26 अक्टूबर 2026 का पंचांग: अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से 12:33, पूर्व दिशा यात्रा से बचें
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू काल-गणना पद्धति पंचांग के अनुसार, सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सुबह 9:41 बजे तक रहेगी, इसके पश्चात कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा, जिसे दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। दिशाशूल पूर्व दिशा में होने के कारण इस दिन पूर्व दिशा की यात्रा वर्जित मानी गई है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि रविवार, 25 अक्टूबर को सुबह 11:56 बजे से आरंभ होकर सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। तत्पश्चात कृष्ण पक्ष प्रतिपदा शुरू होगी, जो 27 अक्टूबर की सुबह 7:01 बजे तक रहेगी।
सोमवार को सूर्योदय सुबह 6:32 बजे और सूर्यास्त शाम 5:48 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 5:49 बजे और चंद्रास्त सुबह 7:30 बजे होगा।
नक्षत्र, योग और राशि स्थिति
इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और इसके स्वामी राहु हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की स्थिति से व्यक्तियों में पुराने बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रवृत्ति प्रबल होती है।
योग की दृष्टि से दोपहर 2:15 बजे तक वज्र योग रहेगा, जिसके पश्चात सिद्धि योग प्रारंभ होगा। वज्र योग 27 योगों में 15वाँ योग है, जिसके देवता वरुण देव माने जाते हैं। यह शक्ति, दृढ़ संकल्प और साहस का प्रतीक है।
सूर्य तुला राशि में रहेंगे, जिसे ज्योतिष में सूर्य की नीच राशि कहा जाता है। इस स्थिति में आत्मबल कुछ कमज़ोर महसूस हो सकता है और निर्णय लेने में कठिनाई संभव है। चंद्र देव शाम 7:22 बजे तक मीन राशि में रहेंगे, तत्पश्चात मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मीन राशि में चंद्रमा की उपस्थिति से व्यक्ति का स्वभाव कोमल, परोपकारी और आध्यात्मिक रुचि से युक्त होता है।
शुभ मुहूर्त और अमृतकाल
इस दिन का सबसे प्रमुख शुभ काल अभिजीत मुहूर्त है, जो सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। यह लगभग 45 मिनट की अवधि दिन का अष्टम मुहूर्त होती है, जब सूर्य मस्तक के ठीक ऊपर होते हैं। मान्यता है कि इस काल में आरंभ किए गए कार्यों के अशुभ दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
अमृतकाल सुबह 10:59 से दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार, यह अत्यंत मंगलकारी समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्त्वपूर्ण यात्राओं के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
सोमवार को राहुकाल सुबह 7:57 से 9:21 बजे तक रहेगा। यह अशुभ समयावधि नए कार्यों की शुरुआत के लिए वर्जित मानी जाती है, हालाँकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं। राहुकाल की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में विभाजित कर की जाती है।
यमगंड काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा। यह काल मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है और इसमें नया व्यापार, यात्रा तथा धन-लेनदेन वर्जित है।
गुलिक काल दोपहर 1:35 से 2:59 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला काल' भी कहा जाता है। इस दौरान नए कार्य आरंभ करने से बचना उचित है, परंतु बैंक में धनराशि जमा करना, दान देना या नियमित निवेश जारी रखना उचित माना गया है।
दिशाशूल: पूर्व दिशा में यात्रा वर्जित
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। दिशाशूल उस दिशा को इंगित करता है जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। अतः इस दिन पूर्व दिशा की ओर यात्रा टालने की सलाह पंचांग में दी गई है। अन्य दिशाओं में यात्रा पर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं है।