12 जुलाई 2026
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शशांक सिंह बोले — केस वापसी के लिए मांगे गए ₹7.5 लाख, रसोइए पर 9 पुरानी FIR

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शशांक सिंह बोले — केस वापसी के लिए मांगे गए ₹7.5 लाख, रसोइए पर 9 पुरानी FIR

सारांश

पंजाब किंग्स के क्रिकेटर शशांक सिंह का दावा है कि उनके भोपाल घर के पूर्व रसोइए की FIR महज साजिश थी — उसके बाद अज्ञात कॉलर्स ने केस वापसी के नाम पर ₹7.5 लाख तक माँगे। रसोइए पर पहले से 9 FIR और धारा 307 का केस दर्ज होने का खुलासा मामले को और गंभीर बनाता है।

मुख्य बातें

पंजाब किंग्स क्रिकेटर शशांक सिंह के भोपाल घर के रसोइए ने 30 जून 2026 को मारपीट और बंधक बनाने की FIR दर्ज कराई।
FIR के बाद अज्ञात कॉलर्स ने केस वापसी के लिए ₹5 लाख और ₹7.5 लाख की मांग की।
शशांक के अनुसार रसोइए के खिलाफ पहले से 9 FIR दर्ज हैं, जिनमें धारा 307 (हत्या की कोशिश) का मामला भी शामिल है।
शशांक ने किसी को कोई रकम नहीं दी; मामला भोपाल पुलिस के पास विचाराधीन है।
क्रिकेटर ने सोशल मीडिया पर घरेलू कर्मचारियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कराने की अपील की।

पंजाब किंग्स के क्रिकेटर शशांक सिंह ने खुलासा किया है कि उनके भोपाल स्थित घर के पूर्व रसोइए द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद अज्ञात नंबरों से उनसे ₹5 लाख और ₹7.5 लाख की मांग की गई — यह रकम केस वापस लेने की शर्त के रूप में माँगी गई। शशांक के अनुसार, यह पूरा मामला उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाने और जबरन वसूली की सुनियोजित साजिश है।

मामले की पृष्ठभूमि

रसोइए ने 30 जून 2026 को भोपाल के स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें शशांक सिंह, उनके पिता शैलेश सिंह और उनके ड्राइवर पर मारपीट, गाली-गलौज और बंधक बनाने के आरोप लगाए गए थे। इस शिकायत के बाद क्रिकेटर पिछले कुछ दिनों से विवाद के केंद्र में हैं।

शशांक का पक्ष: 'यह जबरन वसूली की कोशिश थी'

शशांक सिंह ने कहा, 'वह आदतन अपराधी था। उसके खिलाफ पहले ही 9 एफआईआर दर्ज हो चुकी थीं। 2018 से उसके खिलाफ केस दर्ज हो रहे थे। उसके खिलाफ धारा 307 के तहत हत्या की कोशिश का केस भी दर्ज था। यह सब मेरे लिए चौंकाने वाला था।'

उन्होंने आगे बताया, 'हम इसलिए भी हैरान थे क्योंकि जब वह हमारे घर से निकला था, तो वह ठीक था। बाहर क्या हुआ? किस वजह से हाथापाई हुई? यह हमें नहीं पता।'

अज्ञात नंबरों से रकम की मांग

शशांक ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें अज्ञात नंबरों से कॉल आने लगे। उन्होंने कहा, 'एक कॉलर ने मुझसे ₹5 लाख मांगे और कहा कि यह रकम देने पर केस वापस ले लिया जाएगा। दूसरे कॉलर ने केस हटवाने के लिए ₹7.5 लाख की मांग की।' शशांक के अनुसार, धीरे-धीरे उन्हें पता चला कि रसोइया एक पेशेवर अपराधी है और वह उनकी प्रतिष्ठा खराब करने के इरादे से ही उनके घर में काम करने आया था।

सोशल मीडिया पर अपील

शशांक सिंह ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर रसोइए को पेशेवर अपराधी बताया और आम लोगों से अपील की कि घरेलू कामकाज के लिए किसी भी व्यक्ति को नियुक्त करने से पहले उसका बैकग्राउंड अवश्य जाँचें। यह विवाद यह भी उजागर करता है कि सार्वजनिक हस्तियाँ किस तरह झूठे आरोपों और जबरन वसूली की कोशिशों का शिकार हो सकती हैं।

आगे क्या

फिलहाल यह मामला भोपाल पुलिस के पास विचाराधीन है। शशांक सिंह ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने किसी भी कॉलर को कोई रकम नहीं दी। जाँच के नतीजे और पुलिस की कार्रवाई आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशांक सिंह के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई?
शशांक सिंह के भोपाल घर के पूर्व रसोइए ने 30 जून 2026 को स्थानीय थाने में FIR दर्ज कराई, जिसमें शशांक, उनके पिता शैलेश सिंह और ड्राइवर पर मारपीट, गाली-गलौज और बंधक बनाने के आरोप लगाए गए। शशांक ने इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए इसे साजिश बताया है।
शशांक सिंह से कितने पैसे माँगे गए और किसने माँगे?
शशांक के अनुसार FIR दर्ज होने के बाद अज्ञात नंबरों से दो अलग-अलग कॉल आईं — एक में ₹5 लाख और दूसरे में ₹7.5 लाख की मांग की गई। कॉलर्स ने कहा कि यह रकम देने पर केस वापस ले लिया जाएगा। शशांक ने किसी को कोई रकम नहीं दी।
रसोइए का आपराधिक इतिहास क्या है?
शशांक सिंह के अनुसार रसोइए के खिलाफ 2018 से अब तक 9 FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें धारा 307 (हत्या की कोशिश) का मामला भी शामिल है। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड से होनी बाकी है।
शशांक सिंह ने सोशल मीडिया पर क्या अपील की?
शशांक ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर रसोइए को पेशेवर अपराधी बताया और लोगों से अपील की कि घरेलू कर्मचारी रखने से पहले उनका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन अवश्य कराएँ।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
मामला फिलहाल भोपाल पुलिस के पास विचाराधीन है। जाँच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि जबरन वसूली के कॉल्स रसोइए से जुड़े थे या किसी तीसरे पक्ष से। पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही दोनों पक्षों के दावों का निष्पक्ष मूल्यांकन संभव होगा।
राष्ट्र प्रेस
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