लाहौर में 14 साल की ईसाई लड़की का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन कर 41 वर्षीय से निकाह कराया
सारांश
मुख्य बातें
लाहौर की गुलबहार कॉलोनी में एक 41 वर्षीय विवाहित मुस्लिम व्यक्ति ने कथित तौर पर 14 वर्षीय ईसाई लड़की निशा बीबी का अपहरण किया, उसे जबरन इस्लाम कबूल कराया और उससे निकाह कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार, पीड़िता मिर्गी और मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्याओं से पीड़ित थी, जिसका आरोपी ने फायदा उठाया।
मुख्य घटनाक्रम
निशा के पिता अब्बास मसीह, जो एक दिहाड़ी मजदूर और स्थानीय ब्रेथ्रेन चर्च के सदस्य हैं, ने बताया कि उनकी बेटी एक मुस्लिम परिवार के घर में घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थी। 12 मई को वह काम से घर नहीं लौटी। मसीह ने कहा, 'जब निशा काम से घर नहीं लौटी, तो हम उसके मालिक के घर गए, जहाँ हमें बताया गया कि वह पहले ही जा चुकी है।'
परिवार के पुलिस से संपर्क करने के बाद, मालिक के घर के सीसीटीवी फुटेज में निशा को एक अधेड़ उम्र के अजनबी के साथ जाते देखा गया। इस आधार पर पुलिस ने अपहरण की एफआईआर दर्ज की। स्क्रीनशॉट साझा करने पर पड़ोस की एक महिला ने उस व्यक्ति की पहचान अपने पति अरशद हबीब के रूप में की — और बताया कि हबीब उसी दिन उनके दो नाबालिग बच्चों को लेकर बिना बताए गायब हो गया था।
जाली दस्तावेज़ों का खुलासा
पुलिस ने परिवार को वे दस्तावेज़ दिखाए जिनमें दावा किया गया था कि निशा ने 15 फरवरी को स्वेच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया और तीन दिन बाद हबीब से निकाह किया। अब्बास मसीह ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'हम यह देखकर हैरान रह गए कि मेरी बेटी ने अपनी मर्जी से धर्म बदला और आरोपी से निकाह किया। ये दस्तावेज़ हबीब को आपराधिक मामले से बचाने के लिए तैयार किए गए लगते हैं।'
2 मार्च को लाहौर में एक मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए एक बयान में दावा किया गया कि निशा की उम्र 18 वर्ष है और उसने स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन व विवाह किया है। परिवार की वकील जुनारा पैट्रिक ने इस बयान की प्रामाणिकता को चुनौती देते हुए कहा कि हबीब ने जाँचकर्ताओं को गुमराह करने के लिए नकली कानूनी दस्तावेज़ तैयार किए हैं।
आरोपी की पृष्ठभूमि
अब्बास मसीह के अनुसार, हबीब पहले से तीन विवाह कर चुका है और उन सभी से उसके बच्चे हैं। वकील पैट्रिक ने बताया कि कानूनी टीम ने हबीब को पंजाब प्रांत के रहीम यार खान ज़िले में पाया, जहाँ वह कथित तौर पर निशा और अपनी तीसरी पत्नी के दो बच्चों के साथ रह रहा था। हबीब ने अपनी तीसरी पत्नी की ओर से बच्चों की वापसी के लिए हेबियस कॉर्पस याचिका भी दाखिल की है।
दूसरा मामला: जरानवाला की सिदरा बीबी
यह घटना अकेली नहीं है। अप्रैल की शुरुआत में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब प्रांत के जरानवाला शहर में 15 वर्षीय ईसाई लड़की सिदरा बीबी को 27 मार्च को अली मुर्तजा नामक एक मुस्लिम व्यक्ति और उसके दो साथियों ने उसके घर की दीवार फाँदकर घुसकर बंदूक की नोंक पर अगवा कर लिया।
सिदरा के पिता अफजल जावेद मसीह ने बताया कि पुलिस ने एफआईआर में उनकी बेटी की उम्र 15 वर्ष के बजाय 17 वर्ष दर्ज की, जो उनके आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा, 'मैं अनपढ़ हूँ और मुझे यह अंतर बाद में एक कार्यकर्ता के ध्यान दिलाने पर पता चला।' पुलिस ने संदिग्ध के रिश्तेदारों को गिरफ्तार तो किया, लेकिन बाद में छोड़ दिया। दस्तावेज़ सामने आए जिनमें दावा था कि सिदरा ने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाया और रहीम यार खान ज़िले में मुर्तजा अली से विवाह किया।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय लंबे समय से जबरन धर्म परिवर्तन और नाबालिग लड़कियों के अपहरण की शिकायतें उठाता रहा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रशासनिक लापरवाही और जाली दस्तावेज़ों का सहारा लेकर आरोपियों को बचाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। दोनों मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है और पीड़ित परिवार न्याय की माँग कर रहे हैं।