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पुतिन ने मोदी की तारीफ की: 'यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हर बार उठाते हैं आवाज़'

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पुतिन ने मोदी की तारीफ की: 'यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हर बार उठाते हैं आवाज़'

सारांश

मॉस्को के वल्दाई मंच पर पुतिन ने मोदी को सराहा — कहा, भारतीय PM हर मुलाकात में यूक्रेन को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के सुझाव देते हैं। यह बयान भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति को वैश्विक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य बातें

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 23वें वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब में PM नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की।
पुतिन के अनुसार, मोदी हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने का मुद्दा उठाते हैं और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान सुझाते हैं।
पुतिन ने भारत सरकार के रुख को 'निष्पक्ष' बताया, लेकिन संघर्ष समाप्त कराने की दिशा में प्रयासरत भी।
पुतिन ने भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता को दूसरों के लिए मिसाल बताया।
पुतिन ने रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूत और वित्तीय संस्थाओं को स्थिर बताया।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2 अक्टूबर 2026 को मॉस्को में आयोजित 23वें वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब के मुख्य सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि वे हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का मुद्दा उठाते हैं। पुतिन के अनुसार, मोदी ऐसे सुझाव प्रस्तुत करते हैं जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हों और इस संघर्ष को जल्द-से-जल्द समाप्त करने की दिशा में हों।

वल्दाई मंच पर मोदी की प्रशंसा

पुतिन ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा, 'वह बहुत अच्छे सुझाव देते हैं, जिनका मकसद ऐसे समाधान तलाशना होता है जो दोनों पक्षों को स्वीकार हों, खास तौर पर ऐसे समाधान जिन पर दोनों पक्ष सहमत हो सकें।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत सरकार के प्रमुख का रुख निष्पक्ष है, लेकिन उनकी कोशिश इस संघर्ष को समाप्त कराने की दिशा में है।

पुतिन ने आगे कहा, 'हम भारत के प्रधानमंत्री के आभारी हैं कि वह इस संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से और जितनी जल्दी हो सके, सुलझाना चाहते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन में युद्ध के कोई ठोस समाधान की राह अभी भी कठिन बनी हुई है।

भारतीय संस्कृति की भी सराहना

वल्दाई सत्र के दौरान पुतिन ने भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कुछ ऐसा है जो इसे बेहद खास बनाता है — एक तरफ इतनी विविधता और अलग-अलग पहचान, और दूसरी तरफ एकता भी। उनके अनुसार, यह निश्चित रूप से दूसरों के लिए एक मिसाल है।

रूस की अर्थव्यवस्था पर पुतिन का बयान

सत्र के दौरान पुतिन ने रूस की आर्थिक स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा, 'हमारे सामने कुछ मुश्किलें जरूर हैं, लेकिन हम उनका समाधान कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था से जुड़े बड़े आँकड़े दिखाते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है और हमारी वित्तीय व्यवस्था और आर्थिक संस्थाएँ स्थिर तरीके से काम कर रही हैं।'

पुतिन ने यह भी कहा कि रूस भविष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए जोखिमों, मौकों और जरूरी लक्ष्यों का वास्तविकता के आधार पर आकलन करते हुए अपना रास्ता तय करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस दूसरे देशों और वहाँ के लोगों के साथ मिलकर भी इस दिशा में काम करने को तैयार है।

भारत-रूस संबंधों का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेन और रूस — दोनों की यात्रा कर चुके हैं और भारत लगातार इस संघर्ष में कूटनीतिक तटस्थता की नीति अपनाता आ रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों पर मतदान से परहेज किया है, जबकि मानवीय पीड़ा को समाप्त करने की वकालत भी की है। यह बयान भारत की उस 'स्वतंत्र विदेश नीति' की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है, जिसे नई दिल्ली 'रणनीतिक स्वायत्तता' कहती है।

आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या मोदी की मध्यस्थता की कोशिशें किसी ठोस वार्ता-प्रक्रिया का रूप लेती हैं, या फिर कूटनीतिक प्रशंसा तक ही सीमित रहती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे यथार्थवादी नज़रिये से भी देखना ज़रूरी है — मॉस्को में मोदी की तारीफ करना रूस के लिए भारत को पश्चिमी दबाव से दूर रखने की एक सुचिंतित रणनीति भी हो सकती है। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति को दोनों पक्षों से सराहना मिलती है, पर असली कसौटी यह है कि क्या यह प्रशंसा किसी ठोस वार्ता-प्रक्रिया में तब्दील होती है। गौरतलब है कि मोदी यूक्रेन और रूस — दोनों की यात्रा कर चुके हैं, पर अब तक कोई औपचारिक मध्यस्थता-ढाँचा नहीं बन पाया है। बिना किसी सत्यापन-योग्य कूटनीतिक परिणाम के, यह बयान भारत की साख के लिए प्रतीकात्मक जीत तो है, पर यूक्रेन की जनता के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुतिन ने मोदी की तारीफ क्यों की?
23वें वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब में पुतिन ने कहा कि PM मोदी हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के सुझाव देते हैं और ऐसे समाधान प्रस्तुत करते हैं जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हों। पुतिन ने भारत के इस रुख को 'निष्पक्ष' और 'संघर्ष-समाप्ति की दिशा में' बताया।
वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब क्या है?
वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब एक रूसी थिंक-टैंक मंच है जो हर साल वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर प्रमुख नेताओं और विशेषज्ञों को एकत्र करता है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन इसमें नियमित रूप से मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होते हैं।
यूक्रेन संघर्ष में भारत की भूमिका क्या है?
भारत ने इस संघर्ष में कूटनीतिक तटस्थता की नीति अपनाई है और संयुक्त राष्ट्र में रूस-विरोधी कई प्रस्तावों पर मतदान से परहेज किया है। PM मोदी रूस और यूक्रेन — दोनों देशों की यात्रा कर चुके हैं और शांतिपूर्ण समाधान की अपील कर चुके हैं।
पुतिन ने भारतीय संस्कृति के बारे में क्या कहा?
पुतिन ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विविधता और एकता का अनूठा संयोजन है, जो इसे दूसरों के लिए मिसाल बनाता है। उन्होंने इसे एक ऐसे उदाहरण के रूप में पेश किया जिसे दुनिया के अन्य देश अपना सकते हैं।
पुतिन ने रूस की अर्थव्यवस्था पर क्या कहा?
पुतिन ने वल्दाई सत्र में कहा कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और वित्तीय संस्थाएँ स्थिर रूप से कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि रूस जोखिमों और मौकों का वास्तविकता के आधार पर आकलन करते हुए आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
राष्ट्र प्रेस
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