12 जुलाई 2026
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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बच्चियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर यूरोपीय संसद का प्रस्ताव, मारिया शहबाज मामले की कड़ी आलोचना

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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बच्चियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर यूरोपीय संसद का प्रस्ताव, मारिया शहबाज मामले की कड़ी आलोचना

सारांश

यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बच्चियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर कड़ा प्रस्ताव पारित किया है — 13 वर्षीय मारिया शहबाज के मामले को केंद्र में रखते हुए। संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार हर साल 1,000 से अधिक नाबालिग इस अत्याचार का शिकार होते हैं, जिनमें 25% ईसाई लड़कियाँ हैं।

मुख्य बातें

यूरोपीय संसद ने 12 जुलाई 2026 को प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान से अल्पसंख्यक बच्चियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने की माँग की।
संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आँकड़ों के अनुसार जबरन धर्म परिवर्तन मामलों में लगभग 25% पीड़ित ईसाई लड़कियाँ हैं।
मानवाधिकार संगठनों के अनुमान के अनुसार पाकिस्तान में हर साल 1,000 से अधिक नाबालिग इस तरह के अत्याचारों का सामना करते हैं।
13 वर्षीय मारिया शहबाज का कथित तौर पर जुलाई 2025 में अपहरण किया गया; पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत ने नाबालिग होने के साक्ष्यों के बावजूद आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया।
यूरोपीय सांसदों ने बाल विवाह के खिलाफ राष्ट्रीय ढाँचा बनाने और पीड़ित परिवारों के लिए समर्पित शिकायत तंत्र स्थापित करने का आग्रह किया।
आलोचकों का कहना है कि स्थानीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत और न्यायिक उदासीनता इन मामलों को और गंभीर बनाती है।

यूरोपीय संसद ने 12 जुलाई 2026 को एक प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान के अधिकारियों से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के अपहरण और जबरन इस्लाम धर्म अपनाने की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने की माँग की। संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आँकड़ों का हवाला देते हुए प्रस्ताव में रेखांकित किया गया कि जबरन धार्मिक परिवर्तन और विवाह से जुड़े मामलों में लगभग 25 प्रतिशत पीड़ित ईसाई लड़कियाँ हैं।

मारिया शहबाज मामला: यूरोपीय संसद की चिंता का केंद्र

प्रस्ताव में 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शहबाज के मामले का विशेष उल्लेख किया गया। प्रस्ताव के अनुसार, मारिया का कथित तौर पर जुलाई 2025 में 30 वर्षीय शेहरयार अहमद ने अपहरण किया था, जिस पर उसे जबरन इस्लाम धर्म अपनाकर विवाह के लिए बाध्य करने का आरोप है। सांसदों ने बताया कि आधिकारिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर और लड़की के नाबालिग होने के साक्ष्यों के बावजूद पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत ने आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया और बच्ची को उसके पास वापस भेज दिया।

यूरोपीय संसद ने अदालत के इस निर्णय की कड़ी आलोचना की और माँग की कि मारिया शहबाज को तत्काल कानूनी सहायता एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

मुख्य घटनाक्रम और आँकड़े

प्रस्ताव में मानवाधिकार संगठनों के अनुमान का हवाला देते हुए कहा गया कि पाकिस्तान में हर साल अल्पसंख्यक समुदायों के 1,000 से अधिक नाबालिग इस तरह के अत्याचारों का सामना करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं।

गौरतलब है कि यूरोपीय संसद ने उन आरोपों पर भी गंभीर चिंता जताई कि कई बार स्थानीय अधिकारी ऐसे मामलों में मिलीभगत करते हैं, जबकि अदालतें बाल संरक्षण कानूनों की अनदेखी करती हैं — जिससे जबरन धर्म परिवर्तन को अप्रत्यक्ष वैधता मिलती है।

यूरोपीय सांसदों की माँगें

यूरोपीय संसद के सदस्यों ने इस्लामाबाद से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया:

पहला, बाल विवाह समाप्त करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढाँचा तैयार किया जाए। दूसरा, अल्पसंख्यक समुदायों की उन लड़कियों के परिवारों की शिकायतों के निवारण के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय तंत्र स्थापित किया जाए। तीसरा, अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के सभी मामलों की पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जाए। चौथा, पीड़ित बच्चियों को उनके परिजनों तक पहुँचाने की व्यवस्था की जाए और कानूनी सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ किया जाए।

आम जनता और अल्पसंख्यक समुदाय पर असर

पाकिस्तान में ईसाई, हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय लंबे समय से ऐसी घटनाओं की शिकायत करते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि संस्थागत उदासीनता और न्यायिक प्रक्रिया में खामियाँ इन मामलों को और जटिल बनाती हैं। यूरोपीय संसद का यह प्रस्ताव पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या होगा आगे

यूरोपीय संसद के इस प्रस्ताव के बाद अब नज़रें पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पाकिस्तान ने ठोस कदम नहीं उठाए तो यह मुद्दा आगामी द्विपक्षीय व्यापार और कूटनीतिक वार्ताओं में भी उठ सकता है। मारिया शहबाज के मामले में न्यायिक पुनर्विचार की माँग भी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की ओर से जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या यह कागज़ से आगे जाएगा — पाकिस्तान पर इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय दबाव बने हैं, पर ज़मीनी बदलाव सीमित रहा है। मारिया शहबाज का मामला संस्थागत विफलता की परतें उजागर करता है: जब अदालत खुद दस्तावेज़ी साक्ष्यों की अनदेखी कर आरोपी के पक्ष में फैसला दे, तो कानून की रक्षा का दावा खोखला लगता है। आलोचकों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान में स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होती और न्यायपालिका बाल संरक्षण कानूनों को प्राथमिकता नहीं देती, तब तक 1,000 से अधिक नाबालिगों की वार्षिक पीड़ा का यह आँकड़ा घटने वाला नहीं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान के बारे में क्या प्रस्ताव पारित किया?
यूरोपीय संसद ने 12 जुलाई 2026 को एक प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के अपहरण और जबरन इस्लाम धर्म अपनाने की घटनाओं पर रोक लगाने की माँग की। प्रस्ताव में बाल विवाह के खिलाफ राष्ट्रीय ढाँचा बनाने और पीड़ित परिवारों के लिए शिकायत तंत्र स्थापित करने का आग्रह किया गया।
मारिया शहबाज कौन हैं और उनका मामला क्यों चर्चा में है?
मारिया शहबाज एक 13 वर्षीय ईसाई लड़की हैं, जिनका कथित तौर पर जुलाई 2025 में 30 वर्षीय शेहरयार अहमद ने अपहरण किया और जबरन धर्म परिवर्तन कराकर विवाह के लिए बाध्य किया। पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत ने नाबालिग होने के साक्ष्यों के बावजूद आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसकी यूरोपीय संसद ने कड़ी आलोचना की।
पाकिस्तान में हर साल कितने नाबालिग जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार होते हैं?
मानवाधिकार संगठनों के अनुमान के अनुसार पाकिस्तान में हर साल अल्पसंख्यक समुदायों के 1,000 से अधिक नाबालिग जबरन धर्म परिवर्तन का सामना करते हैं। संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आँकड़ों के अनुसार इन मामलों में लगभग 25 प्रतिशत पीड़ित ईसाई लड़कियाँ होती हैं।
यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान से कौन-से ठोस कदम उठाने की माँग की?
यूरोपीय सांसदों ने पाकिस्तान से बाल विवाह के खिलाफ व्यापक राष्ट्रीय ढाँचा बनाने, पीड़ित परिवारों के लिए समर्पित शिकायत तंत्र स्थापित करने, सभी मामलों की पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करने और पीड़ित बच्चियों को उनके परिजनों तक पहुँचाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया। साथ ही मारिया शहबाज को कानूनी सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सहयोग देने की भी माँग की गई।
क्या पाकिस्तान में स्थानीय अधिकारी इन मामलों में मिलीभगत करते हैं?
यूरोपीय संसद ने उन आरोपों पर चिंता जताई कि कई बार स्थानीय अधिकारी ऐसे मामलों में मिलीभगत करते हैं और अदालतें बाल संरक्षण कानूनों की अनदेखी करती हैं। हालाँकि पाकिस्तान सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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