27 जुलाई 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट का अभिषेक बनर्जी को CID के सामने पेश होने का निर्देश, BJP बोली — TMC में स्वाभिमानी नेता नहीं टिक सकता

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कलकत्ता हाईकोर्ट का अभिषेक बनर्जी को CID के सामने पेश होने का निर्देश, BJP बोली — TMC में स्वाभिमानी नेता नहीं टिक सकता

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को जाली हस्ताक्षर मामले में CID के सामने पेश होने का आदेश दिया है। BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने इसे TMC में गहराती आंतरिक कलह और परिवारवाद की राजनीति का नतीजा बताया — कल्याण बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेता भी अब खुलकर असंतोष जता रहे हैं।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चयन से जुड़े कथित जाली हस्ताक्षर मामले में CID के सामने पेश होने का निर्देश दिया।
कागजात पर हस्ताक्षर से इनकार करने वाले दो विधायक बागी गुट में शामिल हो चुके हैं।
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि ममता बनर्जी परिवारवाद को बढ़ावा दे रही हैं और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता अभिषेक बनर्जी के तौर-तरीकों से नाराज हैं।
वरिष्ठ TMC नेता एवं वकील कल्याण बनर्जी ने कथित तौर पर अपने और अभिषेक बनर्जी के बीच चुनाव की बात कही।
BJP के अनुसार TMC में बागी गुट की ओर रुख करने वाले विधायकों और नेताओं की संख्या बढ़ रही है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े कथित जाली हस्ताक्षर मामले में CID के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आरपी सिंह ने 11 जून को नई दिल्ली में इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि जिम्मेदार लोगों को जवाब देना ही होगा।

जाली हस्ताक्षर विवाद: मामला क्या है

आरपी सिंह के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष के चयन के लिए जब आधिकारिक कागजात जमा किए गए, तो कथित तौर पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर जाली किए गए। बाद में दो विधायकों ने उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया और वे बागी गुट में शामिल हो गए। उन्होंने कहा, 'अगर आधिकारिक कागजों पर किसी के हस्ताक्षर जाली किए गए हैं तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।'

TMC की आंतरिक कलह पर BJP का हमला

BJP प्रवक्ता ने TMC की आंतरिक स्थिति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'जिसमें भी थोड़ी-बहुत आत्म-सम्मान की भावना होगी, वह TMC में नहीं रह पाएगा। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी जिस तरह से दूसरों को दरकिनार कर रहे हैं और नाराज कर रहे हैं, वह साफ दिखता है।' उन्होंने इसे परिवारवादी पार्टियों की स्वाभाविक प्रवृत्ति बताया।

आरपी सिंह ने यह भी कहा कि पार्टी की स्थापना से जुड़े पुराने कार्यकर्ता अभिषेक बनर्जी के तौर-तरीकों से नाराज हैं, लेकिन ममता बनर्जी अपने भतीजे का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

कल्याण बनर्जी प्रकरण: वरिष्ठ नेता भी असंतुष्ट

BJP प्रवक्ता ने TMC के वरिष्ठ नेता और जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी का उदाहरण देते हुए कहा, 'सोचने वाली बात है, क्या कल्याण बनर्जी सच में किसी से डर सकते हैं? अगर वह भी यह कह रहे हैं कि उन्हें अपने और अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनना होगा, तो समस्या कहीं और है।' उन्होंने इसे कथित तौर पर 'दबंगई वाली राजनीति के कल्चर' का परिणाम बताया, जिसे अब पार्टी के भीतर के नेता भी नकार रहे हैं।

बागी गुट और TMC में बढ़ती दरार

आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि TMC में असंतोष लगातार गहरा हो रहा है और कई विधायक एवं नेता बागी गुट की ओर रुख कर रहे हैं। उनके अनुसार, ममता बनर्जी द्वारा परिवारवाद को बढ़ावा दिए जाने के कारण पार्टी में फूट की यह प्रक्रिया तेज हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू होने में अधिक समय नहीं बचा।

आगे क्या होगा

कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब सभी की नजरें CID की जाँच और अभिषेक बनर्जी की पेशी पर टिकी हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अभिषेक बनर्जी किसी जाँच एजेंसी के समक्ष उपस्थिति के मामले में सुर्खियों में आए हों। TMC नेतृत्व की प्रतिक्रिया और बागी गुट की अगली चाल इस राजनीतिक संकट की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता जब पार्टी के अपने नेता ही इसी भाषा में बोल रहे हों। असली सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस अंदरूनी विद्रोह को थाम पाएंगी, या बागी गुट TMC की चुनावी संभावनाओं को कमजोर करेगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी को CID के सामने क्यों पेश होना है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन के लिए जमा किए गए कागजात में कथित जाली हस्ताक्षरों के मामले में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को CID के सामने पेश होने का निर्देश दिया है। दो विधायकों ने उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया और बागी गुट में शामिल हो गए।
TMC में आंतरिक कलह का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह के अनुसार, ममता बनर्जी द्वारा अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी में सर्वोच्च प्राथमिकता देना और पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार करना इस असंतोष की जड़ है। उनके अनुसार, कथित 'दबंगई की राजनीति' के कल्चर को पार्टी के भीतर के नेता भी अब नकार रहे हैं।
कल्याण बनर्जी का इस विवाद से क्या संबंध है?
TMC के वरिष्ठ नेता और जाने-माने वकील कल्याण बनर्जी ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें अपने और अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनना होगा। BJP ने इसे TMC के भीतर गहराते असंतोष का प्रमाण बताया।
इस मामले में BJP का क्या रुख है?
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि जाली हस्ताक्षरों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। साथ ही उन्होंने TMC को परिवारवादी पार्टी करार देते हुए कहा कि इसमें स्वाभिमानी नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार TMC में बढ़ता असंतोष और बागी गुट की सक्रियता पार्टी की एकजुटता के लिए चुनौती बन सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ नजदीक आ रही हैं और विपक्षी दल TMC की कमजोरियों को भुनाने की कोशिश में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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