खतरे में है। पुलिस को मेरी सुरक्षा करने का दायित्व निभाना चाहिए।' उनके वकील ने सुनवाई के दौरान भी हत्या की आशंका जताते हुए सुरक्षा की माँग की थी।

शिकायतों का विवरण

दास के अनुसार उन्होंने डायमंड हार्बर सांसद के खिलाफ कुल 17 शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिनमें से 10 से 12 शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।

आगे क्या होगा

अभिषेक बनर्जी को मिली अंतरिम सुरक्षा की अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। शिकायतकर्ता दास ने संकेत दिया कि वे अपनी सुरक्षा बहाली के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाएँगे। इस मामले का अगला मोड़ इस बात पर निर्भर करेगा कि उच्च न्यायालय शेष मामलों पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शिकायतकर्ता की सुरक्षा हटाए जाने का दावा यदि सत्य है, तो यह राज्य तंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाता है। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल के नेता और विपक्षी शिकायतकर्ता के बीच यह टकराव केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्वायत्तता की परीक्षा है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर न्यायालय के आदेश तक सीमित रहती है — लेकिन असली कहानी यह है कि आरोपकर्ता और आरोपित, दोनों पक्ष सुरक्षा और न्याय के लिए न्यायपालिका का दरवाजा खटखटा रहे हैं, जो राज्य पुलिस पर से भरोसे के क्षरण का संकेत है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से क्या राहत मिली?
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 11 अगस्त को अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज तीन अतिरिक्त मामलों में गिरफ्तारी समेत कड़ी पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी। इससे पहले उन्हें 13 मामलों में पहले ही राहत मिल चुकी थी, यानी अब सभी 16 मामलों में अंतरिम सुरक्षा प्राप्त है।
शिकायतकर्ता अभिजीत दास कौन हैं और उन्होंने क्या आरोप लगाए हैं?
अभिजीत दास भाजपा से जुड़े डायमंड हार्बर निवासी हैं, जिन्होंने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 17 शिकायतें दर्ज कराई थीं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन पर तीन-चार बार हमले हुए, पैर में धातु की प्लेट लगवानी पड़ी, और बनर्जी विदेश से भी उनकी हत्या का आदेश दे सकते हैं।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कुल कितने मामले दर्ज हैं?
पश्चिम बंगाल पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कुल 16 मामले दर्ज किए हैं। 11 अगस्त के आदेश के बाद अब सभी 16 मामलों में उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्राप्त है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को विदेश यात्रा की अनुमति क्यों दी?
सर्वोच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को आँख के इलाज के लिए तीन सप्ताह की विदेश यात्रा की अनुमति दी है। इसी अनुमति के संदर्भ में शिकायतकर्ता दास ने आशंका जताई कि बनर्जी विदेश से भी उनके खिलाफ कोई कदम उठा सकते हैं।
शिकायतकर्ता की CISF सुरक्षा क्यों हटाई गई?
अभिजीत दास के अनुसार कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के बाद उनकी CISF सुरक्षा हटा ली गई। उन्होंने कहा कि इससे उनकी जान खतरे में है और पुलिस को उनकी सुरक्षा का दायित्व निभाना चाहिए। हालाँकि, सुरक्षा हटाए जाने के आधिकारिक कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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