कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 17 जुलाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी, CID जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 3 जुलाई 2025 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगति के मामले में गिरफ्तारी सहित समस्त पुलिस दंडात्मक कार्रवाई से 17 जुलाई 2025 तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ ने साथ ही निर्देश दिया कि अभिषेक बनर्जी राज्य अपराध जांच विभाग (CID) की चल रही जांच में पूर्ण सहयोग बनाए रखें।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद की जड़ उस प्रस्ताव में है जो विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को सौंपा गया था। इस प्रस्ताव में सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय को विपक्ष का उपनेता तथा फिरहाद हकीम को TMC विधायक दल का मुख्य सचेतक नियुक्त करने का प्रस्ताव था। कथित तौर पर इस प्रस्ताव पर कुछ TMC विधायकों के हस्ताक्षर जाली या विसंगतिपूर्ण पाए गए।
इस वर्ष मई 2025 में CID ने औपचारिक जांच शुरू की, जब TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इन विसंगतियों को सार्वजनिक रूप से उठाया। शिकायत सामने आते ही TMC ने दोनों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया।
विधायक दल में विद्रोह और नया प्रस्ताव
इस घटनाक्रम के बाद TMC के भीतर बड़ा राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिला। विपक्ष के आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त नेता के नेतृत्व में 60 विधायकों ने विद्रोह करते हुए TMC विधायक दल में बहुमत का दावा किया और एक नया प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा अध्यक्ष ने यह नया प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसके बाद ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में औपचारिक मान्यता दी गई।
चुनाव आयोग के समक्ष दावा
3 जुलाई से एक दिन पूर्व, TMC के इस 'विरोधी किंतु बहुमत वाले' गुट ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की पूर्ण पीठ से मुलाकात की। इस गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना अधिकार जताया — जो स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि यह विवाद अब विधानसभा की दीवारों से बाहर निकलकर संवैधानिक संस्थाओं तक पहुँच गया है। गौरतलब है कि किसी दल के चुनाव चिन्ह पर दावे का अर्थ पार्टी की वैधानिक पहचान को चुनौती देना होता है।
अभिषेक बनर्जी की CID से पूछताछ
इस मामले में अभिषेक बनर्जी से दक्षिण कोलकाता के भवानी भवन स्थित CID मुख्यालय में दो बार पूछताछ की जा चुकी है। अभिषेक ने स्वयं घोषणा की थी कि वे जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग देते रहेंगे। उच्च न्यायालय ने अंतरिम सुरक्षा देते हुए यह शर्त भी बनाए रखी कि यह सहयोग निर्बाध जारी रहे।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2025 को निर्धारित है, जब न्यायालय अंतरिम सुरक्षा की समीक्षा करेगा। इस बीच CID की जांच जारी है और ECI के समक्ष दायर पार्टी-चिन्ह विवाद एक अलग कानूनी मोर्चा खोल सकता है। यह मामला पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ TMC के भीतर गहराते अंतर्कलह का स्पष्ट प्रतिबिंब है।