श्रीनगर पुलिस की ऑनलाइन अलगाववादी प्रचार पर बड़ी कार्रवाई, BNS की कई धाराओं में FIR दर्ज

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श्रीनगर पुलिस की ऑनलाइन अलगाववादी प्रचार पर बड़ी कार्रवाई, BNS की कई धाराओं में FIR दर्ज

सारांश

श्रीनगर पुलिस ने डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर अलगाववादी वीडियो सामग्री फैलाने के मामले में BNS की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में जारी व्यापक आतंकवाद-विरोधी अभियान का हिस्सा है, जो अब डिजिटल दायरे तक विस्तारित हो रही है।

Key Takeaways

श्रीनगर पुलिस ने 30 अप्रैल 2026 को ऑनलाइन अलगाववादी प्रचार के खिलाफ FIR दर्ज की। BNS की धारा 152 , 196(1) और 353(1)(ख), (ग) एवं (2) के तहत मामला दर्ज किया गया। मामला साइबर पुलिस स्टेशन श्रीनगर में दर्ज है और जाँच जारी है। पुलिस ने आम जनता को गैरकानूनी सामग्री साझा करने से बचने की सख्त चेतावनी दी। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में जारी आतंकवाद-विरोधी व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।

श्रीनगर पुलिस ने गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर अलगाववादी प्रचार फैलाने के आरोप में कुछ व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई सार्वजनिक शांति, राष्ट्रीय संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से वीडियो सामग्री प्रसारित करने की विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि साइबर पुलिस स्टेशन श्रीनगर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196(1) और 353(1)(ख), (ग) एवं (2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। ये धाराएँ देशद्रोह, सांप्रदायिक वैमनस्य भड़काने और राष्ट्रीय एकता को कमज़ोर करने से संबंधित संज्ञेय अपराधों को परिभाषित करती हैं।

पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जाँच से यह संकेत मिलता है कि इस सामग्री का प्रसार जानबूझकर किया गया एक सुनियोजित प्रयास है, जिसका मकसद अलगाववादी और विभाजनकारी विचारों को डिजिटल माध्यमों से बढ़ावा देना है।

पुलिस की चेतावनी और सार्वजनिक अपील

श्रीनगर पुलिस ने आम जनता को सख्त चेतावनी दी है कि वे सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर इस प्रकार की गैरकानूनी सामग्री बनाने, साझा करने या प्रसारित करने से बचें। पुलिस ने कहा कि ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि इस तरह की ऑनलाइन सामग्री से जन असंतोष भड़कने, सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने और राष्ट्रीय एकता कमज़ोर होने का खतरा बताया गया है।

आतंकवाद-विरोधी अभियान का हिस्सा

जम्मू और कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल इन दिनों आतंकवाद के पूरे समर्थन तंत्र को निशाना बनाने के उद्देश्य से आक्रामक अभियान चला रहे हैं। इसमें आतंकवादियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों और समर्थकों के खिलाफ भी कार्रवाई शामिल है। यह ऑनलाइन प्रचार के खिलाफ की गई कार्रवाई उसी व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।

आम जनता पर असर

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में डिजिटल निगरानी और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में तेज़ी देखी जा रही है। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को सचेत किया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध सामग्री को साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जाँच करें। जाँच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Point of View

NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

श्रीनगर पुलिस ने किस आरोप में FIR दर्ज की है?
श्रीनगर पुलिस ने डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाली वीडियो सामग्री प्रसारित करने के आरोप में FIR दर्ज की है। यह मामला BNS की धारा 152, 196(1) और 353(1)(ख), (ग) एवं (2) के तहत साइबर पुलिस स्टेशन श्रीनगर में दर्ज किया गया है।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196(1) और 353(1)(ख), (ग) तथा (2) लगाई गई हैं। ये धाराएँ देशद्रोह, सांप्रदायिक वैमनस्य भड़काने और राष्ट्रीय एकता को कमज़ोर करने से जुड़े संज्ञेय अपराधों को कवर करती हैं।
क्या इस मामले में कोई गिरफ्तारी हुई है?
पुलिस के बयान के अनुसार अभी तक कुछ व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और जाँच जारी है। गिरफ्तारी के बारे में अधिकारियों ने अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
आम नागरिकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
श्रीनगर पुलिस ने आम जनता को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर किसी भी अलगाववादी या राष्ट्र-विरोधी सामग्री को बनाने, साझा करने या प्रसारित करने से बचें। ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के व्यापक सुरक्षा अभियान से कैसे जुड़ी है?
जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल आतंकवाद के पूरे समर्थन तंत्र को निशाना बनाने के लिए आक्रामक अभियान चला रहे हैं। यह डिजिटल कार्रवाई उसी व्यापक अभियान का विस्तार है, जिसमें अब ऑनलाइन प्रचार को भी सुरक्षा खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
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