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अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत नहीं, वॉयस सैंपल मामले में 7 जुलाई को होगी सुनवाई

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अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत नहीं, वॉयस सैंपल मामले में 7 जुलाई को होगी सुनवाई

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक सुनवाई की माँग ठुकरा दी है। वॉयस सैंपल से छूट की याचिका पर 7 जुलाई को सुनवाई होगी — ठीक एक दिन बाद 8 जुलाई को जिला अदालत में उनकी पेशी भी निर्धारित है। दोनों तारीखों का टकराव इस मामले को और पेचीदा बनाता है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 4 जुलाई को अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक सुनवाई की माँग खारिज की।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ 7 जुलाई को वॉयस सैंपल छूट याचिका पर सुनवाई करेगी।
उत्तर 24 परगना की जिला अदालत ने 8 जुलाई को सुबह 10 बजे सीआईडी को वॉयस सैंपल देने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने 30 जून को सुनवाई से इनकार कर मामले से खुद को अलग किया था।
अदालत ने अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे रखी है, लेकिन जाँच में सहयोग अनिवार्य है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। 4 जुलाई 2025 को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने उनकी फास्ट-ट्रैक सुनवाई की मांग को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि इस याचिका पर सुनवाई 7 जुलाई से पहले संभव नहीं है। यह मामला पश्चिम बंगाल पुलिस की सीआईडी को वॉयस सैंपल देने से छूट से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी पर विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध कथित तौर पर भड़काऊ और धमकी भरे बयान देने का आरोप लगाया है। इसी आरोप की जाँच के सिलसिले में एजेंसी उनका वॉयस सैंपल लेना चाहती है, जिसे बनर्जी ने अदालत में चुनौती दी है।

न्यायालय में क्या हुआ

30 जून को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि अदालत यह तय नहीं कर सकती कि किसी जाँच एजेंसी को किस दिशा में और किस तरीके से जाँच करनी चाहिए। इसके बाद न्यायमूर्ति घोष ने इस मामले से स्वयं को अलग (रिक्यूज़) कर लिया।

तत्पश्चात अभिषेक बनर्जी की ओर से 4 जुलाई को न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष फास्ट-ट्रैक सुनवाई की माँग रखी गई, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

जिला अदालत का नोटिस

इस बीच, उत्तर 24 परगना की एक जिला अदालत ने 1 जुलाई को अभिषेक बनर्जी को दूसरा नोटिस जारी किया। अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को सुबह 10 बजे न्यायिक मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में सीआईडी को वॉयस सैंपल देने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

अंतरिम राहत और शर्तें

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ ने इससे पहले अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दे रखी है। हालाँकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उन्हें जाँच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना होगा। सीआईडी को निर्देश दिया गया है कि यदि बनर्जी सहयोग नहीं करते तो इसकी सूचना अदालत को दी जाए।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें 7 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं — यह तारीख जिला अदालत में निर्धारित पेशी से ठीक एक दिन पहले की है। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ यदि 7 जुलाई को वॉयस सैंपल से छूट देती है, तो 8 जुलाई की उपस्थिति का दायित्व समाप्त हो सकता है — अन्यथा बनर्जी को सैंपल देना होगा या अवमानना का सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कानूनी दृष्टि से सुस्थापित है — लेकिन जब आरोपी राजनीतिक विरोधी हो और जाँच एजेंसी राज्य सरकार के अधीन, तो प्रक्रियागत निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। 7 और 8 जुलाई की तारीखों का आमना-सामना बताता है कि अगले कुछ दिन इस मामले की दिशा तय करेंगे।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी का वॉयस सैंपल मामला क्या है?
सीआईडी का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध कथित तौर पर भड़काऊ और धमकी भरे बयान दिए। इसी मामले की जाँच के लिए सीआईडी उनका वॉयस सैंपल लेना चाहती है, जिसे बनर्जी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने फास्ट-ट्रैक सुनवाई क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने कहा कि किसी भी स्थिति में इस मामले की सुनवाई 7 जुलाई से पहले नहीं हो सकती। अदालत ने फास्ट-ट्रैक सुनवाई की माँग को अस्वीकार करते हुए नियमित तिथि पर ही सुनवाई तय की।
7 जुलाई की सुनवाई का क्या महत्व है?
7 जुलाई को न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ यह तय करेगी कि अभिषेक बनर्जी को वॉयस सैंपल देने से छूट मिलेगी या नहीं। यह सुनवाई इसलिए भी अहम है क्योंकि 8 जुलाई को जिला अदालत में उनकी पेशी निर्धारित है — यानी हाईकोर्ट का फैसला सीधे अगले दिन की कार्यवाही को प्रभावित करेगा।
क्या अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तारी का खतरा है?
फिलहाल नहीं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दे रखी है। हालाँकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें जाँच में पूरा सहयोग करना होगा और यदि वे सहयोग नहीं करते तो सीआईडी अदालत को सूचित करेगी।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने मामले से खुद को अलग क्यों किया?
न्यायमूर्ति घोष ने पहले 30 जून को सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि अदालत जाँच एजेंसी की कार्यप्रणाली तय नहीं कर सकती। इसके बाद उन्होंने इस मामले की आगे की सुनवाई से स्वयं को रिक्यूज़ कर लिया, जिसके बाद मामला न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष आया।
राष्ट्र प्रेस
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