23 अक्टूबर 2026 पंचांग: अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से 12:33 बजे तक, पश्चिम दिशा में यात्रा से बचें
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि दोपहर 2:36 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। इस दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा, जो दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहने के कारण उस दिशा में यात्रा से बचने का परामर्श दिया गया है।
सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चंद्र गणना
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:31 बजे और सूर्यास्त शाम 5:51 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 3:56 बजे और चंद्रास्त तड़के 4:24 बजे होगा। पंचांग के अनुसार सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में स्थित रहेंगे, जिसके स्वामी मंगल ग्रह हैं। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को सूर्य का मित्र माना जाता है, इसलिए इस संयोग में आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा में वृद्धि होती है। नौकरीपेशा व प्रबंधन से जुड़े लोगों को इस दिन विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिलने के संकेत बताए गए हैं।
शुभ मुहूर्त एवं योग
शुक्रवार रात 10:08 बजे तक ध्रुव योग रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, यह 27 नित्य योगों में से 12वाँ योग है और स्थिरता व मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं। इस योग में किए गए कार्य निष्फल नहीं होते और शुभ परिणाम देते हैं।
इसके अतिरिक्त दोपहर 12:57 बजे से 2:33 बजे तक अमृतकाल रहेगा। पंचांग में इसे नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
इस दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:11 बजे तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, यह समय किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। यमगंड काल दोपहर 3:01 बजे से 4:26 बजे तक रहेगा, जिसे मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है — इस दौरान नया व्यापार आरंभ करने, यात्रा पर निकलने और धन के लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
गुलिक काल सुबह 7:56 बजे से 9:21 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। हालाँकि, इस काल में बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना शुभ माना गया है।
राशि गोचर: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
शुक्रवार को सूर्य वृश्चिक राशि में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, वृश्चिक एक जल राशि है जिसके स्वामी मंगल हैं। इस गोचर में व्यक्ति की मानसिक स्थिति गहरी, चिंतनशील और रहस्यमयी बताई जाती है, और पुराने मानसिक तनाव से बाहर निकलने की ऊर्जा मिलती है।
वहीं, चंद्र देव मीन राशि से दोपहर 3:53 बजे मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष के स्वामी भी मंगल हैं, अतः इस काल में उत्साह, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के उभरने के संकेत दिए गए हैं।
दिशाशूल: पश्चिम दिशा में यात्रा से परहेज़
इस दिन दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। यदि पश्चिम दिशा की यात्रा अपरिहार्य हो, तो पंचांग के जानकार कुछ उपाय सुझाते हैं। शुभ कार्यों की योजना बनाते समय अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल का लाभ लिया जा सकता है।