कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 'फर्जी हस्ताक्षर' मामले में 30 नवंबर तक अंतरिम सुरक्षा बढ़ाई
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल-न्यायाधीश पीठ ने सोमवार, 17 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को विधायकों के 'फर्जी हस्ताक्षर' मामले में राज्य पुलिस की कठोर कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक बढ़ा दी। न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की पीठ ने यह आदेश तब दिया जब मामले में राज्य की ओर से पेश वकील ने फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बनर्जी की संलिप्तता का तर्क रखा।
मामले की पृष्ठभूमि
राज्य पुलिस का अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) उस सरकारी दस्तावेज़ की जांच कर रहा है जो विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था और जिस पर TMC के कई विधायकों के हस्ताक्षर कथित तौर पर जाली बताए जा रहे हैं। दस्तावेज़ पर कुल 70 विधायकों के हस्ताक्षर थे, जिनमें से पाँच विधायकों ने शिकायत की कि उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं।
गौरतलब है कि यह दस्तावेज़ 6 मई को जनरल सेक्रेटरी के पैड पर लिखकर विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया था, जबकि वास्तव में उस दिन कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था और हस्ताक्षर 19 मई को लिए गए थे।
फोरेंसिक जांच के निष्कर्ष
अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने न्यायालय को बताया कि फोरेंसिक जांच में शिकायतकर्ता पाँच विधायकों में से तीन के हस्ताक्षर जाली पाए गए हैं। मजूमदार ने यह भी दलील दी कि यह जालसाजी अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि 6 मई को कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ, फिर भी दस्तावेज़ में उसी तारीख का उल्लेख किया गया।
न्यायालय की प्रारंभिक टिप्पणी
राज्य पक्ष की दलीलों के बावजूद, न्यायमूर्ति कौशिक चंदा ने प्रारंभिक तौर पर यह नहीं माना कि अभिषेक बनर्जी फर्जी हस्ताक्षर के मामले में सीधे शामिल थे। इसी आधार पर अंतरिम सुरक्षा को 30 नवंबर तक जारी रखने का आदेश दिया गया।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर से पहले निर्धारित होने की संभावना है। सीआईडी की जांच जारी है और न्यायालय के अंतरिम आदेश के चलते फिलहाल बनर्जी को गिरफ्तारी या कठोर पुलिस कार्रवाई से राहत मिली हुई है। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक संवेदनशील मोड़ पर है, क्योंकि अभिषेक बनर्जी TMC के भीतर एक प्रमुख नेता माने जाते हैं।