कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी से पूछा — वॉयस सैंपल देने में आपत्ति क्यों, 10 जुलाई को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने जिला अदालत के वॉयस सैंपल देने के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से कहा कि चूँकि सांसद को गिरफ्तारी समेत कठोर पुलिस कार्रवाई से 31 जुलाई तक अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है, इसलिए उन्हें जाँचकर्ताओं का सहयोग करते हुए बिना देरी के नमूने देने चाहिए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान आयोजित एक चुनावी रैली से जुड़ा है। अभिषेक बनर्जी पर कथित तौर पर हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप लगाया गया है। इस कथित हेट स्पीच मामले की जाँच राज्य की सीआईडी (CID) कर रही है। जाँच एजेंसी ने संबंधित वीडियो में सुनाई देने वाली आवाज़ की फोरेंसिक पुष्टि के लिए सांसद से उनके वॉयस सैंपल माँगे हैं।
जिला अदालत का आदेश और हाईकोर्ट में याचिका
नॉर्थ 24 परगना जिले की बिधाननगर कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि अभिषेक बनर्जी न्यायिक मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में अपने वॉयस सैंपल दें। तय तारीख से पहले राहत पाने के लिए उनके वकील ने जस्टिस भट्टाचार्य की सिंगल बेंच के समक्ष तत्काल सुनवाई की माँग की। वकील का तर्क था कि चूँकि सांसद पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि प्रश्नगत वीडियो में उन्हीं की आवाज़ है, इसलिए अलग से वॉयस सैंपल देने की आवश्यकता नहीं है।
हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
जस्टिस भट्टाचार्य ने इस दलील को खारिज करते हुए सवाल किया कि जब सांसद को अदालत की ओर से पर्याप्त सुरक्षा मिली हुई है, तो जाँच में सहयोग करने में आपत्ति क्यों है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि अंतरिम सुरक्षा की प्रमुख शर्तों में जाँच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग शामिल है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में सहयोग को लेकर सवाल उठे हों — वॉयस सैंपल की माँग कुछ समय से लंबित बताई जा रही है।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी का वॉयस सैंपल देने से इनकार जाँच में असहयोग का स्पष्ट संकेत है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, रिकॉर्ड की गई बातचीत की प्रमाणिकता स्थापित करने और जाँच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के लिए फोरेंसिक नमूने अनिवार्य हैं। सरकार ने अदालत को याद दिलाया कि अंतरिम सुरक्षा देते समय यह शर्त स्पष्ट रूप से लगाई गई थी।
आगे क्या होगा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने जिला अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। इस बीच, अभिषेक बनर्जी को बिधाननगर कोर्ट में उपस्थित होना है, जहाँ वॉयस सैंपल देने का निर्देश लागू है। यह मामला आने वाले दिनों में TMC और राज्य सरकार के बीच कानूनी तनाव का नया केंद्र बन सकता है।