16 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अभिषेक बनर्जी को आवाज़ नमूने के लिए बिधाननगर कोर्ट का नया समन, 8 जुलाई को पेशी का निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अभिषेक बनर्जी को आवाज़ नमूने के लिए बिधाननगर कोर्ट का नया समन, 8 जुलाई को पेशी का निर्देश

सारांश

डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी के लिए कानूनी घेरा और तंग हुआ — बिधाननगर कोर्ट ने 8 जुलाई को आवाज़ नमूने के लिए नया समन जारी किया, जबकि कलकत्ता हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर मामला नई बेंच को सौंप दिया।

मुख्य बातें

बिधाननगर कोर्ट ने 1 जुलाई 2026 को अभिषेक बनर्जी को नया समन जारी किया; 8 जुलाई को सुबह 10 बजे पेशी का निर्देश।
सीआईडी अधिकारी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में आवाज़ के नमूने लेंगे।
अभिषेक पर चुनावी रैली में हिंसा भड़काने और गृह मंत्री अमित शाह को धमकाने के आरोप हैं।
जस्टिस तीर्थंकर घोष ने राहत याचिका पर सुनवाई से इनकार किया और मामले से खुद को अलग किया।
मामला अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती के पास; नई बेंच तय होनी बाकी।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच से मिली गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा अभी भी बरकरार।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने 1 जुलाई 2026 को नया समन जारी किया है। उन्हें 8 जुलाई को सुबह 10 बजे अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है, ताकि सीआईडी अधिकारी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में उनके आवाज़ के नमूने ले सकें। अभिषेक पर एक चुनावी रैली में हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकाने के आरोप हैं।

मंगलवार को पेशी से क्यों बचे अभिषेक

अभिषेक बनर्जी को इसी उद्देश्य से मंगलवार को जिला अदालत में पेश होना था, किंतु वे नहीं आए। उनकी गैरहाज़िरी की वजह कलकत्ता उच्च न्यायालय में चल रही वह याचिका थी, जिसमें उन्होंने जिला अदालत के पूर्व आवाज़-नमूना आदेश को चुनौती दी थी। इस याचिका पर सुनवाई को ही उन्होंने अदालत में न आने का आधार बनाया।

कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल-जज बेंच का रुख

जस्टिस तीर्थंकर घोष की सिंगल-जज बेंच ने मंगलवार को अभिषेक की आवाज़-नमूने से राहत माँगने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूँकि अभिषेक को उसी उच्च न्यायालय की एक अन्य सिंगल-जज बेंच से गिरफ्तारी सहित सख्त पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा पहले से प्राप्त है, इसलिए वॉइस सैंपल देने से बचने के लिए अलग से नई राहत की कोई आवश्यकता नहीं है।

जस्टिस घोष ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायालय किसी जाँच एजेंसी को यह निर्देश नहीं दे सकता कि वह जाँच का कौन-सा तरीका अपनाए। इसके बाद उन्होंने इस मामले की आगे की सुनवाई से स्वयं को अलग करने का निर्णय सुनाया।

मामला अब एक्टिंग चीफ जस्टिस के पास

जस्टिस घोष के अलग होने के बाद यह प्रकरण कलकत्ता उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती के पास भेजा गया है। वे अब यह तय करेंगे कि इस मामले की सुनवाई कौन-सी नई बेंच करेगी। यह प्रक्रियागत बदलाव मामले में नई न्यायिक पेचीदगी जोड़ता है।

अभिषेक को मिली अंतरिम सुरक्षा की स्थिति

गौरतलब है कि जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच ने अभिषेक को गिरफ्तारी सहित पुलिस की सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दे रखी है। हालाँकि, उसी बेंच ने अभिषेक को जाँच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने का भी निर्देश दिया था और सीआईडी से कहा था कि यदि वे आवश्यक सहयोग न करें, तो अदालत को सूचित किया जाए।

आगे क्या होगा

अब सभी की नज़रें 8 जुलाई पर टिकी हैं — क्या अभिषेक बनर्जी इस बार बिधाननगर कोर्ट में पेश होंगे, या कलकत्ता उच्च न्यायालय में किसी नई बेंच के समक्ष फिर से राहत की गुहार लगाएँगे। यह मामला TMC के शीर्ष नेतृत्व और न्यायपालिका के बीच चल रहे कानूनी संघर्ष की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और केंद्रीय एजेंसियों के बीच चल रहे व्यापक टकराव का प्रतीक बन चुका है। उल्लेखनीय यह है कि एक ही उच्च न्यायालय की अलग-अलग बेंचें अलग-अलग दिशाओं में आदेश दे रही हैं — एक गिरफ्तारी से सुरक्षा दे रही है, दूसरी राहत देने से इनकार कर रही है — जो न्यायिक प्रक्रिया की जटिलता को उजागर करता है। सवाल यह है कि क्या अंतरिम सुरक्षा की आड़ में जाँच-सहयोग की बाध्यता को बार-बार टाला जा सकता है, और यदि 8 जुलाई को भी पेशी नहीं हुई तो अदालत की अवमानना का रास्ता खुलेगा — जो TMC के लिए राजनीतिक रूप से कहीं अधिक महँगा साबित हो सकता है।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी को आवाज़ के नमूने क्यों देने हैं?
अभिषेक बनर्जी पर एक चुनावी रैली में हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकाने के आरोप हैं। सीआईडी इस मामले में फोरेंसिक जाँच के तहत उनके आवाज़ के नमूने लेना चाहती है, ताकि कथित भाषण की पुष्टि की जा सके।
बिधाननगर कोर्ट ने 8 जुलाई की तारीख क्यों दी?
अभिषेक बनर्जी मंगलवार को जिला अदालत में पेश नहीं हुए, क्योंकि कलकत्ता हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई चल रही थी। हाईकोर्ट द्वारा राहत देने से इनकार के बाद बिधाननगर कोर्ट ने 8 जुलाई को सुबह 10 बजे की नई तारीख निर्धारित की।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक की याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कहा कि अभिषेक को पहले से ही एक अन्य बेंच से गिरफ्तारी के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है, इसलिए आवाज़ नमूने से बचने के लिए अलग राहत की ज़रूरत नहीं है। साथ ही, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह जाँच एजेंसी को उसकी जाँच-पद्धति निर्धारित करने का निर्देश नहीं दे सकता।
अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली है या नहीं?
हाँ, कलकत्ता उच्च न्यायालय की जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच ने अभिषेक को गिरफ्तारी सहित पुलिस की सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दे रखी है। हालाँकि, उसी बेंच ने उन्हें जाँच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई कहाँ होगी?
जस्टिस तीर्थंकर घोष द्वारा मामले से खुद को अलग करने के बाद यह प्रकरण कलकत्ता उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती के पास भेजा गया है। वे तय करेंगे कि अब इस याचिका की सुनवाई कौन-सी नई बेंच करेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले