पाकिस्तान में अदालत ने नाबालिग ईसाई लड़की की शादी को मान्यता दी, बिशपों की चिंताएं बढ़ी

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पाकिस्तान में अदालत ने नाबालिग ईसाई लड़की की शादी को मान्यता दी, बिशपों की चिंताएं बढ़ी

सारांश

पाकिस्तान में एक विवादास्पद अदालत के फैसले ने नाबालिग ईसाई लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न की हैं। यह निर्णय न केवल कानून के प्रति सम्मान को चुनौती देता है, बल्कि ईसाई समुदाय में व्यापक असंतोष भी पैदा कर रहा है। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • पाकिस्तान में नाबालिग विवाह के कानून का उल्लंघन।
  • ईसाई समुदाय में असंतोष और चिंता।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई है।
  • बिशपों की चिंताओं का महत्व।
  • आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना।

इस्लामाबाद, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में बिशप (ईसाई धर्म के धार्मिक नेता) चिंतित हैं क्योंकि फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट ने एक ईसाई नाबालिग लड़की की शादी को मान्यता दी है। पाकिस्तान कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस (पीसीबीसी) ने बताया कि अदालतें 18 साल से कम उम्र में विवाह के संबंध में लागू कानून को हमेशा समान रूप से लागू नहीं कर रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पीसीबीसी ने इसे 'कानून के अलग-अलग तरीके से पालन' करना अत्यंत चिंताजनक बताया।

पीसीबीसी के अध्यक्ष बिशप सैमसन शुकार्डिन ने कहा कि जब ईसाई लड़कियों का अपहरण होता है, तो उनके मामलों में कानून के अनुसार उचित निर्णय नहीं लिया जाता। लाहौर के कैथोलिक आर्कबिशप खालिद रहमत ओएफएम कैप ने भी एक अलग बयान में अदालत के निर्णय पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।

ईसाई समुदाय में असंतोष है क्योंकि पाकिस्तान के फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने 25 मार्च को यह निर्णय सुनाया कि ईसाई लड़की मारिया बीबी और मुस्लिम व्यक्ति शहरयार अहमद की शादी वैध है। अदालत ने बीबी के पिता शाहबाज मसीह की याचिका खारिज कर दी। पिता का कहना था कि उनकी बेटी, जो लगभग 13 साल की थी, जुलाई 2025 में अवैध रूप से हिरासत में ली गई थी। अदालत ने कहा कि कानून नाबालिग शादी को दंडनीय मानता है, लेकिन ऐसे विवाह को अमान्य नहीं माना जाता।

पांच अप्रैल को, ईसाई समुदाय ने ईस्टर मनाते हुए प्रार्थना की कि ईसाई लड़कियों को अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह से बचाया जाए। ये प्रार्थनाएं हालिया अदालत के निर्णय के बाद की गई थीं।

यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 25 मार्च के अदालत के निर्णय के बाद पाकिस्तान में ईसाई समुदाय ने नाबालिग लड़की की शादी को मान्यता देने के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन किया। समुदाय के नेताओं ने कहा कि इस निर्णय से और अधिक ईसाई और हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी होने का खतरा बढ़ सकता है।

चार अप्रैल को, पाकिस्तान के हैदराबाद में 200 से अधिक ईसाइयों ने एक विरोध रैली में भाग लिया। यह रैली कैथोलिक चर्च के मानवाधिकार संगठन नेशनल कमीशन फॉर जस्टिस एंड पीस (एनसीजेपी) द्वारा आयोजित की गई और बिशप साइमन शुकार्डिन ने इसका नेतृत्व किया।

ईसाई समूहों का कहना है कि इस तरह की व्याख्या नाबालिगों की शादी को मान्यता देती है, जो पाकिस्तान के कानून, नैतिक मानदंडों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के खिलाफ है। वे इसे न्यायपालिका के रूढ़िवादी दृष्टिकोण का प्रतीक मानते हैं। इस निर्णय की न केवल देश में आलोचना की गई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की गई है। ब्रिटेन के संसद सदस्यों ने भी इस निर्णय पर चिंता प्रकट की है।

माइनॉरिटी कंसर्न पाकिस्तान के संपादक और 'जस्टिस एंड पीस कमीशन ऑफ पाकिस्तान' के पूर्व कार्यकारी सचिव आफताब अलेक्जेंडर मुगल ने यूरेशिया रिव्यू में लिखा कि, “पाकिस्तान की न्यायिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए, ब्रिटेन में पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के सभी पार्टी पार्लियामेंटरी ग्रुप (एपीपीजी) ने कहा कि यह मामला उन पैटर्न में आता है जो अच्छी तरह से दस्तावेजीकृत हैं, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर ईसाई और हिंदू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह शामिल हैं।”

Point of View

यह स्पष्ट है कि नाबालिग विवाह को दंडनीय माना गया है, फिर भी अदालत ने इसे मान्यता दी, जो समाज में गंभीर मुद्दों को जन्म दे सकता है।
NationPress
09/04/2026

Frequently Asked Questions

क्या पाकिस्तान में नाबालिगों की शादी पर कानून है?
हाँ, पाकिस्तान में नाबालिग विवाह को दंडनीय माना जाता है, लेकिन हालिया अदालत के निर्णय ने इसे वैध ठहराया है।
ईसाई समुदाय का इस निर्णय पर क्या प्रतिक्रिया है?
ईसाई समुदाय इस निर्णय के खिलाफ है और इसे नाबालिग लड़कियों के अपहरण और जबरन विवाह के मामले में खतरा मानता है।
बिशपों की चिंताओं का क्या कारण है?
बिशपों का मानना है कि अदालतें नाबालिग विवाह के कानून को सही तरीके से लागू नहीं कर रही हैं, जिससे ईसाई लड़कियों की सुरक्षा खतरे में है।
क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर प्रतिक्रिया दी है?
हाँ, ब्रिटेन के संसद सदस्यों सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की गई है।
क्या इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
समुदाय के नेता और मानवाधिकार संगठन इस निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और इसे चुनौती देने की योजना बना रहे हैं।
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