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2 अक्टूबर 2026 का पंचांग: अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से 12:39 बजे तक, पश्चिम दिशा यात्रा से करें परहेज

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2 अक्टूबर 2026 का पंचांग: अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से 12:39 बजे तक, पश्चिम दिशा यात्रा से करें परहेज

सारांश

2 अक्टूबर 2026 के पंचांग में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 बजे और अमृतकाल 6:40 से 8:10 बजे तक रहेगा। हर्षण योग दिन को शुभ बनाता है, परंतु राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए कार्य वर्जित हैं। पश्चिम दिशा में यात्रा से बचने की सलाह है।

मुख्य बातें

षष्ठी तिथि सुबह 10:15 बजे तक, तत्पश्चात सप्तमी तिथि प्रारंभ होगी।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 बजे तक — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय।
अमृतकाल सुबह 6:40 से 8:10 बजे तक; नए व्यापार, पूजा और निवेश के लिए अनुकूल।
राहुकाल सुबह 10:47 से दोपहर 12:16 बजे तक; नए कार्यों के लिए अशुभ।
दिशाशूल पश्चिम दिशा में — उस दिशा की यात्रा से बचें।
हर्षण योग रात 8:52 बजे तक; उत्सव, विवाह और नए आरंभ के लिए शुभ।

2 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) को हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 10:15 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 बजे तक रहेगा, जो दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। साथ ही, शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में होने के कारण उस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति

इस दिन सूर्योदय सुबह 6:22 बजे और सूर्यास्त शाम 6:09 बजे होगा। चंद्रोदय रात 10:41 बजे और चंद्रास्त दोपहर 1:00 बजे का समय निर्धारित है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। हस्त नक्षत्र 27 नक्षत्रों में 13वाँ है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'हाथ' होता है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। चंद्रमा और सूर्य का आपस में मित्रता का संबंध माना गया है, जो इस नक्षत्र को विशेष रूप से अनुकूल बनाता है।

शुभ समय: अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल

दिन का सबसे फलदायी समय अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार, यह लगभग 48 मिनट का समयखंड होता है, जब सूर्य ठीक मस्तक के ऊपर होते हैं। मान्यता है कि इस मुहूर्त में आरंभ किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ दोष स्वतः दूर हो जाते हैं।

इसके अतिरिक्त, अमृतकाल तड़के 6:40 से सुबह 8:10 बजे तक रहेगा। पंचांग परंपरा में अमृतकाल को अत्यंत मंगलकारी एवं सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय माना जाता है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्त्वपूर्ण यात्रा के लिए यह अवधि विशेष रूप से श्रेष्ठ बताई गई है।

योग और ग्रह स्थिति

शुक्रवार को हर्षण योग रात 8:52 बजे तक रहेगा। हिंदू पंचांग के 27 नित्य योगों में हर्षण 14वाँ योग है। 'हर्षण' का शाब्दिक अर्थ आनंद और प्रसन्नता होता है। यह योग उत्सव, विवाह, सगाई, गृहप्रवेश, नामकरण और नए व्यापार की शुरुआत के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।

सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य के कन्या राशि में होने से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता और व्यावहारिक दृष्टिकोण पर विशेष प्रभाव पड़ता है — इस दौरान योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना लाभकारी रहता है। चंद्रमा दोपहर 3:40 बजे तक वृषभ राशि में रहेंगे, जो ज्योतिष में चंद्रमा की उच्च स्थिति मानी जाती है और मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।

अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड

इस दिन राहुकाल सुबह 10:47 से दोपहर 12:16 बजे तक रहेगा। पंचांग परंपरा के अनुसार राहुकाल किसी नए एवं शुभ कार्य के शुभारंभ के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। यह सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में विभाजित करके निकाला जाता है और प्रत्येक दिन लगभग 90 मिनट का होता है।

गुलिक काल सुबह 7:51 से 9:19 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है और इसे एक अशुभ उपग्रह काल माना जाता है। हालाँकि, बैंक में धनराशि जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अपेक्षाकृत उचित माना गया है।

यमगंड काल दोपहर 3:13 से शाम 4:41 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है। इस अवधि में नया व्यापार शुरू करने, यात्रा पर निकलने और धन के लेन-देन से परहेज करने की सलाह पंचांग परंपरा में दी गई है।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी

शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु परंपरा के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को इंगित करता है जिसमें उस दिन विशेष यात्रा को अशुभ माना जाता है। अतः 2 अक्टूबर 2026 को पश्चिम दिशा की यात्रा से बचना हितकर रहेगा। पंचांग का यह पहलू न केवल यात्रियों बल्कि किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए दिशा-निर्धारण करने वालों के लिए भी प्रासंगिक है। इस दिन सभी शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल का उपयोग करना सबसे अनुकूल रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए समय और तिथियाँ त्रुटिरहित होनी चाहिए। यह एक सदाबहार श्रेणी है जो समाचार नहीं, बल्कि सेवा पत्रकारिता का उदाहरण है।
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1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2 अक्टूबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त कब है?
2 अक्टूबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक रहेगा। यह लगभग 48 मिनट का समयखंड दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है और इसमें आरंभ किए गए कार्यों से अशुभ दोष स्वतः नष्ट होते हैं।
2 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय क्या है?
इस दिन राहुकाल सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक रहेगा। पंचांग परंपरा के अनुसार इस अवधि में कोई नया या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए, हालाँकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
2 अक्टूबर 2026 को कौन-सी तिथि है?
2 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 10:15 बजे तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
शुक्रवार को दिशाशूल किस दिशा में होता है?
शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहता है। ज्योतिष परंपरा के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है।
2 अक्टूबर 2026 को कौन-सा योग है?
इस दिन हर्षण योग रात 8:52 बजे तक रहेगा। यह 27 नित्य योगों में 14वाँ योग है और इसे उत्सव, विवाह, सगाई, गृहप्रवेश तथा नए व्यापार के आरंभ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
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