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जावेद अख्तर का फिल्म इंडस्ट्री से पहला सामना: जब 'नई' कहानी को बताया गया 'जोखिम'

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जावेद अख्तर का फिल्म इंडस्ट्री से पहला सामना: जब 'नई' कहानी को बताया गया 'जोखिम'

सारांश

जावेद अख्तर का एक पुराना वीडियो फिर वायरल — जब एक निर्माता ने उनकी मौलिक कहानी को 'जोखिम' बताया, सिर्फ इसलिए कि वैसी फिल्म पहले नहीं बनी थी। यह किस्सा बॉलीवुड की उस सोच का आईना है जो दशकों बाद भी नहीं बदली।

मुख्य बातें

जावेद अख्तर ने लोकप्रिय शो 'मूवर्स एंड शैकर्स' में फिल्म इंडस्ट्री के शुरुआती दिनों का किस्सा साझा किया।
एक फिल्म निर्माता ने उनकी मौलिक कहानी को इसलिए 'जोखिम' बताया क्योंकि वैसी कहानी पर पहले कोई फिल्म नहीं बनी थी।
अख्तर ने व्यंग्यात्मक ढंग से कहा कि निर्माता 'बिल्कुल नई कहानी चाहते हैं, जो पहले भी दिखाई जा चुकी हो।' यह किस्सा बॉलीवुड में रचनात्मकता और व्यावसायिकता के बीच के पुराने तनाव को उजागर करता है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर 23 जून के आसपास फिर से वायरल हुआ।

दिग्गज गीतकार, पटकथा लेखक और कवि जावेद अख्तर ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दिनों का एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जो बॉलीवुड की व्यावसायिक सोच पर तीखी रोशनी डालता है। लोकप्रिय टेलीविज़न शो 'मूवर्स एंड शैकर्स' का यह पुराना वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा में है, जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह एक फिल्म निर्माता ने उनकी 'बिल्कुल नई' कहानी को ही उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी करार दे दिया।

मुश्किल से मिला निर्माता से मिलने का मौका

अख्तर ने बताया कि जब वह पहली बार मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब यहाँ के तौर-तरीकों से वह पूरी तरह अनजान थे। उन्होंने एक कहानी लिखी जो उन्हें खुद अलग और मौलिक लगी। उन्होंने कहा, 'बड़ी मुश्किल से मुझे एक निर्माता से मिलने का समय मिला। उस दौर में किसी निर्माता के दफ्तर तक पहुँचना भी आसान नहीं था।'

कहानी सुनाई, कमरे में छा गया सन्नाटा

अख्तर के अनुसार, जब उन्होंने निर्माता को अपनी कहानी सुनानी शुरू की, तो वह बड़े ध्यान से सुनते रहे। उन्होंने कहा, 'मुझे लगा कि उन्हें कहानी पसंद आ रही है। जब कहानी खत्म हुई तो कमरे में कुछ देर तक सन्नाटा रहा। मैंने उनसे पूछा कि कहानी कैसी लगी।' गौरतलब है कि यह वह दौर था जब बॉलीवुड में नए लेखकों के लिए अपनी आवाज़ पहुँचाना बेहद कठिन था।

निर्माता का चौंकाने वाला जवाब

अख्तर ने बताया कि निर्माता का जवाब उनके लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था। निर्माता ने कहा, 'कहानी अच्छी है, लेकिन इसमें एक जोखिम है — मुझे याद नहीं पड़ता कि ऐसी कहानी मैंने पहले कभी किसी फिल्म में देखी हो।' यानी कहानी का मौलिक होना ही उसके लिए खतरे की घंटी था।

रचनात्मकता बनाम व्यावसायिकता का विरोधाभास

इस किस्से का निचोड़ सुनाते हुए जावेद अख्तर ने मुस्कुराते हुए कहा, 'तब मुझे समझ में आया कि वह दरअसल वही कहानी चाहते थे, जो पहले किसी फिल्म में आ चुकी हो। फिल्म निर्माता की माँग बड़ी दिलचस्प होती है — वह ऐसी बिल्कुल नई कहानी चाहते हैं, जो पहले भी कहीं दिखाई जा चुकी हो।' यह व्यंग्यात्मक टिप्पणी उद्योग की उस मानसिकता को उजागर करती है जहाँ 'साबित फॉर्मूले' को नई सोच पर तरजीह दी जाती है।

आज भी प्रासंगिक है यह सवाल

अख्तर का यह अनुभव केवल उनके शुरुआती दिनों की कहानी नहीं है — यह उस बहस को फिर से जीवित करता है जो आज भी बॉलीवुड में जारी है। आलोचकों का कहना है कि सीक्वेल, रीमेक और ओटीटी के इस दौर में भी प्रयोगधर्मी कहानियों को लेकर हिचकिचाहट बरकरार है। यह वीडियो दर्शकों को न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव से जोड़ता है, बल्कि रचनात्मकता और व्यावसायिक सफलता के बीच के उस पुराने तनाव को भी रेखांकित करता है जो दशकों बाद भी अनसुलझा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल सवाल यह है कि जब इंडस्ट्री के सबसे बड़े लेखकों में से एक को भी शुरुआत में यह दीवार मिली, तो आज के नए लेखकों की हालत क्या होगी? ओटीटी ने कुछ जगह ज़रूर बनाई है, पर बड़े बजट की फिल्मों में जोखिम लेने की इच्छाशक्ति अभी भी दुर्लभ है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जावेद अख्तर का वायरल वीडियो किस शो का है?
यह वीडियो लोकप्रिय टेलीविज़न शो 'मूवर्स एंड शैकर्स' का है, जिसमें जावेद अख्तर ने फिल्म इंडस्ट्री के शुरुआती दिनों का अनुभव साझा किया। यह पुराना वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो रहा है।
जावेद अख्तर ने निर्माता के बारे में क्या किस्सा सुनाया?
अख्तर ने बताया कि जब उन्होंने एक निर्माता को अपनी मौलिक कहानी सुनाई, तो निर्माता ने कहा कि कहानी अच्छी है लेकिन 'जोखिम' यह है कि उन्हें याद नहीं पड़ता कि ऐसी कहानी पहले किसी फिल्म में आई हो। यानी कहानी का नया होना ही उसकी कमज़ोरी मान ली गई।
इस किस्से से बॉलीवुड की किस सोच का पता चलता है?
यह किस्सा बॉलीवुड की उस प्रवृत्ति को उजागर करता है जहाँ निर्माता ऐसी कहानियों को प्राथमिकता देते हैं जिनकी सफलता पहले से साबित हो चुकी हो। आलोचकों का कहना है कि यह मानसिकता आज भी सीक्वेल और रीमेक की संस्कृति में दिखती है।
जावेद अख्तर कौन हैं और फिल्म इंडस्ट्री में उनका क्या योगदान है?
जावेद अख्तर हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार, पटकथा लेखक और कवि हैं। उन्होंने 'शोले', 'दीवार' जैसी क्लासिक फिल्मों की पटकथा लिखी और बाद में 'तेज़ाब', 'बाज़ीगर' जैसी फिल्मों के गीत लिखकर खुद को एक नई पहचान दी।
क्या आज भी बॉलीवुड में नई कहानियों को लेकर यही रवैया है?
कथित तौर पर हाँ — आलोचकों का कहना है कि बड़े बजट की फिल्मों में मौलिक कहानियों को लेकर हिचकिचाहट आज भी बनी हुई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने कुछ हद तक नई आवाज़ों को जगह दी है, लेकिन मल्टीप्लेक्स रिलीज़ में 'साबित फॉर्मूले' की प्राथमिकता अभी भी देखी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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