अभिषेक बनर्जी की सीआईडी समन याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट में 10 जून को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर याचिका पर कलकत्ता उच्च न्यायालय में 10 जून 2026 को सुनवाई हुई। इस याचिका में अभिषेक बनर्जी ने विधायकों के हस्ताक्षर मेल न खाने के मामले में सीआईडी द्वारा जारी समन को कानूनी चुनौती दी है और गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से संरक्षण की माँग की है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित कुछ महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों से संबंधित एक प्रस्ताव पर तृणमूल के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित अंतर से जुड़ा है। इस मामले की जाँच के सिलसिले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए तीन अलग-अलग नोटिस भेजे थे।
हालाँकि, बनर्जी ने सभी समन को नज़रअंदाज़ कर दिया — जिसमें वह नोटिस भी शामिल था, जिसके तहत उन्हें मंगलवार, 9 जून को शाम 5 बजे तक भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में उपस्थित होना था।
हाईकोर्ट में याचिका और वेकेशन बेंच का रुख
पिछले सप्ताह अभिषेक बनर्जी ने जस्टिस चैताली चटर्जी दास की सिंगल-जज वेकेशन बेंच का रुख किया और मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई की अपील की। वेकेशन बेंच ने त्वरित सुनवाई की अपील को अस्वीकार कर दिया और पहली नियमित सुनवाई के लिए 10 जून की तारीख निर्धारित की।
छापेमारी और तलाशी अभियान
सुनवाई से एक दिन पहले, मंगलवार, 9 जून को सीआईडी ने दो स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। पहली छापेमारी दक्षिण कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी के आवास के निकट स्थित तृणमूल पार्टी कार्यालय पर, और दूसरी मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट पर उस कार्यालय में हुई, जहाँ से अभिषेक बनर्जी काम करते थे।
इन तलाशियों का उद्देश्य उस विवादित प्रस्ताव की मूल प्रति को बरामद करना बताया गया है। गौरतलब है कि सीआईडी ने अभी तक अपनी तलाशी के नतीजों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों 8 जून को विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक की एक अहम बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली गए थे। इसके अगले दिन, 9 जून को, ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के साथ भी आमने-सामने बैठक की।
उल्लेखनीय है कि अभिषेक बनर्जी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और तृणमूल कांग्रेस में दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।
आगे क्या होगा
अदालत में सुनवाई के नतीजे से यह तय होगा कि सीआईडी की जाँच किस दिशा में आगे बढ़ेगी। यदि हाईकोर्ट याचिका खारिज करता है, तो अभिषेक बनर्जी पर सीआईडी के समक्ष पेश होने का दबाव और बढ़ सकता है।