28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

फर्जी हस्ताक्षर मामला: कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को शाम 6 बजे तक सीआईडी में पेश होने का आदेश दिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
फर्जी हस्ताक्षर मामला: कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को शाम 6 बजे तक सीआईडी में पेश होने का आदेश दिया

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने फर्जी हस्ताक्षर मामले में तीन बार समन टाल चुके TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को शाम 6 बजे तक सीआईडी के सामने पेश होने का सख्त आदेश दिया। 21 दिन की सशर्त सुरक्षा मिली, लेकिन पेशी से बचने पर राहत खतरे में। वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी का पक्ष लेने से इनकार पार्टी के आंतरिक तनाव को उजागर करता है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 11 जून 2026 को TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को शाम 6 बजे तक सीआईडी मुख्यालय, भवानी भवन में पेश होने का आदेश दिया।
अभिषेक बनर्जी इससे पहले तीन बार सीआईडी के समन की अनदेखी कर चुके थे।
बेंच ने 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी से सशर्त अंतरिम सुरक्षा दी; अगली सुनवाई में समीक्षा होगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक के 'अहंकारी व्यवहार' का हवाला देकर पक्ष लेने से इनकार किया।
सुनवाई के समय अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में थे, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को ही कोलकाता लौट चुकी थीं।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की सिंगल-जज वेकेशन बेंच ने 11 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे उसी दिन शाम 6 बजे तक दक्षिण कोलकाता स्थित भवानी भवन में सीआईडी (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) के मुख्यालय में पेश हों और फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ में सहयोग करें। यह आदेश न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की बेंच ने उस याचिका की सुनवाई के बाद दिया, जिसमें अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी के समन को चुनौती दी थी।

मुख्य घटनाक्रम

अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में सीआईडी के पूछताछ समन को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी सहित पुलिस की कड़ी कार्रवाई से संरक्षण की माँग की थी। दोपहर में हुई सुनवाई में बेंच ने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी इस मामले में पहले ही तीन बार समन की अनदेखी कर चुके हैं और अब ऐसी किसी भी चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बेंच ने उन्हें अगले 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी सहित पुलिस की सख्त कार्रवाई से सशर्त अंतरिम सुरक्षा भी प्रदान की, जिसके बाद मामले की पुनः सुनवाई होगी। साथ ही, बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर सीआईडी अधिकारी जाँच के लिए छापेमारी और तलाशी अभियान भी चला सकते हैं।

कल्याण बनर्जी का पक्ष लेने से इनकार

इस सुनवाई में एक उल्लेखनीय घटनाक्रम यह रहा कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अनुभवी अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की ओर से पेश होने से इनकार कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यह निर्णय उन्होंने अभिषेक के उनके प्रति लगातार अहंकारी व्यवहार के कारण लिया। अंततः कोर्ट में अभिषेक बनर्जी का पक्ष अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने रखा।

अभिषेक बनर्जी की वर्तमान स्थिति

सुनवाई के समय अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को ही दिल्ली से कोलकाता लौट आई थीं, लेकिन उनके भतीजे राजधानी में ही रुके रहे। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर कोलकाता पहुँचकर सीआईडी मुख्यालय में पेश होते हैं या नहीं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा है, जिसकी जाँच पश्चिम बंगाल की सीआईडी कर रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों जगह अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। कल्याण बनर्जी का सार्वजनिक रूप से पक्ष लेने से इनकार पार्टी के आंतरिक तनाव को भी उजागर करता है।

आगे क्या होगा

यदि अभिषेक बनर्जी निर्धारित समय पर सीआईडी के सामने पेश नहीं होते, तो उनकी सशर्त सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। 21 दिनों बाद होने वाली अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि जाँच में उनके सहयोग के आधार पर अंतरिम राहत जारी रहेगी या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह TMC के भीतर बढ़ती दरार का संकेत है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य की सत्ताधारी पार्टी का महासचिव न्यायिक आदेश के बाद भी जाँच एजेंसी के सामने पेश होने से बचने के रास्ते खोजेगा — और यदि हाँ, तो यह पश्चिम बंगाल में कानून के शासन की साख पर क्या संदेश देगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर मामला क्या है?
यह पश्चिम बंगाल की सीआईडी द्वारा जाँचा जा रहा मामला है, जिसमें विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर का आरोप है। इस मामले में TMC महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को जाँच में शामिल होने के लिए बार-बार समन भेजे गए हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की सिंगल-जज वेकेशन बेंच ने 11 जून 2026 को अभिषेक बनर्जी को उसी शाम 6 बजे तक भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में पेश होकर पूछताछ में सहयोग करने का निर्देश दिया। साथ ही 21 दिनों की सशर्त अंतरिम सुरक्षा भी दी गई।
अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली है?
हाँ, अदालत ने उन्हें अगले 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी सहित पुलिस की सख्त कार्रवाई से सशर्त अंतरिम सुरक्षा दी है। यह सुरक्षा इस शर्त पर है कि वे सीआईडी के सामने पेश होकर जाँच में पूरा सहयोग करें; 21 दिन बाद मामले की पुनः सुनवाई होगी।
कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी का पक्ष लेने से क्यों मना किया?
TMC के वरिष्ठ नेता और अनुभवी अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय अभिषेक बनर्जी के उनके प्रति लगातार अहंकारी व्यवहार के कारण लिया। इसके बाद कोर्ट में अभिषेक बनर्जी का पक्ष अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने रखा।
अगली सुनवाई कब होगी और क्या तय होगा?
21 दिनों के बाद होने वाली अगली सुनवाई में अदालत यह समीक्षा करेगी कि अभिषेक बनर्जी ने जाँच में कितना सहयोग किया। उसी आधार पर तय होगा कि अंतरिम सुरक्षा जारी रहेगी या उन पर कड़ी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले