12 जुलाई 2026
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शशांक सिंह का खुलासा: मारपीट की झूठी एफआईआर से वसूली की साजिश, रसोइए के 9 पुराने मामले

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शशांक सिंह का खुलासा: मारपीट की झूठी एफआईआर से वसूली की साजिश, रसोइए के 9 पुराने मामले

सारांश

पंजाब किंग्स के बल्लेबाज शशांक सिंह ने दावा किया है कि भोपाल में दर्ज मारपीट की एफआईआर वसूली की सुनियोजित साजिश है। रसोइए के खिलाफ पहले से 9 एफआईआर और 8 चार्जशीट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा — एफआईआर असली शिकायत नहीं, दबाव बनाने का हथियार थी।

मुख्य बातें

पंजाब किंग्स के बल्लेबाज शशांक सिंह और उनके पिता, रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेश सिंह , पर भोपाल की रातीबाद पुलिस ने एक रसोइए के साथ मारपीट का मामला दर्ज किया था।
शशांक ने दावा किया कि यह एफआईआर जबरन वसूली की साजिश का हिस्सा है — उनकी सार्वजनिक छवि को निशाना बनाकर पैसे ऐंठने की कोशिश।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उक्त रसोइए के खिलाफ पहले से 9 एफआईआर दर्ज थीं और 8 मामलों में चार्जशीट हो चुकी थी।
रसोइया तीन अलग-अलग नामों का उपयोग कर अपनी पहचान छिपाता था।
शशांक ने 30 अप्रैल 2026 की एक अन्य कथित घटना से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों को भी गलत बताया — उस तारीख को वे आईपीएल में खेल रहे थे।
क्रिकेटर ने लोगों से अपील की — घरेलू स्टाफ रखने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से करें।

पंजाब किंग्स के बल्लेबाज शशांक सिंह ने 12 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए अपने परिवार से जुड़े विवाद पर पहली बार खुलकर बात की। उनका कहना है कि उनके और उनके पिता — रिटायर्ड स्पेशल डीजी ऑफ पुलिस शैलेश सिंह — के खिलाफ भोपाल की रातीबाद पुलिस में दर्ज एफआईआर एक सुनियोजित जबरन वसूली की साजिश का हिस्सा है, न कि किसी वास्तविक शिकायत का नतीजा।

मामले का पृष्ठभूमि

पिछले महीने भोपाल की रातीबाद पुलिस ने शशांक सिंह और उनके पिता शैलेश सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि पिता-पुत्र ने घर पर काम करने वाले एक रसोइए के साथ मारपीट की, उसे गालियाँ दीं और जबरदस्ती उसका मोबाइल छीन लिया। इस एफआईआर के बाद सोशल मीडिया पर शशांक की तीखी आलोचना हुई और उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचा।

शशांक ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'इस घटना ने मुझे हमेशा के लिए बदल दिया और मुझे ऐसे सबक सिखाए जो मैं जिंदगी भर साथ रखूंगा। मैं यह हमदर्दी के लिए नहीं लिख रहा हूं।'

रसोइए का आपराधिक इतिहास और शशांक के आरोप

शशांक के अनुसार, पुलिस रिकॉर्ड से यह सामने आया कि उक्त रसोइए के खिलाफ पहले से ही 9 एफआईआर दर्ज थीं और 8 मामलों में चार्जशीट भी हो चुकी थी। इनमें हत्या की कोशिश, घर में चोरी, मारपीट, जबरदस्ती वसूली, आपराधिक धमकी, अश्लील हरकतें और एससी/एसटी कानून के तहत अपराध शामिल थे। शशांक ने यह भी बताया कि वह व्यक्ति तीन अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाता था।

क्रिकेटर ने लिखा कि रसोइए को तीसरे दिन इसलिए वापस भेजा गया क्योंकि उन्होंने उसे घर के अंदर फोटो लेते और उन्हें दोस्तों को भेजते हुए पाया। उनके अनुसार, जब उन्होंने बाद में उस व्यक्ति का वीडियो देखा तो वह घर से बिल्कुल ठीक निकला था।

वसूली की साजिश का दावा

शशांक ने सीधे आरोप लगाया कि यह एफआईआर एक जबरन वसूली का टूल थी। उन्होंने लिखा, 'मेरा मानना है कि प्लान था कि झूठी एफआईआर दर्ज करके मुझ पर दबाव बनाया जाए, यह उम्मीद करते हुए कि मैं अपनी सार्वजनिक पहचान बचाने के लिए पैसे दूंगा।' उन्होंने यह भी कहा कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ एफआईआर बिना उनका पक्ष सुने या पूछताछ किए दर्ज कर ली गई, जबकि असली पीड़ित अक्सर गंभीर अपराधों में भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए संघर्ष करते हैं।

उन्होंने 30 अप्रैल 2026 की एक कथित घटना से जोड़ने वाली मीडिया रिपोर्टों को भी सिरे से खारिज किया। उनका तर्क था कि एक बेसिक फैक्ट-चेक से यह स्पष्ट हो जाता, क्योंकि वह उसी तारीख को आईपीएल में सक्रिय रूप से खेल रहे थे।

आम जनता के लिए शशांक की अपील

शशांक ने अपनी पोस्ट में लोगों को सावधान करते हुए लिखा कि घरेलू स्टाफ रखते समय हमेशा पुलिस वेरिफिकेशन करें और किसी रजिस्टर्ड एजेंसी के ज़रिए ही मदद लें। उन्होंने कहा, 'सिर्फ इसलिए कि कोई बेबस दिख रहा है, रो रहा है, या हमदर्दी चाहता है, इसका मतलब यह नहीं कि वह सच बोल रहा है।'

यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी आरोप की पड़ताल किए बिना सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिष्ठा कितनी जल्दी दाँव पर लग सकती है। अब देखना यह होगा कि भोपाल पुलिस और न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल उठता है कि पुलिस ने आरोपी का पक्ष सुने बिना इतनी जल्दी एफआईआर क्यों दर्ज की। यह मामला यह भी दिखाता है कि सार्वजनिक हस्तियाँ — विशेषकर खिलाड़ी — किस तरह संभावित जबरन वसूली के सॉफ्ट टारगेट बन सकते हैं। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह बिना फैक्ट-चेक के आरोपों को सुर्खी न बनाए।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशांक सिंह पर क्या आरोप लगाए गए थे?
भोपाल की रातीबाद पुलिस ने शशांक सिंह और उनके पिता शैलेश सिंह पर घर में काम करने वाले एक रसोइए के साथ मारपीट, गाली-गलौज और जबरदस्ती मोबाइल छीनने का मामला दर्ज किया था। यह एफआईआर पिछले महीने दर्ज हुई थी।
शशांक सिंह ने एफआईआर को झूठी क्यों बताया?
शशांक का कहना है कि रसोइए के खिलाफ पहले से 9 एफआईआर और 8 चार्जशीट थीं, और वह तीन अलग नामों से अपनी पहचान छिपाता था। उनके अनुसार, यह एफआईआर उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाकर पैसे ऐंठने की सुनियोजित साजिश थी।
शशांक सिंह के पिता कौन हैं और वे इस मामले में कैसे शामिल हैं?
शशांक सिंह के पिता शैलेश सिंह रिटायर्ड स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस हैं। उन पर भी रसोइए से मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी।
30 अप्रैल 2026 की घटना से शशांक सिंह का क्या संबंध बताया गया?
कुछ मीडिया रिपोर्टों ने शशांक को 30 अप्रैल 2026 की एक कथित घटना से जोड़ा था, जिसे उन्होंने पूरी तरह गलत बताया। उनका कहना है कि उस तारीख को वे आईपीएल में सक्रिय रूप से खेल रहे थे, जो एक बेसिक फैक्ट-चेक से साबित हो जाता।
शशांक सिंह ने घरेलू स्टाफ रखने के बारे में क्या सलाह दी?
शशांक ने अपील की कि लोग हमेशा पुलिस वेरिफिकेशन के बाद किसी रजिस्टर्ड एजेंसी के ज़रिए ही घरेलू मदद लें। उन्होंने कहा कि हमदर्दी को कभी कॉमन सेंस की जगह न लेने दें।
राष्ट्र प्रेस
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