3 अगस्त 2026
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पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन: 14 वर्षीय के अपहरण ने खोली क्रूर व्यवस्था की पोल

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पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन: 14 वर्षीय के अपहरण ने खोली क्रूर व्यवस्था की पोल

सारांश

पाकिस्तान में 14 वर्षीय ईसाई लड़की के गायब होने ने एक बार फिर उस क्रूर तंत्र को उजागर किया है जिसमें अपहरण, जाली दस्तावेज और पुलिस की मिलीभगत मिलकर अल्पसंख्यक लड़कियों की पहचान और आज़ादी छीन लेती है। अदालत के विवादास्पद फैसले ने बिशपों को भी मैदान में उतरने पर मजबूर कर दिया।

मुख्य बातें

14 वर्षीय ईसाई लड़की के अपहरण ने पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह के सुनियोजित तंत्र को उजागर किया।
निशा बीबी के पिता अब्बास मसीह को पुलिस ने जाली धर्म परिवर्तन प्रमाण-पत्र और विवाह दस्तावेज दिखाए, जिन्हें परिवार ने मनगढ़ंत बताया।
16 वर्षीय जिया लियाकत को अगवा किया गया; उसके पिता को दुबई से धमकी मिली और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
25 मार्च 2026 को पाकिस्तान की फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट ने लगभग 13 वर्षीय मारिया बीबी के विवाह को वैध ठहराया।
पाकिस्तान कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस (PCBC) और लाहौर के आर्कबिशप ने अदालत के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई।
रिपोर्टों के अनुसार पीड़ित अधिकतर 12 से 17 वर्ष की नाबालिग होती हैं जिन्हें जाली दस्तावेजों से कानूनी जाल में फँसाया जाता है।

पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह की एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है — एक 14 वर्षीय ईसाई लड़की के गायब होने ने उस सुनियोजित तंत्र को एक बार फिर उजागर किया है जो अल्पसंख्यक समुदाय की नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाता है। रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला अकेला नहीं है — यह एक ऐसे व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जिसमें अपहरण, जाली दस्तावेज, पुलिस की मिलीभगत और न्यायिक उदासीनता मिलकर काम करती है।

निशा बीबी का मामला: दस्तावेजी धोखे की दास्तान

घरों में काम करने वाली निशा बीबी को एक विवाहित मुस्लिम व्यक्ति अपने साथ ले गया। रिपोर्टों के अनुसार, उसने निशा की चिकित्सकीय स्थिति का फायदा उठाया, कथित तौर पर जबरदस्ती उनका धर्म परिवर्तन कराया और उनसे विवाह कर लिया। जब निशा के पिता अब्बास मसीह — जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं — पुलिस के पास पहुँचे, तो उन्हें ऐसे दस्तावेज दिखाए गए जिनमें दावा किया गया था कि निशा ने महीनों पहले स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया और विवाह किया।

अब्बास मसीह ने कहा, हम सबूत के तौर पर दिखाए गए कथित धर्म परिवर्तन प्रमाण-पत्र और शादी के दस्तावेज देखकर हैरान रह गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सभी दस्तावेज मनगढ़ंत थे और अपराधी को सजा से बचाने के लिए तैयार किए गए थे। इससे भी आगे, मजिस्ट्रेट के सामने एक बयान पेश किया गया जिसमें दावा किया गया कि निशा 18 वर्ष की हैं और अपने परिवार से सुरक्षा माँग रही हैं।

जिया लियाकत का मामला: सीमा पार तक फैला जाल

अप्रैल 2026 में, 16 वर्षीय ईसाई लड़की जिया लियाकत को उस समय अगवा कर लिया गया जब उसके माता-पिता खेतों में काम कर रहे थे। कुछ सप्ताह बाद जिया के पिता को दुबई से एक व्यक्ति का व्हाट्सएप संदेश आया जिसमें मामले की पैरवी न करने की धमकी दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और कथित तौर पर जिया की शादी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में एक मुस्लिम व्यक्ति से ऑनलाइन करा दी गई। यह मामला सीमा-पार हेरफेर, स्थानीय मिलीभगत और पुलिस की निष्क्रियता के उस पैटर्न को रेखांकित करता है जो इन मामलों में बार-बार सामने आता है।

अदालत का विवादास्पद फैसला और बिशपों की चिंता

25 मार्च 2026 को पाकिस्तान की फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट की दो-सदस्यीय पीठ ने ईसाई लड़की मारिया बीबी और मुस्लिम युवक शहरयार अहमद के विवाह को वैध ठहरा दिया। अदालत ने मारिया के पिता शाहबाज मसीह की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी लगभग 13 वर्षीय बेटी को जुलाई 2025 में गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाया गया था। अदालत ने माना कि कानून कम उम्र में विवाह के लिए दंड का प्रावधान करता है, लेकिन ऐसे विवाहों को स्वतः अमान्य नहीं माना जाता।

इस फैसले के बाद पाकिस्तान कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस (PCBC) ने गहरी चिंता व्यक्त की। PCBC के अध्यक्ष बिशप सैमसन शुकार्डिन ने कहा कि अगवा की गई ईसाई लड़कियों से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार सुनवाई नहीं हो रही। लाहौर के कैथोलिक आर्कबिशप खालिद रहमत OFM Cap ने एक अलग 'विरोध और तत्काल खंडन बयान' जारी कर अदालत के फैसले पर नाराजगी जताई।

व्यवस्थागत पैटर्न: धर्म को हथियार बनाने की रणनीति

रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित ज्यादातर 12 से 17 वर्ष की नाबालिग होती हैं जिन्हें अगवा किया जाता है, धमकाया जाता है और जबरन विवाह के लिए मजबूर किया जाता है। बाद में जाली धर्म परिवर्तन प्रमाण-पत्रों के जरिए इन विवाहों को कानूनी मान्यता दे दी जाती है। रिपोर्टों में कहा गया है कि यौन हिंसा को छिपाने के लिए धर्म परिवर्तन का उपयोग किया जाता है, जबकि पुलिस और अदालतें लापरवाही या मिलीभगत के जरिए अपराधियों को संरक्षण देती हैं। गौरतलब है कि इस तंत्र में अपहरण, जबरदस्ती, जाली दस्तावेज और न्यायिक मान्यता — ये चारों तत्व एक साथ काम करते हैं।

आगे क्या होगा

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से बाल विवाह निरोधक कानूनों को समान रूप से लागू करने और अल्पसंख्यक समुदायों को न्यायिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। PCBC ने स्पष्ट किया है कि जब तक अदालतें 18 वर्ष से कम आयु के विवाहों को अमान्य घोषित नहीं करतीं, तब तक यह व्यवस्था बेरोकटोक जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना जवाबदेही तंत्र के, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों की सुरक्षा महज कागजी वादा बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संस्थागत खामी है जिसे व्यवस्था ने जानबूझकर बनाए रखा है। जब जाली दस्तावेज पुलिस थाने में स्वीकार किए जाते हैं और अदालतें उन्हें वैधता देती हैं, तो यह महज लापरवाही नहीं — यह संरचनागत मिलीभगत है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों की सुरक्षा के लिए कोई स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र नहीं है, और बिना उसके, बिशपों के बयान और रिपोर्टें केवल दस्तावेजीकरण बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन का पैटर्न क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, 12 से 17 वर्ष की नाबालिग लड़कियों को अगवा किया जाता है, जाली धर्म परिवर्तन प्रमाण-पत्र तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें अपहरणकर्ता से ही विवाह करने पर मजबूर किया जाता है। पुलिस और अदालतें अक्सर इन दस्तावेजों को मान्यता दे देती हैं।
निशा बीबी का मामला क्या है?
निशा बीबी एक ईसाई महिला हैं जिन्हें एक विवाहित मुस्लिम व्यक्ति अपने साथ ले गया। रिपोर्टों के अनुसार उनकी चिकित्सकीय स्थिति का फायदा उठाकर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। उनके पिता अब्बास मसीह ने पुलिस द्वारा दिखाए गए दस्तावेजों को मनगढ़ंत बताया।
पाकिस्तान की फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट ने मारिया बीबी के मामले में क्या फैसला दिया?
25 मार्च 2026 को अदालत ने लगभग 13 वर्षीय मारिया बीबी और मुस्लिम युवक शहरयार अहमद के विवाह को वैध ठहरा दिया। अदालत ने कहा कि बाल विवाह दंडनीय है लेकिन स्वतः अमान्य नहीं — एक ऐसा फैसला जिसे PCBC ने गहरी चिंता के साथ खारिज किया।
पाकिस्तान कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस (PCBC) ने क्या कहा?
PCBC के अध्यक्ष बिशप सैमसन शुकार्डिन ने कहा कि ईसाई लड़कियों के मामलों में कानून के अनुसार सुनवाई नहीं हो रही। लाहौर के आर्कबिशप खालिद रहमत OFM Cap ने एक अलग बयान जारी कर अदालत के फैसले पर नाराजगी जताई।
जिया लियाकत का मामला किस तरह से अलग था?
16 वर्षीय जिया लियाकत को अप्रैल 2026 में अगवा किया गया और उसके पिता को दुबई से व्हाट्सएप पर धमकी दी गई। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और कथित तौर पर जिया की शादी UAE में ऑनलाइन करा दी गई — जो इस तंत्र के सीमा-पार विस्तार को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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