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फर्जी हस्ताक्षर मामला: अभिषेक बनर्जी को सीआईडी का दूसरा समन, 14 जून को फिर होगी पूछताछ

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फर्जी हस्ताक्षर मामला: अभिषेक बनर्जी को सीआईडी का दूसरा समन, 14 जून को फिर होगी पूछताछ

सारांश

11 जून को पाँच घंटे की पूछताछ के बाद भी सीआईडी संतुष्ट नहीं — अभिषेक बनर्जी को 14 जून को फिर तलब किया गया। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 21 दिनों की अंतरिम सुरक्षा दी है, लेकिन सहयोग की शर्त भी लगाई है।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस (TMC) महासचिव अभिषेक बनर्जी को फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने 14 जून को दूसरी बार पूछताछ के लिए बुलाया।
11 जून को पाँच घंटे से अधिक की पूछताछ के बाद जांच एजेंसी उनके जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के जस्टिस कौशिक चंदा ने पाया कि वह पहले जारी तीन समन की अनदेखी कर चुके थे।
अदालत ने 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी सहित दमनात्मक पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दी, साथ ही जांच में पूर्ण सहयोग का निर्देश भी दिया।
अभिषेक बनर्जी 11 जून को दिल्ली से लौटकर शाम 5:55 बजे — समय सीमा से पाँच मिनट पहले — भवानी भवन पहुँचे थे।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को फर्जी हस्ताक्षर मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने 14 जून को दोबारा पूछताछ के लिए तलब किया है। 13 जून को जारी इस नए समन से स्पष्ट है कि जांच एजेंसी पहले दौर की पूछताछ से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई है।

पहली पूछताछ का घटनाक्रम

11 जून को सीआईडी अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी से पाँच घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी। इससे पहले उसी दिन कलकत्ता उच्च न्यायालय की अवकाशकालीन एकल पीठ के न्यायाधीश जस्टिस कौशिक चंदा ने उन्हें शाम छह बजे तक भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय पहुँचकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी रेखांकित किया कि अभिषेक बनर्जी इससे पहले जारी किए गए तीन समन की अनदेखी कर चुके हैं और ऐसी पुनरावृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।

आदेश के बाद दिल्ली से कोलकाता लौटे

जब अदालत ने यह आदेश दिया, उस समय अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में थे। आदेश मिलते ही वह कोलकाता लौटे और शाम 5:55 बजे — निर्धारित समय सीमा से महज पाँच मिनट पहले — दक्षिण कोलकाता स्थित भवानी भवन पहुँचे। उन्होंने आगंतुक रजिस्टर में हस्ताक्षर किए और मीडिया से कोई बातचीत किए बिना सीधे पूछताछ कक्ष में प्रवेश किया।

अदालत की अंतरिम राहत और शर्तें

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी सहित किसी भी प्रकार की दमनात्मक पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। साथ ही अदालत ने उन्हें जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया है। आवश्यकता पड़ने पर सीआईडी को तलाशी एवं छापेमारी की अनुमति भी दी गई है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और जांच एजेंसियों के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है। 14 जून को होने वाली दूसरी पूछताछ के बाद सीआईडी की अगली कार्रवाई पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हैं। गौरतलब है कि यह मामला फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा है, जिसकी जांच सीआईडी कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस मामले की जटिलता को उजागर करते हैं। तीन पूर्व समन की अनदेखी के बाद अदालत का हस्तक्षेप और फिर अंतिम पाँच मिनट में उपस्थिति — यह पैटर्न बताता है कि राजनीतिक दबाव और कानूनी बाध्यता के बीच एक सूक्ष्म खींचतान चल रही है। अंतरिम सुरक्षा के साथ सहयोग की शर्त लगाकर अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून के सामने पद और दल का कोई भेद नहीं। असली परीक्षा यह है कि 14 जून की पूछताछ के बाद सीआईडी क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या यह मामला अगले कानूनी पड़ाव तक पहुँचता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी को सीआईडी ने किस मामले में तलब किया है?
अभिषेक बनर्जी को फर्जी हस्ताक्षर मामले में पश्चिम बंगाल सीआईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया है। 14 जून को भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में दूसरी बार पूछताछ होनी है।
11 जून की पूछताछ में क्या हुआ था?
11 जून को सीआईडी अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी से पाँच घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की, लेकिन जांच एजेंसी उनके जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई। इसी कारण उन्हें 14 जून को दोबारा बुलाया गया है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को क्या राहत दी है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी सहित किसी भी दमनात्मक पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। साथ ही उन्हें जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है।
क्या अभिषेक बनर्जी पहले भी सीआईडी के समन की अनदेखी कर चुके हैं?
हाँ, कलकत्ता उच्च न्यायालय के जस्टिस कौशिक चंदा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अभिषेक बनर्जी इससे पहले जारी तीन समन की अनदेखी कर चुके हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी पुनरावृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
14 जून की पूछताछ के बाद आगे क्या हो सकता है?
दूसरी पूछताछ के बाद सीआईडी की अगली कार्रवाई पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हैं। अदालत ने आवश्यकता पड़ने पर सीआईडी को तलाशी एवं छापेमारी की भी अनुमति दे रखी है।
राष्ट्र प्रेस
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