जब जावेद अख्तर ने 'सिलसिला' को कहा- मजा नहीं आया, जानिए सागर सरहदी की प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- सिलसिला की गहराई दर्शकों को समय के साथ समझ में आई।
- जावेद अख्तर की प्रतिक्रिया ने फिल्म की प्रारंभिक धारणा को प्रभावित किया।
- अमिताभ और रेखा की जोड़ी ने फिल्म को और भी खास बनाया।
- सागर सरहदी की मेहनत और यश चोपड़ा का निर्देशन महत्वपूर्ण थे।
- फिल्म के गाने आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं।
मुंबई, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो कभी पुरानी नहीं होतीं। दर्शकों ने उन्हें इतनी पसंद किया कि वे आज भी उन्हें उसी ताजगी के साथ देखते हैं। ऐसी ही एक अद्भुत क्लासिक फिल्म है जो 1981 में सागर सरहदी द्वारा लिखी गई 'सिलसिला'। यह आज भी रिश्तों की जटिलताओं और गहन भावनाओं के लिए याद की जाती है, लेकिन इसकी रिलीज के समय प्रतिक्रियाएं मिश्रित थीं। आज सागर सरहदी की पुण्यतिथि है, आइए जानते हैं 'सिलसिला' से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा।
फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा, जया बच्चन और संजीव कुमार की अदाकारी आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। सागर सरहदी की लेखनी में संवेदना और सच्चाई का समावेश था। 'सिलसिला' की शुरुआती प्रतिक्रियाएं भले ही कमजोर रहीं, लेकिन समय के साथ यह एक क्लासिक बन गई और रिश्तों की कहानी कहने का एक नया मानक स्थापित किया।
एक इंटरव्यू में सागर सरहदी ने साझा किया था कि प्रसिद्ध शायर-गीतकार जावेद अख्तर ने फिल्म देखने के बाद उनसे कहा था, “सागर साहब, मजा नहीं आया।” इस पर सागर सरहदी ने कहा कि अगर फिल्म अच्छी नहीं लगी तो वे क्या कह सकते हैं। उन्होंने उत्तर दिया, “मैंने जितना किया, किया; लेकिन अगर मजा नहीं आया तो मेरे लिए और क्या कर सकते हैं।”
सागर सरहदी ने बताया कि 'सिलसिला' की प्रारंभिक प्रतिक्रिया धीमी थी। जावेद अख्तर की यह टिप्पणी फिल्म के प्रारंभिक दौर की थी, जब दर्शकों को इसकी गहराई समझ में नहीं आई। धीरे-धीरे फिल्म का प्रभाव लोगों के मन में बढ़ने लगा। सागर सरहदी ने कहा कि ऐसी फिल्म पहले कभी नहीं बनी और न ही बाद में आई। अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी के वास्तविक जीवन के संबंध ने भी फिल्म को एक नया आयाम दिया। लोग इसे फिर से देखने लगे और सराहने लगे, और समय के साथ इसे क्लासिक का दर्जा प्राप्त हुआ।
सागर सरहदी ने 'सिलसिला' को लिखने के लिए कड़ी मेहनत की। यश चोपड़ा के साथ कई बार दृश्य रिवाइज किए गए, सुझाव दिए गए और फिर लेखन किया गया। उन्हें लगता था कि इतनी मेहनत एक फिल्म के लिए उचित नहीं है, लेकिन उन्होंने पूरी लगन से काम किया। फिल्म के गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए, जैसे “रंग बरसे”, “देखा एक ख्वाब” और “मैं और मेरी तन्हाई”। शिव-हरि का संगीत और शायरी ने फिल्म को अमर बना दिया।
लेखक ने बताया कि फिल्म रिलीज के समय उन्हें इसकी सफलता का कोई अंदाजा नहीं था। वे थकान महसूस कर रहे थे और खुद से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि वे अच्छे नाटककार और लघुकथा लेखक हैं, लेकिन फिल्मी दुनिया में आकर रोजी-रोटी के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने साझा किया कि जब लोग उनसे मिलते हैं और कहते हैं कि उन्होंने 'सिलसिला' 10-15 बार देखी है, तो उन्हें खुशी होती है। सागर सरहदी ने माना कि खुशी तो होती है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि फिल्म लेखन में ज्यादा समय बर्बाद हुआ। 'सिलसिला' को उन्होंने यश चोपड़ा के साथ मिलकर लिखा, जिसमें यश जी की सुझाव और निर्देशन का बड़ा योगदान था।