7 अक्टूबर 2026 का पंचांग: अमृतकाल रात 7:18–8:52, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45–दोपहर 12:32
सारांश
मुख्य बातें
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रात 11:16 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन शुभ योग और हस्त नक्षत्र का संयोग कई मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। पंचांग के अनुसार दिन का सबसे शुभ समय — अभिजीत मुहूर्त — सुबह 11:45 से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
बुधवार को सूर्योदय सुबह 6:24 बजे और सूर्यास्त शाम 6:05 बजे होगा। चंद्रोदय रात 2:59 बजे और चंद्रास्त शाम 4:02 बजे रहेगा। सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जबकि चंद्रमा सिंह राशि में विराजमान रहेंगे।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा के सिंह राशि में होने से व्यक्ति के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और भावनात्मक दृष्टिकोण पर विशेष प्रभाव पड़ता है। सिंह राशि का स्वामी सूर्य है, जो ऊर्जा और अधिकार का प्रतीक माना गया है।
नक्षत्र और योग
इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हस्त नक्षत्र 27 नक्षत्रों में 13वाँ नक्षत्र है, जिसका अर्थ 'हाथ' है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। मान्यता है कि सूर्य और चंद्रमा के बीच मित्रता संबंध के कारण यह नक्षत्र सौम्य फल देता है।
बुधवार को रात 2:51 बजे तक शुभ योग रहेगा। पंचांग के 27 नित्य योगों में यह 23वाँ योग है, जिसे अत्यंत मांगलिक माना गया है। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार, शुभ योग में सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, नए वाहन की खरीद, व्यापार का शुभारंभ और यात्रा जैसे मांगलिक कार्य शुभ फल देते हैं।
अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा — लगभग 48 मिनट की यह अवधि दिन का सर्वश्रेष्ठ समय मानी जाती है। ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर होते हैं, तब यह मुहूर्त होता है और इस दौरान किए गए कार्यों से समस्त अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, बुधवार रात 7:18 से 8:52 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष एवं पंचांग के अनुसार, अमृतकाल सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण शुभ मुहूर्त है, जिसे नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्त्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
इस दिन राहुकाल दोपहर 12:14 से 1:42 बजे तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार यह किसी नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए वर्जित समय है। गुलिक काल सुबह 10:47 से दोपहर 12:14 बजे तक रहेगा — इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। हालाँकि, मान्यता है कि इस काल में बैंक में धन जमा करना, दान और निवेश अच्छा माना जाता है।
यमगंड काल सुबह 7:52 से 9:19 बजे तक रहेगा। यह समय नए व्यापार, यात्रा और आर्थिक लेन-देन के लिए अशुभ माना गया है। इसके साथ ही बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा, अतः उत्तर दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
दिन का सारांश
कुल मिलाकर, 7 अक्टूबर 2026 का दिन शुभ योग, हस्त नक्षत्र, अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल के संयोग से मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त है। जो श्रद्धालु पूजा, निवेश, यात्रा या नए काम का शुभारंभ करना चाहते हैं, वे अभिजीत मुहूर्त या अमृतकाल को प्राथमिकता दे सकते हैं और राहुकाल व यमगंड काल से बचें।