कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की 8 एफआईआर में पूर्ण सुरक्षा याचिका खारिज की, अगली सुनवाई 30 जुलाई को
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के विभिन्न थानों में दर्ज सभी आठ एफआईआर में गिरफ्तारी सहित पुलिस की जबरदस्ती की कार्रवाई से पूर्ण अंतरिम सुरक्षा की माँग की थी। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्षों को सुने बिना इस स्तर पर व्यापक राहत देना संभव नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
गुरुवार की सुनवाई में अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की। उन्होंने अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल पुलिस उनके मुवक्किल के खिलाफ राज्य के अलग-अलग कोनों में स्थित थानों में एक के बाद एक एफआईआर दर्ज करती जा रही है। सिब्बल ने तर्क दिया कि इन परिस्थितियों में सभी आठ एफआईआर में एकसाथ पूर्ण सुरक्षा मिलनी चाहिए।
सिब्बल ने पूर्व उदाहरण के रूप में सुवेंदु अधिकारी का हवाला दिया — जब वे पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता थे, तब कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें सभी मामलों में पूर्ण सुरक्षा दी थी और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना नई एफआईआर दर्ज करने पर भी रोक लगाई थी।
सरकार की दलील
केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में तर्क दिया कि अंतरिम सुरक्षा मामले-दर-मामले के आधार पर दी जा सकती है, न कि एकमुश्त सभी एफआईआर में। उनका कहना था कि प्रत्येक मामले की अपनी परिस्थितियाँ होती हैं, इसलिए एकसाथ व्यापक राहत उचित नहीं होगी।
अदालत का रुख
जस्टिस भट्टाचार्य ने सिब्बल को सुवेंदु अधिकारी के उदाहरण का संदर्भ न देने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि अदालत सभी पक्षों को सुने बिना कोई अंतिम निर्णय नहीं ले सकती और इसीलिए इस समय आठों एफआईआर में एकसाथ पूर्ण सुरक्षा देना संभव नहीं है। हालाँकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई से पहले पुलिस इनमें से किसी भी मामले में जबरदस्ती की कोई कार्रवाई करती है, तो उसे तत्काल अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है।
आगे क्या होगा
इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, जिससे यह कानूनी लड़ाई राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बनी हुई है।