जयशंकर ने भारत-रूस सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता, यूक्रेन संकट के कूटनीतिक समाधान पर भारत का जोर
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारत-रूस संबंधों पर सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक सहयोग सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी की समीक्षा की गई। बैठक में यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए वार्ता और कूटनीति के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को भी रेखांकित किया गया।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
जयशंकर ने बैठक के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'भारत-रूस संबंधों पर सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों समेत कई क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की। इसके साथ ही यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्ते को भारत के लगातार समर्थन पर भी जोर दिया।'
पुतिन ने की मोदी के प्रयासों की सराहना
उल्लेखनीय है कि इस बैठक से एक दिन पहले — शुक्रवार, 2 अक्टूबर को — रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मॉस्को में आयोजित वल्दाई इंटरनेशनल डिस्कशन क्लब के 23वें सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति प्रयासों की खुलकर सराहना की। रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, पुतिन ने कहा, 'भारत के प्रधानमंत्री हर मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने का मुद्दा उठाते हैं। वह बहुत अच्छे सुझाव देते हैं, जिनका मकसद ऐसे समाधान तलाशना होता है जो दोनों पक्षों को स्वीकार हों — खासतौर पर ऐसे समाधान जिन पर दोनों पक्ष सहमत हो सकें।'
पुतिन ने आगे कहा, 'हम प्रधानमंत्री के आभारी हैं कि वह इस संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से और जितनी जल्दी हो सके, सुलझाना चाहते हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार का रुख निष्पक्ष है, लेकिन उसकी कोशिश संघर्ष को समाप्त कराने की दिशा में है।
भारत की कूटनीतिक स्थिति और पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय में आई है जब भारत ने यूक्रेन संकट में लगातार तटस्थ लेकिन सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका बनाए रखी है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 में कीव और 2024 में ही मॉस्को की यात्राएँ की थीं, जो वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव का संकेत थीं। भारत संयुक्त राष्ट्र के उन प्रस्तावों पर मतदान से अनुपस्थित रहा है जो रूस की निंदा करते हैं, जबकि राजनयिक स्तर पर युद्धविराम और वार्ता की अपील करता रहा है।
भारत-रूस संबंध ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में गहरे हैं। आलोचकों का कहना है कि पश्चिमी देश भारत के इस 'सामरिक स्वायत्तता' के दृष्टिकोण को लेकर असहज हैं, जबकि भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञ इसे राष्ट्रीय हित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के अनुरूप बताते हैं।
आम जनता और कूटनीति पर असर
यूक्रेन संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहा है, जिसका बोझ भारत के उपभोक्ताओं पर भी आंशिक रूप से पड़ा है। भारत के कूटनीतिक प्रयास यदि किसी समाधान की दिशा में सफल होते हैं, तो इसका लाभ न केवल भारत बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है।
क्या होगा आगे
सलाहकार समिति की इस बैठक के निष्कर्षों के आधार पर भारत-रूस संबंधों के अगले चरण की रूपरेखा तय होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर की यह सक्रियता आने वाले महीनों में किसी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय संपर्क का संकेत भी हो सकती है।