7 अक्टूबर 2026
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रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का स्पष्ट संदेश: संवाद और कूटनीति ही समाधान का रास्ता

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रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का स्पष्ट संदेश: संवाद और कूटनीति ही समाधान का रास्ता

सारांश

युद्ध के बीच भारत की शांतिदूत भूमिका फिर सुर्खियों में — विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि PM मोदी लगातार संवाद और कूटनीति पर जोर दे रहे हैं। रूस और यूक्रेन, दोनों ने भारत के प्रयासों की सराहना की है, जबकि काला सागर सुरक्षा और अनाज निर्यात जैसे ठोस मुद्दों पर बातचीत जारी है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष में संवाद और कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता मानता है।
PM मोदी ने बिश्केक में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान अंतहीन युद्ध समाप्त करने का आह्वान किया था।
रूस और यूक्रेन , दोनों ने भारत की मध्यस्थ भूमिका की सराहना की है — पुतिन और यूक्रेनी विदेश मंत्री सिबिहा की टिप्पणियों का उल्लेख किया गया।
भारत काला सागर में जहाज़ सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा निर्यात तथा हमलों को रोकने के मुद्दों पर दोनों पक्षों से सक्रिय बातचीत कर रहा है।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ( नई दिल्ली ) के दौरान भी मोदी ने शांति के लिए कूटनीति का संदेश दोहराया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए भारत संवाद और कूटनीति को ही एकमात्र प्रभावी मार्ग मानता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार यह रेखांकित कर चुके हैं कि किसी भी समस्या का हल युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत की मेज़ पर मिलता है।

भारत का सुसंगत रुख

जायसवाल ने कहा, 'यूक्रेन संघर्ष के मुद्दे पर भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि संवाद और कूटनीति ही आगे का रास्ता है। प्रधानमंत्री कई बार कह चुके हैं कि यह युद्ध का युग नहीं है और किसी भी समाधान का रास्ता युद्ध के मैदान से नहीं निकलता।' उन्होंने बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मोदी की मुलाकात का भी संदर्भ दिया, जिसमें प्रधानमंत्री ने अंतहीन युद्ध समाप्त कर शांति का रास्ता अपनाने का आह्वान किया था।

दोनों पक्षों से संवाद जारी

जायसवाल ने बताया कि भारत ने रूस और यूक्रेन, दोनों पक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है और शांति-स्थापना के उद्देश्य से दोनों देशों को इन प्रयासों की सराहना करते देखा गया है। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा की हालिया सकारात्मक टिप्पणियों का उल्लेख किया, जिनमें दोनों ने भारत की मध्यस्थ भूमिका की प्रशंसा की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इन प्रयासों का सार्वजनिक रूप से उल्लेख कर चुके हैं।

विशेष मुद्दों पर बातचीत

प्रवक्ता ने बताया कि भारत, संघर्ष से जुड़े कुछ ठोस और संवेदनशील विषयों पर भी दोनों पक्षों से चर्चा कर रहा है। इनमें काला सागर में जहाज़ों की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा निर्यात से जुड़ी चिंताएँ तथा संभावित हमलों को रोकने की संभावनाएँ शामिल हैं।

जायसवाल के शब्दों में, 'भारत काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, रूस और यूक्रेन की अनाज और ऊर्जा निर्यात से जुड़ी चिंताओं तथा संभावित हमलों को रोकने जैसे मुद्दों पर मददगार की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। इस संबंध में दोनों देशों के साथ हमारी बातचीत जारी है।'

पुतिन और ब्रिक्स का संदर्भ

गौरतलब है कि बीते सप्ताह मॉस्को में आयोजित एक कार्यक्रम में पुतिन ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का मुद्दा उठाते हैं और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान खोजने में गहरी रुचि रखते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया था जब भारत की कूटनीतिक सक्रियता को पश्चिमी देशों में भी ध्यान से देखा जा रहा है।

इससे पहले, नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पुतिन से मुलाकात में भी मोदी ने दोहराया था कि मौजूदा संघर्षों के निपटारे के लिए संवाद और कूटनीति सबसे प्रभावी माध्यम हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्धविराम की माँग तेज़ हो रही है और कई देश मध्यस्थता की भूमिका में आना चाहते हैं।

भारत की भूमिका और आगे की राह

विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह रुख उसकी परंपरागत 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति के अनुरूप है, जिसमें वह किसी एक गुट के साथ खड़ा हुए बिना शांति-प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाता है। काला सागर अनाज निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भारत की मध्यस्थता का दायरा आने वाले महीनों में और व्यापक होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भारत की कूटनीतिक उपयोगिता सिद्ध करने की कोशिश है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये प्रयास किसी ठोस युद्धविराम फ्रेमवर्क में तब्दील हो सकते हैं — या यह भी सराहना और बयानों तक सीमित रहेगा। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' उसे एक विश्वसनीय मध्यस्थ बनाती है, लेकिन विश्वसनीयता को परिणाम में बदलने के लिए इससे कहीं अधिक राजनीतिक पूँजी की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का रुख क्या है?
भारत का स्पष्ट रुख है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान केवल संवाद और कूटनीति से संभव है, युद्ध के मैदान से नहीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 अक्टूबर 2026 को यह रेखांकित किया कि PM मोदी यह बात बार-बार कह चुके हैं।
PM मोदी ने पुतिन से शांति के बारे में कब और कहाँ बात की?
PM मोदी ने बिश्केक में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान अंतहीन युद्ध समाप्त करने और शांति का रास्ता अपनाने का आह्वान किया था। इससे पहले नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी मोदी ने यही संदेश दोहराया था।
भारत रूस-यूक्रेन के बीच किन मुद्दों पर मध्यस्थता कर रहा है?
भारत काला सागर में जहाज़ों की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा निर्यात से जुड़ी चिंताओं तथा संभावित हमलों को रोकने की संभावनाओं पर दोनों देशों से सक्रिय बातचीत कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये वार्ताएँ जारी हैं।
रूस और यूक्रेन ने भारत की भूमिका को लेकर क्या कहा है?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मॉस्को में एक कार्यक्रम में कहा कि PM मोदी हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का मुद्दा उठाते हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने भी भारत की भूमिका की सराहना की है, जैसा कि MEA प्रवक्ता जायसवाल ने उल्लेख किया।
भारत की इस कूटनीति का क्या महत्व है?
भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति उसे किसी एक गुट के साथ खड़े हुए बिना दोनों पक्षों से बात करने की स्थिति में रखती है। यह वैश्विक स्तर पर भारत को एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने का प्रयास है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब युद्धविराम की माँगें तेज़ हो रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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