3 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 17 जुलाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी, CID जांच जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 17 जुलाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी, CID जांच जारी

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा में हस्ताक्षर विसंगति का यह मामला अब TMC के भीतर के गहरे अंतर्कलह का दर्पण बन चुका है। 60 विधायकों का विद्रोह, ECI के समक्ष पार्टी चिन्ह पर दावा और अभिषेक बनर्जी को अदालती सुरक्षा — यह घटनाक्रम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की पीठ ने अभिषेक बनर्जी को 17 जुलाई 2025 तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी।
विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी नियुक्तियों के प्रस्ताव पर TMC विधायकों के कथित जाली हस्ताक्षरों से जुड़ा है।
TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विसंगतियाँ उठाईं; TMC ने दोनों को निलंबित कर दिया।
60 विधायकों के विद्रोही गुट ने ECI के समक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार का दावा किया।
अभिषेक बनर्जी से भवानी भवन, दक्षिण कोलकाता में CID दो बार पूछताछ कर चुकी है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 3 जुलाई 2025 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगति के मामले में गिरफ्तारी सहित समस्त पुलिस दंडात्मक कार्रवाई से 17 जुलाई 2025 तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ ने साथ ही निर्देश दिया कि अभिषेक बनर्जी राज्य अपराध जांच विभाग (CID) की चल रही जांच में पूर्ण सहयोग बनाए रखें।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद की जड़ उस प्रस्ताव में है जो विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को सौंपा गया था। इस प्रस्ताव में सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय को विपक्ष का उपनेता तथा फिरहाद हकीम को TMC विधायक दल का मुख्य सचेतक नियुक्त करने का प्रस्ताव था। कथित तौर पर इस प्रस्ताव पर कुछ TMC विधायकों के हस्ताक्षर जाली या विसंगतिपूर्ण पाए गए।

इस वर्ष मई 2025 में CID ने औपचारिक जांच शुरू की, जब TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इन विसंगतियों को सार्वजनिक रूप से उठाया। शिकायत सामने आते ही TMC ने दोनों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया।

विधायक दल में विद्रोह और नया प्रस्ताव

इस घटनाक्रम के बाद TMC के भीतर बड़ा राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिला। विपक्ष के आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त नेता के नेतृत्व में 60 विधायकों ने विद्रोह करते हुए TMC विधायक दल में बहुमत का दावा किया और एक नया प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा अध्यक्ष ने यह नया प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसके बाद ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में औपचारिक मान्यता दी गई।

चुनाव आयोग के समक्ष दावा

3 जुलाई से एक दिन पूर्व, TMC के इस 'विरोधी किंतु बहुमत वाले' गुट ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की पूर्ण पीठ से मुलाकात की। इस गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना अधिकार जताया — जो स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि यह विवाद अब विधानसभा की दीवारों से बाहर निकलकर संवैधानिक संस्थाओं तक पहुँच गया है। गौरतलब है कि किसी दल के चुनाव चिन्ह पर दावे का अर्थ पार्टी की वैधानिक पहचान को चुनौती देना होता है।

अभिषेक बनर्जी की CID से पूछताछ

इस मामले में अभिषेक बनर्जी से दक्षिण कोलकाता के भवानी भवन स्थित CID मुख्यालय में दो बार पूछताछ की जा चुकी है। अभिषेक ने स्वयं घोषणा की थी कि वे जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग देते रहेंगे। उच्च न्यायालय ने अंतरिम सुरक्षा देते हुए यह शर्त भी बनाए रखी कि यह सहयोग निर्बाध जारी रहे।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2025 को निर्धारित है, जब न्यायालय अंतरिम सुरक्षा की समीक्षा करेगा। इस बीच CID की जांच जारी है और ECI के समक्ष दायर पार्टी-चिन्ह विवाद एक अलग कानूनी मोर्चा खोल सकता है। यह मामला पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ TMC के भीतर गहराते अंतर्कलह का स्पष्ट प्रतिबिंब है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन CID जांच और ECI की सुनवाई — दो समानांतर मोर्चे — TMC के लिए दीर्घकालिक राजनीतिक जोखिम बने हुए हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि पार्टी चिन्ह विवाद किसी भी चुनाव से पहले TMC की संस्थागत वैधता को कमज़ोर कर सकता है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को किस मामले में सुरक्षा दी है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगति के मामले में अभिषेक बनर्जी को 17 जुलाई 2025 तक गिरफ्तारी सहित समस्त पुलिस दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। यह विवाद विधानसभा में विपक्षी नियुक्तियों के प्रस्ताव से जुड़ा है।
पश्चिम बंगाल विधायक हस्ताक्षर विसंगति मामला क्या है?
विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को सौंपे गए एक प्रस्ताव पर TMC के कुछ विधायकों के हस्ताक्षर कथित तौर पर जाली या विसंगतिपूर्ण पाए गए। इस प्रस्ताव में सोवनदेब चट्टोपाध्याय, असीमा पात्रा, नयना बंदोपाध्याय और फिरहाद हकीम की विधानसभा में नियुक्तियों का प्रावधान था। TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इसे उजागर किया, जिसके बाद CID ने मई 2025 में जांच शुरू की।
TMC के 60 विधायकों का विद्रोह क्यों हुआ?
हस्ताक्षर विसंगति के आरोपों और TMC द्वारा शिकायतकर्ता विधायकों को निलंबित किए जाने के बाद, विपक्ष के मान्यता प्राप्त नेता के नेतृत्व में 60 विधायकों ने TMC विधायक दल में बहुमत का दावा करते हुए विद्रोह किया। विधानसभा अध्यक्ष ने नया प्रस्ताव स्वीकार कर ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी।
ECI के समक्ष TMC के पार्टी चिन्ह पर दावा क्यों किया गया?
TMC के विद्रोही बहुमत गुट ने भारतीय चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात कर पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना अधिकार जताया। यह कदम दर्शाता है कि विवाद विधानसभा से आगे बढ़कर पार्टी की संवैधानिक पहचान को लेकर एक नए कानूनी मोर्चे पर पहुँच गया है।
अभिषेक बनर्जी के मामले में आगे क्या होगा?
मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2025 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में होगी, जब अंतरिम सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। इस बीच CID की जांच जारी है और अभिषेक बनर्जी को न्यायालय के निर्देशानुसार जांच में पूर्ण सहयोग देना अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले