9 अक्टूबर 2026 पंचांग: कन्या राशि में चंद्रमा, अभिजीत मुहूर्त 11:50 से 12:37 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
9 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) का पंचांग आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि से आरंभ होता है, जो रात 9:36 बजे तक रहेगी, और इसके पश्चात अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी। हिंदू धर्म में पंचांग को शुभ कार्यों, यात्रा, निवेश और पूजा-पाठ का आधार माना जाता है — यह सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित काल-गणना पद्धति है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:25 बजे और सूर्यास्त शाम 6:03 बजे होगा। चंद्रोदय तड़के 4:55 बजे और चंद्रास्त शाम 5:11 बजे होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त नक्षत्र 13वाँ नक्षत्र है, जिसका अर्थ 'हाथ' होता है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। सूर्य के हस्त नक्षत्र में प्रवेश से सभी 12 राशियों पर गहरा ज्योतिषीय प्रभाव पड़ता है।
अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
इस दिन का सबसे शुभ समय अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। यह लगभग 48 मिनट का समयखंड होता है, जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से समस्त अशुभ दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अमृतकाल दोपहर 2:07 बजे से 3:43 बजे तक रहेगा — इसे नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है।
ब्रह्म योग और राशि गोचर
शुक्रवार को रात 11:19 बजे तक ब्रह्म योग रहेगा। पंचांग के 27 नित्य योगों में ब्रह्म योग 25वाँ और अत्यंत शुभ योग है — यह ज्ञान, बुद्धि, सात्विकता और देवत्व का प्रतीक माना जाता है। इस योग के स्वामी अश्विनी कुमार हैं। इस दिन सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जिससे व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष प्रभाव पड़ता है। साथ ही, चंद्रमा भी कन्या राशि में गोचर करेंगे — कन्या के स्वामी बुध हैं, जो चंद्रमा के मित्र हैं, इसलिए यह स्थिति व्यक्ति के मन और भावनाओं को विश्लेषणात्मक एवं संवेदनशील बनाती है।
अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
इस दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से 12:14 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि में कोई नया शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए। गुलिक काल सुबह 7:52 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा, जिसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है — इसमें नए कार्यों की शुरुआत से बचें। उल्लेखनीय है कि गुलिक काल में बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना अपेक्षाकृत ठीक माना जाता है। यमगंड काल दोपहर 3:08 बजे से 4:35 बजे तक रहेगा — इस दौरान नया व्यापार, यात्रा और पैसों के लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
दिशाशूल और विशेष ध्यान
शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन पश्चिम दिशा की ओर यात्रा करना अशुभ माना जाता है। जो लोग शुभ यात्रा की योजना बना रहे हैं, वे अभिजीत मुहूर्त या अमृतकाल में पूर्व, उत्तर या दक्षिण दिशा को प्राथमिकता दे सकते हैं।