10 अक्टूबर 2026 का पंचांग: अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50–12:37, राहुकाल 9:19–10:46, पूर्व दिशा में यात्रा वर्जित
सारांश
मुख्य बातें
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के साथ शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा, जिसे दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, दिशाशूल पूर्व दिशा में होने के कारण इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचना उचित रहेगा।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि रात 9:19 बजे तक रहेगी, इसके पश्चात प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा। सूर्योदय सुबह 6:25 बजे और सूर्यास्त शाम 6:02 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 5:51 बजे और चंद्रास्त शाम 5:44 बजे होगा।
नक्षत्र और योग
इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हस्त नक्षत्र 27 नक्षत्रों में 13वाँ नक्षत्र है, जिसका अर्थ 'हाथ' है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। चंद्रमा का सूर्य से मित्रता का संबंध माना गया है, इसलिए यह स्थिति सभी 12 राशियों पर विशेष प्रभाव डालती है।
शनिवार को रात 10:02 बजे तक ऐंद्र (इंद्र) योग रहेगा। 27 नित्य योगों में यह 26वें स्थान पर आता है। वैदिक ज्योतिष में इसे अत्यंत शुभ, राजसी एवं प्रभावशाली योग माना जाता है, जो देवराज इंद्र के नेतृत्व, ऐश्वर्य और मान-सम्मान के गुणों का प्रतीक है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
दिन के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त के रूप में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। यह लगभग 48 मिनट का समय होता है और इसे दिनमान का आठवाँ मुहूर्त कहा जाता है। जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर होते हैं, तब यह मुहूर्त होता है। मान्यता है कि इस समय में किए गए कार्यों के सभी अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, अमृतकाल दोपहर 3:35 से शाम 5:13 बजे तक रहेगा। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल
इस दिन राहुकाल सुबह 9:19 से 10:46 बजे तक रहेगा। यह किसी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बाँटकर निकाला जाता है और प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है।
गुलिक काल सुबह 6:25 से 7:52 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहते हैं और इस काल में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना गया है। हालाँकि, इस काल में बैंक में धनराशि जमा करना, दान देना या निवेश करना शुभ माना जाता है।
यमगंड काल दोपहर 1:40 से 3:08 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से संबंधित माना जाता है। इस दौरान नया व्यापार या कार्य आरंभ करने, यात्रा पर निकलने और धन के लेनदेन से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
राशि स्थिति और दिशाशूल
शनिवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस स्थिति में व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना लाभकारी रहता है। चंद्रमा भी कन्या राशि में संचार करेंगे। कन्या राशि के स्वामी बुध हैं, जो चंद्रमा के मित्र हैं, अतः मन और भावनाएँ विश्लेषणात्मक एवं संवेदनशील रहेंगी।
इस दिन दिशाशूल पूर्व दिशा में है। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। अतः शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालना उचित रहेगा।
कुल मिलाकर, 10 अक्टूबर 2026 के दिन शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल का उपयोग करें तथा राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए कार्यों से बचें।