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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की 8 एफआईआर में पूर्ण सुरक्षा याचिका खारिज की, अगली सुनवाई 30 जुलाई को

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की 8 एफआईआर में पूर्ण सुरक्षा याचिका खारिज की, अगली सुनवाई 30 जुलाई को

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को 8 एफआईआर में एकसाथ पूर्ण सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा — सभी पक्षों को सुने बिना व्यापक राहत संभव नहीं। अगली सुनवाई 30 जुलाई को।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की पूर्ण अंतरिम सुरक्षा याचिका खारिज की।
याचिका में पश्चिम बंगाल के विभिन्न थानों में दर्ज 8 एफआईआर में गिरफ्तारी से सुरक्षा माँगी गई थी।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा — सभी पक्षों को सुने बिना एकमुश्त सुरक्षा देना संभव नहीं।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुवेंदु अधिकारी को मिली पूर्व सुरक्षा का हवाला दिया, जिसे अदालत ने नकारा।
अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को निर्धारित; पुलिस कार्रवाई होने पर तत्काल अदालत को सूचित करने की छूट।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के विभिन्न थानों में दर्ज सभी आठ एफआईआर में गिरफ्तारी सहित पुलिस की जबरदस्ती की कार्रवाई से पूर्ण अंतरिम सुरक्षा की माँग की थी। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्षों को सुने बिना इस स्तर पर व्यापक राहत देना संभव नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

गुरुवार की सुनवाई में अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की। उन्होंने अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल पुलिस उनके मुवक्किल के खिलाफ राज्य के अलग-अलग कोनों में स्थित थानों में एक के बाद एक एफआईआर दर्ज करती जा रही है। सिब्बल ने तर्क दिया कि इन परिस्थितियों में सभी आठ एफआईआर में एकसाथ पूर्ण सुरक्षा मिलनी चाहिए।

सिब्बल ने पूर्व उदाहरण के रूप में सुवेंदु अधिकारी का हवाला दिया — जब वे पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता थे, तब कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें सभी मामलों में पूर्ण सुरक्षा दी थी और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना नई एफआईआर दर्ज करने पर भी रोक लगाई थी।

सरकार की दलील

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में तर्क दिया कि अंतरिम सुरक्षा मामले-दर-मामले के आधार पर दी जा सकती है, न कि एकमुश्त सभी एफआईआर में। उनका कहना था कि प्रत्येक मामले की अपनी परिस्थितियाँ होती हैं, इसलिए एकसाथ व्यापक राहत उचित नहीं होगी।

अदालत का रुख

जस्टिस भट्टाचार्य ने सिब्बल को सुवेंदु अधिकारी के उदाहरण का संदर्भ न देने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि अदालत सभी पक्षों को सुने बिना कोई अंतिम निर्णय नहीं ले सकती और इसीलिए इस समय आठों एफआईआर में एकसाथ पूर्ण सुरक्षा देना संभव नहीं है। हालाँकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई से पहले पुलिस इनमें से किसी भी मामले में जबरदस्ती की कोई कार्रवाई करती है, तो उसे तत्काल अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है।

आगे क्या होगा

इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, जिससे यह कानूनी लड़ाई राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह संकेत देता है कि अदालत एकमुश्त 'ब्लैंकेट प्रोटेक्शन' देने में सतर्क है — भले ही विपक्षी नेताओं को ऐसी राहत पहले मिल चुकी हो। सुवेंदु अधिकारी का उदाहरण जस्टिस भट्टाचार्य ने खारिज किया, जो यह भी दर्शाता है कि अदालत राजनीतिक समानता के तर्क को कानूनी आधार के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं। असली सवाल यह है कि क्या राज्य में बहुसंख्यक एफआईआर दर्ज करने की यह प्रवृत्ति — चाहे सत्तापक्ष हो या विपक्ष — न्यायिक निगरानी के बिना जारी रहेगी।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को सुने बिना आठों एफआईआर में एकसाथ पूर्ण अंतरिम सुरक्षा देना संभव नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत मामले-दर-मामले के आधार पर दी जा सकती है।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कितनी एफआईआर दर्ज हैं और किन थानों में?
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों के विभिन्न थानों में कुल आठ एफआईआर दर्ज हैं। उनके वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि पुलिस राज्य के अलग-अलग कोनों में लगातार नई एफआईआर दर्ज कर रही है।
सुवेंदु अधिकारी का उदाहरण इस मामले में क्यों उठाया गया?
कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि जब सुवेंदु अधिकारी विपक्ष के नेता थे, तब कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें सभी मामलों में पूर्ण सुरक्षा दी थी और नई एफआईआर पर रोक भी लगाई थी। हालाँकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने सिब्बल को इस उदाहरण का संदर्भ न देने की हिदायत दी।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि इस बीच पुलिस किसी भी एफआईआर में जबरदस्ती की कार्रवाई करती है, तो उसे तत्काल अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है।
केंद्र सरकार का इस मामले में क्या रुख रहा?
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने केंद्र की ओर से तर्क दिया कि अंतरिम सुरक्षा केस-टू-केस आधार पर दी जानी चाहिए, न कि सभी आठ एफआईआर में एकसाथ। उनका कहना था कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियाँ अलग होती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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