18 अक्टूबर 2026 पंचांग: अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48–12:34, अमृतकाल 8:28–10:16 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 10:52 बजे तक रहेगी, इसके उपरांत नवमी तिथि आरंभ होगी जो अगले दिन दोपहर 12:50 बजे तक चलेगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा और अमृतकाल सुबह 8:28 बजे से 10:16 बजे तक रहेगा — दोनों ही शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम समय माने जाते हैं।
सूर्योदय, सूर्यास्त एवं ग्रह स्थिति
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:29 बजे और सूर्यास्त शाम 5:54 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 1:39 बजे और चंद्रास्त रात 12:45 बजे होगा। ग्रह स्थिति की दृष्टि से सूर्य देव इस दिन तुला राशि में और चंद्र देव मकर राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुला राशि में सूर्य को 'नीच' का माना जाता है, जिससे आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में कुछ उतार-चढ़ाव संभव है। तुला राशि में सूर्य के साथ बुध और शुक्र की उपस्थिति से त्रिग्रही योग (बुधादित्य और शुक्रादित्य योग) बनता है, जो आर्थिक मामलों पर मिला-जुला असर डाल सकता है।
नक्षत्र और योग का प्रभाव
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है। इस संयोग से व्यक्ति में आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा में वृद्धि होती है। नौकरीपेशा लोगों को उच्च अधिकारियों से सराहना मिलने की संभावना है, और प्रशासन या प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े लोगों को नई जिम्मेदारी अथवा पदोन्नति मिल सकती है। सोमवार को रात 12:34 बजे तक धृति योग रहेगा, जो 27 नित्य योगों में आठवाँ शुभ योग है। इसके स्वामी वरुण देव (जल) हैं और यह स्थायित्व एवं दीर्घकालिक कार्यों के लिए विशेष उत्तम माना जाता है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
अभिजीत मुहूर्त दिन का सर्वश्रेष्ठ और फलदायी समय होता है, जो तब घटित होता है जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर होते हैं। इस दिन यह सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा। ज्योतिष मान्यता के अनुसार इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव स्वतः दूर हो जाते हैं। अमृतकाल सुबह 8:28 बजे से 10:16 बजे तक रहेगा, जो नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
इस दिन राहुकाल सुबह 7:55 बजे से 9:20 बजे तक रहेगा। यह सोमवार को पड़ने वाला साप्ताहिक अशुभ काल है, जिसमें किसी नए या शुभ कार्य की शुरुआत वर्जित मानी जाती है। यमगंड काल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:11 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 1:37 बजे से 3:03 बजे तक रहेगा। ज्योतिष परंपरा में गुलिक काल को 'विषैला समय' कहा जाता है। इन तीनों कालों में नया कार्य प्रारंभ करने, यात्रा पर निकलने और आर्थिक लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
दिशाशूल और चंद्र राशि प्रभाव
सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा, इसलिए इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा करने से परहेज करना उचित माना जाता है। चंद्र देव मकर राशि में रहने के कारण व्यक्ति का स्वभाव व्यावहारिक और लक्ष्य-केंद्रित रहेगा। मकर राशि शनि से संबद्ध है, अतः इस दिन मेहनत, समय-पालन और कठिन परिस्थितियों में संयम विशेष फलदायी रहेगा। धृति योग और अमृतकाल के संयोग में नींव रखना, दीर्घकालिक निवेश और नए व्यापार की शुरुआत विशेष शुभ मानी जाती है।