4 अक्टूबर 2026 पंचांग: आश्विन कृष्ण नवमी के शुभ-अशुभ योग, अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल की पूरी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
4 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि रात्रि 2 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 7:54 बजे और सूर्यास्त शाम 7:23 बजे होगा। पंचांग हिंदू काल-गणना की वह प्रणाली है जो सूर्य, चंद्रमा एवं अन्य ग्रहों की गति और स्थिति पर आधारित होती है।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
पंचांग के अनुसार, 4 अक्टूबर 2026 को सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त नक्षत्र 13वाँ नक्षत्र है, जिसका अर्थ 'हाथ' होता है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा का सूर्य से मित्रवत संबंध माना गया है, जिससे सभी 12 राशियों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ता है।
इस दिन सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य के कन्या राशि में रहने के दौरान व्यावहारिक एवं योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना लाभकारी माना जाता है तथा व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता और कामकाज पर इसका विशेष असर पड़ता है।
चंद्रमा दोपहर 3:01 बजे तक मिथुन राशि में रहेंगे। इसके पश्चात वे कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कर्क राशि के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं, अतः इस राशि में आने पर संवेदनशीलता और भावनाओं का प्रभाव बढ़ जाता है। मिथुन राशि में चंद्रमा के रहने पर बौद्धिक सक्रियता तीव्र होती है, जबकि कर्क राशि में मन को शांति और परिजनों के सान्निध्य की अधिक आवश्यकता महसूस होती है।
शुभ योग और मुहूर्त
इस दिन परिघ योग सुबह 3:21 बजे तक रहेगा। वैदिक पंचांग में परिघ योग 27 नित्य योगों में 19वाँ है। 'परिघ' शब्द का अर्थ नगर का मुख्य द्वार अथवा उसे बंद करने वाली लोहे की छड़ (अर्गला) होता है। यह योग सुरक्षा के साथ-साथ रुकावट का भी संकेत देता है। इस योग के स्वामी शनि हैं और अधिष्ठाता देवता भगवान विश्वकर्मा हैं।
इस दिन का सबसे शुभ काल अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:16 से 2:02 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में यह दिन का आठवाँ मुहूर्त माना जाता है, जो लगभग 48 मिनट का होता है। मान्यता है कि इस काल के स्वामी ब्रह्मा जी हैं और इस समय किए गए कार्यों में सफलता मिलती है तथा समस्त दोष नष्ट होते हैं।
अमृतकाल शाम 6:27 से 7:58 बजे तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, यह अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि होती है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह काल श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ काल और सावधानियाँ
इस दिन राहुकाल शाम 5:57 से 7:23 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। यह समय सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के अंतराल को 8 बराबर भागों में विभाजित करके निर्धारित किया जाता है, जो प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है। इस दौरान पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है।
गुलिक काल शाम 4:31 से 5:57 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है जिसे अशुभ माना जाता है। इस काल में कोई नया कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए, हालाँकि बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में उचित माना जाता है।
यमगंड काल दोपहर 1:39 से 3:05 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से संबंधित माना जाता है। इस काल में नए व्यापार, यात्रा और आर्थिक लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
4 अक्टूबर 2026 का संक्षिप्त पंचांग सारांश
इस प्रकार, 4 अक्टूबर 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से मिश्रित फलदायी है — जहाँ अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल शुभ कार्यों के लिए उत्तम अवसर प्रदान करते हैं, वहीं राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में सावधानी बरतना आवश्यक है। इस दिन चंद्रमा का मिथुन से कर्क राशि में प्रवेश मानसिक और भावनात्मक संतुलन पर विशेष प्रभाव डालेगा।