फर्जी हस्ताक्षर मामला: कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को शाम 6 बजे तक सीआईडी में पेश होने का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की सिंगल-जज वेकेशन बेंच ने 11 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे उसी दिन शाम 6 बजे तक दक्षिण कोलकाता स्थित भवानी भवन में सीआईडी (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) के मुख्यालय में पेश हों और फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ में सहयोग करें। यह आदेश न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की बेंच ने उस याचिका की सुनवाई के बाद दिया, जिसमें अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी के समन को चुनौती दी थी।
मुख्य घटनाक्रम
अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में सीआईडी के पूछताछ समन को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी सहित पुलिस की कड़ी कार्रवाई से संरक्षण की माँग की थी। दोपहर में हुई सुनवाई में बेंच ने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी इस मामले में पहले ही तीन बार समन की अनदेखी कर चुके हैं और अब ऐसी किसी भी चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बेंच ने उन्हें अगले 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी सहित पुलिस की सख्त कार्रवाई से सशर्त अंतरिम सुरक्षा भी प्रदान की, जिसके बाद मामले की पुनः सुनवाई होगी। साथ ही, बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर सीआईडी अधिकारी जाँच के लिए छापेमारी और तलाशी अभियान भी चला सकते हैं।
कल्याण बनर्जी का पक्ष लेने से इनकार
इस सुनवाई में एक उल्लेखनीय घटनाक्रम यह रहा कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अनुभवी अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की ओर से पेश होने से इनकार कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यह निर्णय उन्होंने अभिषेक के उनके प्रति लगातार अहंकारी व्यवहार के कारण लिया। अंततः कोर्ट में अभिषेक बनर्जी का पक्ष अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने रखा।
अभिषेक बनर्जी की वर्तमान स्थिति
सुनवाई के समय अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को ही दिल्ली से कोलकाता लौट आई थीं, लेकिन उनके भतीजे राजधानी में ही रुके रहे। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर कोलकाता पहुँचकर सीआईडी मुख्यालय में पेश होते हैं या नहीं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा है, जिसकी जाँच पश्चिम बंगाल की सीआईडी कर रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों जगह अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। कल्याण बनर्जी का सार्वजनिक रूप से पक्ष लेने से इनकार पार्टी के आंतरिक तनाव को भी उजागर करता है।
आगे क्या होगा
यदि अभिषेक बनर्जी निर्धारित समय पर सीआईडी के सामने पेश नहीं होते, तो उनकी सशर्त सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। 21 दिनों बाद होने वाली अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि जाँच में उनके सहयोग के आधार पर अंतरिम राहत जारी रहेगी या नहीं।