अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत नहीं, वॉयस सैंपल मामले में 7 जुलाई को होगी सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। 4 जुलाई 2025 को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने उनकी फास्ट-ट्रैक सुनवाई की मांग को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि इस याचिका पर सुनवाई 7 जुलाई से पहले संभव नहीं है। यह मामला पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी को वॉयस सैंपल देने से छूट से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी पर विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध कथित तौर पर भड़काऊ और धमकी भरे बयान देने का आरोप लगाया है। इसी आरोप की जाँच के सिलसिले में एजेंसी उनका वॉयस सैंपल लेना चाहती है, जिसे बनर्जी ने अदालत में चुनौती दी है।
न्यायालय में क्या हुआ
30 जून को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि अदालत यह तय नहीं कर सकती कि किसी जाँच एजेंसी को किस दिशा में और किस तरीके से जाँच करनी चाहिए। इसके बाद न्यायमूर्ति घोष ने इस मामले से स्वयं को अलग (रिक्यूज़) कर लिया।
तत्पश्चात अभिषेक बनर्जी की ओर से 4 जुलाई को न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष फास्ट-ट्रैक सुनवाई की माँग रखी गई, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
जिला अदालत का नोटिस
इस बीच, उत्तर 24 परगना की एक जिला अदालत ने 1 जुलाई को अभिषेक बनर्जी को दूसरा नोटिस जारी किया। अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को सुबह 10 बजे न्यायिक मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में सीआईडी को वॉयस सैंपल देने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
अंतरिम राहत और शर्तें
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ ने इससे पहले अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दे रखी है। हालाँकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उन्हें जाँच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना होगा। सीआईडी को निर्देश दिया गया है कि यदि बनर्जी सहयोग नहीं करते तो इसकी सूचना अदालत को दी जाए।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें 7 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं — यह तारीख जिला अदालत में निर्धारित पेशी से ठीक एक दिन पहले की है। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ यदि 7 जुलाई को वॉयस सैंपल से छूट देती है, तो 8 जुलाई की उपस्थिति का दायित्व समाप्त हो सकता है — अन्यथा बनर्जी को सैंपल देना होगा या अवमानना का सामना करना पड़ सकता है।