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'सेवाश्रय' कैंप विवाद: अभिषेक बनर्जी समेत 11 के खिलाफ FIR, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू

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'सेवाश्रय' कैंप विवाद: अभिषेक बनर्जी समेत 11 के खिलाफ FIR, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू

सारांश

'सेवाश्रय' — अभिषेक बनर्जी की सामुदायिक स्वास्थ्य पहल — अब गंभीर विवाद के घेरे में है। एक महिला का पैर काटने के आरोप के बाद FIR दर्ज, और राज्य स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच शुरू। सत्ता परिवर्तन के बाद से 17 शिकायतें — यह मामला TMC के लिए बड़ी राजनीतिक और कानूनी चुनौती बन सकता है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 12 जुलाई 2026 को 'सेवाश्रय' मामले में स्वतंत्र जाँच शुरू की।
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी और उनके फरार सहयोगी सुमित रॉय समेत 11 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज।
शिकायतकर्ता मालती बिस्वास का आरोप — शिविर में गलत दवाओं से हालत बिगड़ी, अंततः दाहिना पैर काटना पड़ा।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद 'सेवाश्रय' के खिलाफ अब तक कुल 17 शिकायतें दर्ज; पुलिस ने 2 अलग FIR दर्ज कीं।
आरोपों में चिकित्सीय लापरवाही के अलावा बिना अनुमति शिविर संचालन, अयोग्य डॉक्टर और एक्सपायर दवाएँ वितरित करना भी शामिल।
पीड़ित परिवार सोमवार सुबह 11 बजे स्वास्थ्य भवन, कोलकाता में दस्तावेज प्रस्तुत करेगा।

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने 12 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी समेत 11 लोगों के खिलाफ दर्ज पुलिस शिकायत के आधार पर स्वतंत्र जांच शुरू की है। मामला दक्षिण 24 परगना जिले में अभिषेक बनर्जी की पहल पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य शिविर 'सेवाश्रय' से जुड़ा है, जहाँ एक महिला का कथित तौर पर गलत इलाज किए जाने के बाद उसका दाहिना पैर काटना पड़ा। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से 'सेवाश्रय' के खिलाफ कुल 17 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

शिकायतकर्ता मालती बिस्वास ने रबींद्र नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार, वे घुटने के दर्द की शिकायत लेकर 'सेवाश्रय' के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में गई थीं, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दवाएँ दीं। पुलिस शिकायत के अनुसार, दवाएँ लेने के बाद उनका दर्द कम होने की बजाय और बढ़ गया।

दोबारा शिविर जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें एमआर बांगुर अस्पताल रेफर कर दिया। वहाँ के चिकित्सकों ने कथित तौर पर बताया कि गलत दवाओं के कारण उनके घुटने की स्थिति गंभीर हो गई है। इसके बाद उन्हें मध्य कोलकाता के पार्क सर्कस स्थित नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेजा गया, जहाँ हालत और बिगड़ने पर अंततः उनका दाहिना पैर काटना पड़ा।

स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया

राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "प्रभावित महिला और उनके परिवार के सदस्य सोमवार सुबह 11 बजे तक राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय, स्वास्थ्य भवन में मामले से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ पहुँचेंगे। वरिष्ठ अधिकारी उनकी बात सुनेंगे, दस्तावेजों की जाँच करेंगे और उसी के अनुसार जरूरी कार्रवाई करेंगे।" विभाग ने इस जाँच को पुलिस जाँच से स्वतंत्र और समानांतर बताया है।

FIR और आरोपी

पुलिस ने अभिषेक बनर्जी, उनके फरार एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुमित रॉय और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से 'सेवाश्रय' के खिलाफ दर्ज 17 शिकायतों के आधार पर पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर भी दर्ज की हैं।

शिकायतों की प्रकृति

दर्ज शिकायतें केवल चिकित्सीय लापरवाही तक सीमित नहीं हैं। इनमें राज्य स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के बिना शिविर संचालन, कथित तौर पर अयोग्य चिकित्सकों की तैनाती और एक्सपायर हो चुकी दवाइयाँ वितरित करने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह सामुदायिक स्वास्थ्य शिविरों की नियामक निगरानी की व्यापक विफलता को उजागर करता है।

आगे क्या होगा

राज्य स्वास्थ्य विभाग की जाँच और पुलिस की एफआईआर दोनों समानांतर चल रही हैं। सुमित रॉय के फरार होने के कारण जाँच में जटिलता बढ़ी है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को स्वास्थ्य भवन, कोलकाता में होनी है, जहाँ पीड़ित परिवार अपने दस्तावेज प्रस्तुत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नियामक ढाँचे के बाहर चलाए जाने पर यही पहलें गंभीर जोखिम बन जाती हैं। 17 शिकायतें और एक महिला का पैर काटने का आरोप यह सवाल उठाता है कि क्या राज्य स्वास्थ्य विभाग ने इन शिविरों की समय पर निगरानी की। गौरतलब है कि सत्ता परिवर्तन के बाद ही ये शिकायतें सामने आई हैं — यह राजनीतिक प्रेरणा की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता, लेकिन पीड़ित महिला की चिकित्सीय स्थिति तथ्यात्मक है और उसकी स्वतंत्र जाँच अनिवार्य है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सेवाश्रय' स्वास्थ्य शिविर क्या है और यह विवाद में क्यों है?
'सेवाश्रय' दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की पहल पर संचालित निःशुल्क सामुदायिक स्वास्थ्य शिविर है। यह विवाद में इसलिए है क्योंकि एक महिला ने आरोप लगाया कि शिविर में गलत इलाज के कारण उसका दाहिना पैर काटना पड़ा, और राज्य में अब तक 17 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
मालती बिस्वास की शिकायत में क्या आरोप हैं?
मालती बिस्वास ने रबींद्र नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि वे घुटने के दर्द के लिए 'सेवाश्रय' शिविर गई थीं, जहाँ दी गई दवाओं से हालत बिगड़ती गई। एमआर बांगुर अस्पताल के डॉक्टरों ने कथित तौर पर बताया कि गलत दवाओं से घुटने की स्थिति गंभीर हुई, और अंततः नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में उनका दाहिना पैर काटना पड़ा।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
पुलिस ने अभिषेक बनर्जी, उनके फरार एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुमित रॉय और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। साथ ही पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने एक स्वतंत्र और समानांतर जाँच भी शुरू की है।
'सेवाश्रय' के खिलाफ कुल कितनी शिकायतें हैं और उनमें क्या आरोप हैं?
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से 'सेवाश्रय' के खिलाफ कुल 17 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें चिकित्सीय लापरवाही के अलावा बिना सरकारी अनुमति के शिविर चलाना, कथित अयोग्य डॉक्टरों की तैनाती और एक्सपायर दवाएँ वितरित करने के आरोप भी शामिल हैं।
आगे क्या होगा — जाँच कहाँ तक पहुँची है?
पीड़ित मालती बिस्वास और उनका परिवार सोमवार सुबह 11 बजे कोलकाता स्थित स्वास्थ्य भवन में दस्तावेज लेकर उपस्थित होंगे, जहाँ वरिष्ठ अधिकारी उनका बयान दर्ज करेंगे। पुलिस की FIR जाँच और स्वास्थ्य विभाग की जाँच दोनों समानांतर जारी हैं; सुमित रॉय के फरार होने से जाँच में जटिलता बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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