लाहौर में 14 साल की ईसाई लड़की का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन कर 41 वर्षीय से निकाह कराया

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लाहौर में 14 साल की ईसाई लड़की का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन कर 41 वर्षीय से निकाह कराया

सारांश

लाहौर में 14 वर्षीय ईसाई लड़की निशा बीबी को कथित तौर पर अगवा कर जबरन इस्लाम कबूल कराया गया और 41 वर्षीय अरशद हबीब से निकाह कराया गया। जाली दस्तावेज़ों और उम्र में हेरफेर के आरोपों के बीच यह मामला पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन की गंभीर प्रवृत्ति को उजागर करता है।

मुख्य बातें

14 वर्षीय निशा बीबी को लाहौर की गुलबहार कॉलोनी से कथित तौर पर 12 मई को अगवा किया गया।
आरोपी अरशद हबीब पहले से तीन विवाह कर चुका था; उसे रहीम यार खान ज़िले में पाया गया।
पुलिस को दिखाए गए दस्तावेज़ों में निशा की उम्र 18 वर्ष दर्शाई गई, जिसे परिवार की वकील जुनारा पैट्रिक ने जाली बताया।
जरानवाला में 15 वर्षीय सिदरा बीबी को 27 मार्च को बंदूक की नोंक पर अगवा किया गया; एफआईआर में उम्र गलत दर्ज की गई।
दोनों मामलों में जाली धर्म परिवर्तन प्रमाण पत्र और विवाह दस्तावेज़ सामने आए।

लाहौर की गुलबहार कॉलोनी में एक 41 वर्षीय विवाहित मुस्लिम व्यक्ति ने कथित तौर पर 14 वर्षीय ईसाई लड़की निशा बीबी का अपहरण किया, उसे जबरन इस्लाम कबूल कराया और उससे निकाह कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार, पीड़िता मिर्गी और मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्याओं से पीड़ित थी, जिसका आरोपी ने फायदा उठाया।

मुख्य घटनाक्रम

निशा के पिता अब्बास मसीह, जो एक दिहाड़ी मजदूर और स्थानीय ब्रेथ्रेन चर्च के सदस्य हैं, ने बताया कि उनकी बेटी एक मुस्लिम परिवार के घर में घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थी। 12 मई को वह काम से घर नहीं लौटी। मसीह ने कहा, 'जब निशा काम से घर नहीं लौटी, तो हम उसके मालिक के घर गए, जहाँ हमें बताया गया कि वह पहले ही जा चुकी है।'

परिवार के पुलिस से संपर्क करने के बाद, मालिक के घर के सीसीटीवी फुटेज में निशा को एक अधेड़ उम्र के अजनबी के साथ जाते देखा गया। इस आधार पर पुलिस ने अपहरण की एफआईआर दर्ज की। स्क्रीनशॉट साझा करने पर पड़ोस की एक महिला ने उस व्यक्ति की पहचान अपने पति अरशद हबीब के रूप में की — और बताया कि हबीब उसी दिन उनके दो नाबालिग बच्चों को लेकर बिना बताए गायब हो गया था।

जाली दस्तावेज़ों का खुलासा

पुलिस ने परिवार को वे दस्तावेज़ दिखाए जिनमें दावा किया गया था कि निशा ने 15 फरवरी को स्वेच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया और तीन दिन बाद हबीब से निकाह किया। अब्बास मसीह ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'हम यह देखकर हैरान रह गए कि मेरी बेटी ने अपनी मर्जी से धर्म बदला और आरोपी से निकाह किया। ये दस्तावेज़ हबीब को आपराधिक मामले से बचाने के लिए तैयार किए गए लगते हैं।'

2 मार्च को लाहौर में एक मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए एक बयान में दावा किया गया कि निशा की उम्र 18 वर्ष है और उसने स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन व विवाह किया है। परिवार की वकील जुनारा पैट्रिक ने इस बयान की प्रामाणिकता को चुनौती देते हुए कहा कि हबीब ने जाँचकर्ताओं को गुमराह करने के लिए नकली कानूनी दस्तावेज़ तैयार किए हैं।

आरोपी की पृष्ठभूमि

अब्बास मसीह के अनुसार, हबीब पहले से तीन विवाह कर चुका है और उन सभी से उसके बच्चे हैं। वकील पैट्रिक ने बताया कि कानूनी टीम ने हबीब को पंजाब प्रांत के रहीम यार खान ज़िले में पाया, जहाँ वह कथित तौर पर निशा और अपनी तीसरी पत्नी के दो बच्चों के साथ रह रहा था। हबीब ने अपनी तीसरी पत्नी की ओर से बच्चों की वापसी के लिए हेबियस कॉर्पस याचिका भी दाखिल की है।

दूसरा मामला: जरानवाला की सिदरा बीबी

यह घटना अकेली नहीं है। अप्रैल की शुरुआत में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब प्रांत के जरानवाला शहर में 15 वर्षीय ईसाई लड़की सिदरा बीबी को 27 मार्च को अली मुर्तजा नामक एक मुस्लिम व्यक्ति और उसके दो साथियों ने उसके घर की दीवार फाँदकर घुसकर बंदूक की नोंक पर अगवा कर लिया।

सिदरा के पिता अफजल जावेद मसीह ने बताया कि पुलिस ने एफआईआर में उनकी बेटी की उम्र 15 वर्ष के बजाय 17 वर्ष दर्ज की, जो उनके आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा, 'मैं अनपढ़ हूँ और मुझे यह अंतर बाद में एक कार्यकर्ता के ध्यान दिलाने पर पता चला।' पुलिस ने संदिग्ध के रिश्तेदारों को गिरफ्तार तो किया, लेकिन बाद में छोड़ दिया। दस्तावेज़ सामने आए जिनमें दावा था कि सिदरा ने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाया और रहीम यार खान ज़िले में मुर्तजा अली से विवाह किया।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय लंबे समय से जबरन धर्म परिवर्तन और नाबालिग लड़कियों के अपहरण की शिकायतें उठाता रहा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रशासनिक लापरवाही और जाली दस्तावेज़ों का सहारा लेकर आरोपियों को बचाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। दोनों मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है और पीड़ित परिवार न्याय की माँग कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें जाली दस्तावेज़, उम्र में हेरफेर और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप बार-बार सामने आते हैं। चिंताजनक यह है कि दोनों मामलों में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही — एक में एफआईआर में उम्र गलत दर्ज की गई, दूसरे में गिरफ्तार रिश्तेदारों को रिहा कर दिया गया। पाकिस्तान का ब्लासफेमी और धर्म परिवर्तन कानून अल्पसंख्यकों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता, और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद जमीनी स्थिति नहीं बदली है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाहौर में निशा बीबी के अपहरण का मामला क्या है?
14 वर्षीय ईसाई लड़की निशा बीबी को 12 मई को लाहौर से कथित तौर पर अगवा किया गया। आरोपी अरशद हबीब पर उसे जबरन इस्लाम धर्म कबूल कराने और निकाह करने का आरोप है। पीड़िता मिर्गी और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थी।
आरोपी अरशद हबीब के खिलाफ क्या सबूत हैं?
सीसीटीवी फुटेज में निशा को हबीब के साथ जाते दिखाया गया है। पुलिस ने अपहरण की एफआईआर दर्ज की है और हबीब को रहीम यार खान ज़िले में पाया गया। परिवार की वकील जुनारा पैट्रिक के अनुसार, हबीब ने जाँचकर्ताओं को गुमराह करने के लिए नकली कानूनी दस्तावेज़ तैयार किए।
पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में जाली दस्तावेज़ों की क्या भूमिका होती है?
इन मामलों में कथित तौर पर जाली धर्म परिवर्तन प्रमाण पत्र और विवाह दस्तावेज़ तैयार किए जाते हैं जिनमें पीड़िता की उम्र बढ़ाकर दिखाई जाती है। निशा के मामले में एक बयान में उसकी उम्र 18 वर्ष बताई गई, जबकि सिदरा के मामले में एफआईआर में 15 की जगह 17 वर्ष लिखी गई।
जरानवाला की सिदरा बीबी का मामला क्या है?
15 वर्षीय सिदरा बीबी को 27 मार्च को पंजाब के जरानवाला से बंदूक की नोंक पर अगवा किया गया। दस्तावेज़ों में दावा किया गया कि उसने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाया और अली मुर्तजा से विवाह किया। पुलिस ने एफआईआर में उसकी उम्र गलत दर्ज की और संदिग्धों के रिश्तेदारों को रिहा कर दिया।
इन मामलों में परिवारों को न्याय मिलने की क्या संभावना है?
दोनों मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी है। हबीब ने खुद हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की है। मानवाधिकार संगठन इन मामलों पर नज़र रख रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में ऐसे मामलों में न्याय मिलना ऐतिहासिक रूप से कठिन रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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