'सेवाश्रय' कैंप विवाद: अभिषेक बनर्जी समेत 11 के खिलाफ FIR, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 12 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी समेत 11 लोगों के खिलाफ दर्ज पुलिस शिकायत के आधार पर स्वतंत्र जांच शुरू की है। मामला दक्षिण 24 परगना जिले में अभिषेक बनर्जी की पहल पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य शिविर 'सेवाश्रय' से जुड़ा है, जहाँ एक महिला का कथित तौर पर गलत इलाज किए जाने के बाद उसका दाहिना पैर काटना पड़ा। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से 'सेवाश्रय' के खिलाफ कुल 17 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
शिकायतकर्ता मालती बिस्वास ने रबींद्र नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार, वे घुटने के दर्द की शिकायत लेकर 'सेवाश्रय' के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में गई थीं, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दवाएँ दीं। पुलिस शिकायत के अनुसार, दवाएँ लेने के बाद उनका दर्द कम होने की बजाय और बढ़ गया।
दोबारा शिविर जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें एमआर बांगुर अस्पताल रेफर कर दिया। वहाँ के चिकित्सकों ने कथित तौर पर बताया कि गलत दवाओं के कारण उनके घुटने की स्थिति गंभीर हो गई है। इसके बाद उन्हें मध्य कोलकाता के पार्क सर्कस स्थित नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेजा गया, जहाँ हालत और बिगड़ने पर अंततः उनका दाहिना पैर काटना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "प्रभावित महिला और उनके परिवार के सदस्य सोमवार सुबह 11 बजे तक राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय, स्वास्थ्य भवन में मामले से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ पहुँचेंगे। वरिष्ठ अधिकारी उनकी बात सुनेंगे, दस्तावेजों की जाँच करेंगे और उसी के अनुसार जरूरी कार्रवाई करेंगे।" विभाग ने इस जाँच को पुलिस जाँच से स्वतंत्र और समानांतर बताया है।
FIR और आरोपी
पुलिस ने अभिषेक बनर्जी, उनके फरार एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुमित रॉय और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से 'सेवाश्रय' के खिलाफ दर्ज 17 शिकायतों के आधार पर पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर भी दर्ज की हैं।
शिकायतों की प्रकृति
दर्ज शिकायतें केवल चिकित्सीय लापरवाही तक सीमित नहीं हैं। इनमें राज्य स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के बिना शिविर संचालन, कथित तौर पर अयोग्य चिकित्सकों की तैनाती और एक्सपायर हो चुकी दवाइयाँ वितरित करने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह सामुदायिक स्वास्थ्य शिविरों की नियामक निगरानी की व्यापक विफलता को उजागर करता है।
आगे क्या होगा
राज्य स्वास्थ्य विभाग की जाँच और पुलिस की एफआईआर दोनों समानांतर चल रही हैं। सुमित रॉय के फरार होने के कारण जाँच में जटिलता बढ़ी है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को स्वास्थ्य भवन, कोलकाता में होनी है, जहाँ पीड़ित परिवार अपने दस्तावेज प्रस्तुत करेगा।