मिजोरम सीमा सुरक्षा: गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार ने असम राइफल्स और पुलिस के बीच समन्वय पर दिया जोर
सारांश
Key Takeaways
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को मिजोरम के सीमावर्ती निवासियों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए असम राइफल्स, राज्य पुलिस, जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। मंत्री ने आइजोल स्थित माइनको सचिवालय के सम्मेलन कक्ष से सियाहा जिले के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए उच्च स्तरीय बैठक की।
बैठक का विवरण और प्रमुख प्रतिभागी
सियाहा जिले के उपायुक्त वी.एल. ह्रुआइजेला खियांगते, मारा स्वायत्त जिला परिषद (एमएडीसी) के कार्यालय प्रमुखों और अधिकारियों ने सियाहा स्थित उपायुक्त के मिनी सम्मेलन कक्ष से इस बैठक में भाग लिया। खियांगते ने जिले का संक्षिप्त परिचय और अवलोकन प्रस्तुत किया।
सियाहा जिले के पुलिस अधीक्षक ने शांतिपूर्ण कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक ढाँचे के अंतर्गत मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी सहित अवैध सीमा पार गतिविधियों के विरुद्ध कड़ी निगरानी बनाए रखी जा रही है। गौरतलब है कि मंत्री का मूल रूप से सियाहा जिला मुख्यालय का सीधा दौरा निर्धारित था, किंतु खराब मौसम के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंस का विकल्प अपनाना पड़ा। उनके साथ गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
चर्चा के प्रमुख मुद्दे
जिले के विभागीय अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री को चल रही योजनाओं, उनकी उपलब्धियों और कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया। बैठक में सीमा पार संबंधी चिंताओं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सुरक्षा चुनौतियों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इन चिंताओं को दूर करने की रणनीतियों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
मिजोरम सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, मंत्री ने सीमावर्ती गाँवों में सुरक्षा को मज़बूत करने, विकास को बढ़ावा देने और लोगों के कल्याण में सुधार लाने के लिए सभी एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
मिजोरम की भौगोलिक संवेदनशीलता
मिजोरम की भौगोलिक स्थिति इसे विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है। राज्य की म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा और बांग्लादेश के साथ 318 किलोमीटर लंबी पहाड़ी और छिद्रपूर्ण सीमा है। यह भौगोलिक वास्तविकता राज्य को नशीले पदार्थों और अन्य अवैध वस्तुओं की सीमा पार तस्करी के प्रति असुरक्षित बनाती है।
नशीली दवाओं, विदेशी जानवरों, विदेशी सिगरेट और म्यांमार की सुपारी सहित विभिन्न प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी मिजोरम के छह जिलों — चम्फाई, सियाहा, लॉंग्टलाई, हनथियाल, सैतुअल और सेरछिप — के रास्ते अक्सर होती है, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौतियाँ खड़ी होती हैं।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर भारत की सीमाओं पर निगरानी और समन्वय तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बहु-एजेंसी समन्वय का यह मॉडल मिजोरम जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है।