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जावेद अख्तर का वायरल वीडियो: 'हिंदू संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है विचारों की आज़ादी'

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जावेद अख्तर का वायरल वीडियो: 'हिंदू संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है विचारों की आज़ादी'

सारांश

जावेद अख्तर का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह हिंदू संस्कृति की विचार-स्वतंत्रता को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हैं। खुद को नास्तिक कहने वाले अख्तर का कहना है कि धर्म और संस्कृति अलग हैं — होली-दिवाली उनके लिए संस्कृति हैं, धर्म नहीं।

मुख्य बातें

जावेद अख्तर का पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर 12 जुलाई के आसपास तेज़ी से वायरल हुआ।
वीडियो में अख्तर ने कहा कि हिंदू संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता विचारों की आज़ादी है, जो भारतीय लोकतंत्र की नींव है।
खुद को नास्तिक बताने वाले अख्तर ने कहा कि उनके घर में ईद, क्रिसमस, होली और दिवाली सभी त्योहार मनाए जाते हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि होली और दिवाली जैसे त्योहारों की उत्पत्ति संस्कृति से हुई, धर्म ने बाद में इन्हें अपनाया।
यह उनका पहला वायरल वीडियो नहीं — इससे पहले भी धर्म और संस्कृति के अंतर पर उनका एक वीडियो व्यापक रूप से साझा हुआ था।

दिग्गज गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर का एक पुराना वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह हिंदू संस्कृति, भारतीय परंपराओं और देश की लोकतांत्रिक सोच की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते दिख रहे हैं। वायरल वीडियो में अख्तर का कहना है कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता और हर विचार को आत्मसात करने की अद्वितीय क्षमता है।

वायरल वीडियो में क्या कहा अख्तर ने

वायरल हो रहे इस वीडियो में जावेद अख्तर कहते हैं, 'हिंदू संस्कृति की सबसे अच्छी बात यह है कि यहाँ आपको कुछ भी कहने, कुछ भी सुनने और किसी भी बात पर विश्वास करने की आज़ादी है। यही सोच इस देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। अगर आप भारत से बाहर निकलें, तो भूमध्यसागर के तट तक आपको ऐसा लोकतंत्र आसानी से देखने को नहीं मिलेगा।' यह बयान ऐसे समय में व्यापक चर्चा का विषय बना है जब सांस्कृतिक पहचान और धर्म पर राष्ट्रीय विमर्श तेज़ है।

धर्म और संस्कृति पर अख्तर का नज़रिया

जावेद अख्तर खुद को नास्तिक मानते हैं और उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों पर स्पष्ट किया है कि उनका किसी धर्म में व्यक्तिगत आस्था नहीं है। बावजूद इसके, वह भारतीय संस्कृति और त्योहारों से गहरे जुड़ाव की बात करते हैं। वीडियो में वह कहते हैं, 'इंसान सिर्फ वही नहीं होता जो वह खुद को समझता है, बल्कि वह भी होता है जैसा दुनिया उसे देखती है। मेरा किसी धर्म में विश्वास नहीं है, लेकिन ईद पर मुझे लोग शुभकामनाएँ देते हैं। मैं बकरीद नहीं मनाता, फिर भी लोग बधाई देते हैं।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'मेरे परिवार में ईद, क्रिसमस, होली और दिवाली जैसे सभी त्योहार खुशी के साथ मनाए जाते हैं। हमारे घर पर फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी होली होती है, लेकिन हम इसे धर्म नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति मानते हैं।'

त्योहारों की उत्पत्ति पर मानवशास्त्रीय दृष्टि

वीडियो में जावेद अख्तर ने होली और दिवाली जैसे त्योहारों की उत्पत्ति पर एक रोचक दृष्टिकोण रखा। उनके अनुसार, 'यही भारत की संस्कृति है। हम धर्म की वजह से अपनी संस्कृति को नहीं छोड़ेंगे। धर्म अलग हो सकता है, लेकिन संस्कृति बहुत सुंदर चीज़ है। होली और दिवाली जैसे त्योहार बेहद खूबसूरत हैं — इन्हें छोड़ने की कोई वजह नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि किसी मानवविज्ञानी से पूछें तो वह बताएगा कि इन त्योहारों की शुरुआत धर्म ने नहीं, बल्कि संस्कृति ने की थी — बाद में धर्म ने इन्हें अपने भीतर शामिल कर लिया।

पहले भी वायरल हो चुके हैं ऐसे बयान

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब जावेद अख्तर का कोई वीडियो इस तरह वायरल हुआ हो। इससे पहले भी उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब साझा किया गया था, जिसमें वह संस्कृति और धर्म के बीच के बारीक अंतर को समझाते नज़र आए थे। हिंदी सिनेमा में दशकों तक अपनी कलम से अमिट छाप छोड़ने वाले अख्तर के बयान अक्सर राष्ट्रीय बहस को नई दिशा देते हैं। उनका यह वीडियो एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि भारतीय पहचान में धर्म और संस्कृति के बीच की रेखा कहाँ खींची जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यही इस वीडियो की असली ताकत है — यह धर्म और संस्कृति के बीच की उस बारीक रेखा को रेखांकित करता है जिसे राजनीतिक विमर्श अक्सर जानबूझकर धुंधला करता है। अख्तर का यह कहना कि त्योहारों की जड़ें संस्कृति में हैं, धर्म में नहीं, एक मानवशास्त्रीय दृष्टिकोण है जो अकादमिक हलकों में स्वीकृत है, पर मुख्यधारा की बहस में दुर्लभ है। मुख्यधारा की कवरेज इस वीडियो को महज़ 'वायरल मोमेंट' की तरह पेश करती है, जबकि असली सवाल यह है कि एक बहुलतावादी राष्ट्र में साझी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पहचान के बीच सार्वजनिक संवाद की जगह कितनी बची है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जावेद अख्तर के वायरल वीडियो में क्या कहा गया है?
वायरल वीडियो में जावेद अख्तर ने हिंदू संस्कृति की विचार-स्वतंत्रता को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि भूमध्यसागर के तट तक ऐसा लोकतंत्र कहीं और देखने को नहीं मिलेगा।
क्या जावेद अख्तर हिंदू हैं?
नहीं, जावेद अख्तर खुद को नास्तिक बताते हैं और उनका किसी धर्म में व्यक्तिगत विश्वास नहीं है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह होली, दिवाली, ईद और क्रिसमस सभी त्योहार अपनी सांस्कृतिक विरासत के रूप में मनाते हैं।
जावेद अख्तर ने धर्म और संस्कृति में क्या फ़र्क बताया?
अख्तर के अनुसार होली और दिवाली जैसे त्योहारों की उत्पत्ति संस्कृति से हुई थी, और बाद में धर्म ने इन्हें अपने भीतर शामिल कर लिया। उनका मानना है कि धर्म अलग हो सकता है, लेकिन साझा सांस्कृतिक विरासत को छोड़ने की कोई वजह नहीं।
यह वीडियो कब से वायरल हो रहा है?
यह वीडियो 12 जुलाई 2026 के आसपास सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ। वीडियो पुराना है, लेकिन इसे हाल ही में बड़े पैमाने पर साझा किया जाने लगा है।
क्या जावेद अख्तर पहले भी इस तरह के बयान दे चुके हैं?
हाँ, इससे पहले भी उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह संस्कृति और धर्म के बीच का अंतर समझाते नज़र आए थे। अख्तर अपने बेबाक और विचारोत्तेजक सार्वजनिक बयानों के लिए जाने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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