3 अक्टूबर 2026 का पंचांग: अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52–12:39, पूर्व दिशा यात्रा से बचें
सारांश
मुख्य बातें
शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 7:59 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। पंचांग हिंदू काल-गणना की वह विधि है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है और शुभ कार्यों, यात्रा, निवेश तथा पूजा-पाठ से पूर्व इसका अवलोकन आवश्यक माना जाता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:23 बजे और सूर्यास्त शाम 6:08 बजे होगा। चंद्रोदय रात 11:47 बजे तथा चंद्रास्त दोपहर 1:00 बजे होगा। सूर्य इस दिन हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त नक्षत्र 13वाँ नक्षत्र है जिसका अर्थ 'हाथ' है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य का हस्त नक्षत्र में प्रवेश सभी 12 राशियों को प्रभावित करता है।
चंद्रमा इस दिन मिथुन राशि में संचार करेंगे। मिथुन वायु तत्व की राशि है जिसके स्वामी बुध हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस स्थिति में मन और बुद्धि का मेल बनता है, किंतु साथ ही मन में बेचैनी और विचारों की अधिकता (ओवरथिंकिंग) की संभावना भी रहती है। सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जिससे व्यावहारिक और योजनाबद्ध कार्यशैली लाभकारी मानी जाती है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजीत मुहूर्त है, जो सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक लगभग 48 मिनट का रहेगा। यह दिनमान का आठवाँ मुहूर्त होता है, जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर स्थित होते हैं। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से समस्त अशुभ प्रभाव और दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
अमृतकाल शाम 4:05 बजे से रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार यह अत्यंत सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण समयावधि है। नया व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्त्वपूर्ण यात्रा के लिए इसे श्रेष्ठ माना गया है।
शनिवार को दोपहर 3:21 बजे तक वरीयान योग रहेगा। यह 27 नित्य योगों में से 18वाँ योग है। संस्कृत में 'वरीयान' का अर्थ श्रेष्ठ और उत्तम होता है। इसके अधिपति देवता धन के स्वामी कुबेर हैं तथा प्रेरक ग्रह गुरु (बृहस्पति) और शुक्र माने जाते हैं।
अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
इस दिन राहुकाल सुबह 9:19 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल में कोई भी नया या शुभ कार्य प्रारंभ करना अशुभ माना जाता है। यह काल सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बाँटकर निकाला जाता है, जो प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है।
गुलिक काल सुबह 6:23 से 7:51 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस काल में नए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं, हालाँकि बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अपेक्षाकृत उत्तम माना गया है।
यमगंड काल दोपहर 1:44 से 3:12 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है। इस अवधि में नया व्यापार, यात्रा और धन-लेनदेन से बचने की सलाह ज्योतिष शास्त्र में दी गई है।
दिशाशूल: पूर्व दिशा में यात्रा से बचें
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा तथा ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल वह अशुभ दिशा होती है जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना हानिकारक माना जाता है। इसलिए इस दिन पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इन मुहूर्तों और कालों की गणना स्थान के अनुसार भिन्न हो सकती है। किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य से पूर्व अपने स्थानीय पंचांग और योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श करना उचित रहेगा।