12 जुलाई 2026
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त्रिपुरा-मिजोरम सीमा विवाद: CM माणिक साहा और लालदुहोमा में सहमति, वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक जल्द

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त्रिपुरा-मिजोरम सीमा विवाद: CM माणिक साहा और लालदुहोमा में सहमति, वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक जल्द

सारांश

वर्षों से अनसुलझा त्रिपुरा-मिजोरम सीमा विवाद अब बातचीत की मेज पर आया है। NEC के 73वें अधिवेशन में CM माणिक साहा और लालदुहोमा की सहमति के बाद 109 किमी लंबी विवादित सीमा पर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक जल्द होगी — मई 2025 के विस्फोट के बाद यह कूटनीतिक कदम अहम है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा के CM माणिक साहा और मिजोरम के CM लालदुहोमा ने शिलांग में NEC के 73वें पूर्ण अधिवेशन के दौरान सीमा विवाद बातचीत से सुलझाने पर सहमति जताई।
दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी जल्द 109 किलोमीटर लंबी साझा सीमा के विवादित बिंदुओं पर चर्चा करेंगे।
मई 2025 में उत्तर त्रिपुरा के फुलडुंगसेई गाँव में निर्माणाधीन पर्यटन भवन पर विस्फोट हुआ था, जिससे भवन को भारी नुकसान पहुँचा था।
स्वदेश दर्शन योजना के तहत फुलडुंगसेई में ₹3.12 करोड़ की इको-टूरिज्म परियोजना विकसित की जा रही है, जिस पर दोनों राज्य दावा करते हैं।
त्रिपुरा की बांग्लादेश के साथ 856 किमी , असम के साथ 53 किमी और मिजोरम के साथ 109 किमी सीमा है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा के बीच वर्षों से अनसुलझे 109 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने पर सहमति बनी है। 12 जुलाई 2026 को अधिकारियों ने बताया कि दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही विवादित सीमाई क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा के लिए बैठक करेंगे। यह पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र में लंबे समय से जारी एक संवेदनशील भू-राजनीतिक गतिरोध को कूटनीतिक रास्ते से सुलझाने का प्रयास है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को एक सरकारी कार्यक्रम में बताया कि शिलांग में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद (NEC) के 73वें पूर्ण अधिवेशन के दौरान उन्होंने मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा से सीमा विवाद पर सीधी बातचीत की। साहा ने कहा, 'जब मैंने मिजोरम के मुख्यमंत्री से सीमा विवाद को बातचीत के ज़रिए सुलझाने का प्रस्ताव रखा, तो उन्होंने तुरंत सहमति दे दी। मैंने सुझाव दिया कि पहले दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी बैठकर पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा करें। इसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।'

NEC के इस अधिवेशन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (DoNER) मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, DoNER राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार तथा पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री शामिल हुए थे।

विवाद की जड़ें और भौगोलिक संदर्भ

त्रिपुरा की सीमा दक्षिण, पश्चिम और उत्तर दिशाओं में बांग्लादेश से लगती है — 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा, जो राज्य की कुल सीमा का लगभग 84 प्रतिशत है। इसके अलावा त्रिपुरा की असम के साथ 53 किलोमीटर और मिजोरम के साथ 109 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है। यह 109 किलोमीटर का खंड कई वर्षों से विवाद का केंद्र बना हुआ है, जहाँ दोनों राज्य एक-दूसरे के निर्माण कार्यों पर आपत्ति दर्ज कराते रहे हैं।

गौरतलब है कि मई 2025 में उत्तर त्रिपुरा जिले के फुलडुंगसेई गाँव में त्रिपुरा पर्यटन विभाग की निर्माणाधीन इमारत पर अज्ञात बदमाशों ने मध्यम तीव्रता के विस्फोटक फेंके थे, जिससे भवन को भारी नुकसान पहुँचा था। उस घटना के बाद दोनों राज्यों की पुलिस ने संयुक्त दौरा किया और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।

फुलडुंगसेई: विवाद का केंद्रबिंदु

फुलडुंगसेई गाँव को दोनों राज्य अपनी-अपनी सीमा का हिस्सा बताते हैं। यहाँ केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत लगभग ₹3.12 करोड़ की लागत से एक इको-टूरिज्म परियोजना विकसित की जा रही है। यह परियोजना ही मई 2025 के विस्फोट की पृष्ठभूमि बनी थी।

इससे पहले उत्तर त्रिपुरा और मिजोरम के मामित जिले के प्रशासनिक अधिकारियों तथा सर्वे ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों के बीच विवादित सीमाई क्षेत्रों को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। मिजोरम के विभिन्न नागरिक और छात्र संगठनों ने भी समय-समय पर त्रिपुरा सरकार के निर्माण कार्यों का विरोध किया है।

आगे की रणनीति

तय प्रक्रिया के अनुसार, पहले दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी बैठेंगे और विवादित बिंदुओं की पहचान करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर बैठक होगी जिसमें दीर्घकालिक समाधान की रूपरेखा तय की जाएगी। यह पहल ऐसे समय में आई है जब पूर्वोत्तर के कई राज्यों के बीच सीमा विवाद — जैसे असम-मेघालय समझौता — को कूटनीतिक संवाद से सुलझाने की मिसालें सामने आई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्वोत्तर के सीमा विवादों का इतिहास बताता है कि अधिकारी-स्तरीय बैठकें अक्सर ठोस नतीजे दिए बिना खिंचती रहती हैं। असम-मेघालय समझौते ने एक नज़ीर ज़रूर पेश की है, पर वहाँ भी क्रियान्वयन अधूरा है। फुलडुंगसेई जैसे विवादित बिंदु पर जब तक ज़मीनी सीमांकन नहीं होता, केंद्र-वित्तपोषित परियोजनाएँ नए तनाव की वजह बनती रहेंगी। असली परीक्षा यह है कि क्या इस बार वार्ता में सर्वे ऑफ इंडिया की तकनीकी भागीदारी और केंद्र की सक्रिय मध्यस्थता सुनिश्चित होगी।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा और मिजोरम के बीच सीमा विवाद क्या है?
त्रिपुरा और मिजोरम के बीच 109 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा पर कई वर्षों से विवाद है, जिसमें दोनों राज्य कुछ इलाकों को अपना बताते हैं। जब भी किसी एक राज्य की ओर से विवादित क्षेत्र में निर्माण या विकास कार्य होता है, दूसरा राज्य आपत्ति दर्ज कराता है।
नई वार्ता की शुरुआत कहाँ और कैसे हुई?
यह पहल शिलांग में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद (NEC) के 73वें पूर्ण अधिवेशन के दौरान हुई, जहाँ त्रिपुरा के CM माणिक साहा ने मिजोरम के CM लालदुहोमा से बातचीत कर समाधान का प्रस्ताव रखा और दोनों ने सहमति जताई।
फुलडुंगसेई गाँव विवाद में क्यों अहम है?
फुलडुंगसेई गाँव को दोनों राज्य अपनी-अपनी सीमा का हिस्सा मानते हैं। यहाँ स्वदेश दर्शन योजना के तहत ₹3.12 करोड़ की इको-टूरिज्म परियोजना चल रही है और मई 2025 में निर्माणाधीन पर्यटन भवन पर विस्फोट हुआ था।
आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
पहले दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी बैठेंगे और विवादित बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री स्तर की बैठक होगी जिसमें दीर्घकालिक समाधान की रणनीति तय की जाएगी।
NEC के 73वें अधिवेशन में कौन-कौन शामिल था?
अधिवेशन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह , DoNER मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया , DoNER राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार और पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपाल व मुख्यमंत्री शामिल हुए।
राष्ट्र प्रेस
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