2 सितंबर 2026
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कर्नाटक को केंद्रीय फंड में उचित हिस्सा मिले — CM शिवकुमार ने नीति आयोग उपाध्यक्ष से की माँग

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कर्नाटक को केंद्रीय फंड में उचित हिस्सा मिले — CM शिवकुमार ने नीति आयोग उपाध्यक्ष से की माँग

सारांश

कर्नाटक के CM शिवकुमार ने नीति आयोग उपाध्यक्ष से सीधे कहा — राज्य को केंद्रीय फंड में उसका वाजिब हिस्सा चाहिए। 26 लाख आईटी प्रोफेशनल और सालाना 1.6 लाख इंजीनियर देने वाले राज्य की यह माँग जनसंख्या-आधारित वित्त फार्मूले पर दक्षिणी राज्यों की पुरानी नाराज़गी को फिर सतह पर लाती है।

मुख्य बातें

CM डीके शिवकुमार ने 2 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी से मुलाकात की।
शिवकुमार ने माँग की कि केंद्रीय वित्तीय आवंटन में कर्नाटक को उसका वाजिब हिस्सा मिले।
कर्नाटक हर साल लगभग 1.6 लाख इंजीनियर और करीब 13,000 डॉक्टर तैयार करता है; बेंगलुरु में 26 लाख आईटी प्रोफेशनल कार्यरत हैं।
जनसंख्या-आधारित फंड वितरण फार्मूले पर आपत्ति — जनसंख्या नियंत्रण में सफल दक्षिणी राज्यों को नुकसान न हो।
नीति आयोग के 'दूसरा बेंगलुरु' सुझाव पर राज्य ठोस योजना बनाने का आश्वासन दिया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 2 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी से मुलाकात कर स्पष्ट माँग रखी कि राज्य को केंद्रीय वित्तीय आवंटन में उसका वाजिब हिस्सा मिलना चाहिए। यह बैठक बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में हुई। शिवकुमार ने सहकारी संघवाद की अनिवार्यता को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रगति तभी संभव है जब राज्यों का समुचित विकास हो।

बैठक का मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बैठक में कहा, 'लंबे समय के बाद मुझे नीति आयोग के साथ अलग से बैठक करने का अवसर मिला है। नीति आयोग को कर्नाटक को हर संभव सहयोग देना चाहिए।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं कर्नाटक के राष्ट्रीय योगदान को स्वीकार किया है।

शिवकुमार ने यह भी बताया कि नीति आयोग ने पहले 'दूसरा बेंगलुरु' विकसित करने का सुझाव दिया था, और उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य अन्य राज्यों की सफल पहलों का अध्ययन कर इस दिशा में एक ठोस योजना तैयार करेगा।

कर्नाटक की आर्थिक ताकत — मुख्यमंत्री के तर्क

शिवकुमार ने केंद्रीय फंड में अधिक हिस्सेदारी की माँग को राज्य के आर्थिक प्रदर्शन से जोड़ा। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक जीएसडीपी, प्रति व्यक्ति आय, मानव विकास संकेतकों, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, निर्यात, स्टार्टअप और आईटी सर्विस सेक्टर के मामले में देश में सबसे आगे है।'

उन्होंने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कर्नाटक हर वर्ष लगभग 1.6 लाख इंजीनियर और करीब 13,000 डॉक्टर तैयार करता है, जबकि अकेले बेंगलुरु में लगभग 26 लाख आईटी प्रोफेशनल कार्यरत हैं।

बेंगलुरु पर बढ़ता दबाव और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती

मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के हर कोने से लोग बेंगलुरु में बस रहे हैं, जिससे शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है और बुनियादी ढाँचे पर दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्नत करने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट तैयार किए हैं, जो क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु की यातायात, जल आपूर्ति और आवास संबंधी समस्याएँ राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान ले चुकी हैं। गौरतलब है कि बेंगलुरु भारत की आईटी राजधानी के रूप में देश की विदेशी मुद्रा आय में बड़ा योगदान देता है।

जनसंख्या-आधारित फंड वितरण पर दक्षिणी राज्यों की आपत्ति

शिवकुमार ने केंद्रीय वित्त वितरण में जनसंख्या को आधार बनाने के फार्मूले पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिन दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के उपाय सफलतापूर्वक लागू किए हैं, उन्हें इस कारण वित्तीय नुकसान नहीं उठाना चाहिए। यह मुद्दा वित्त आयोग की सिफारिशों को लेकर दक्षिणी राज्यों की दीर्घकालिक शिकायत का हिस्सा रहा है।

आगे की राह

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी के साथ इस बैठक को राज्य-केंद्र संवाद की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। कर्नाटक सरकार ने संकेत दिया है कि वह अपनी माँगों को औपचारिक रूप से आगे भी उठाती रहेगी। केंद्रीय फंड में न्यायसंगत हिस्सेदारी का यह सवाल आने वाले वित्त आयोग की बैठकों में और अधिक प्रासंगिक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या ये केवल औपचारिक संवाद बनकर रह जाती हैं। बेंगलुरु पर बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर दबाव और राज्य की असंगत केंद्रीय फंडिंग — दोनों मिलकर एक ऐसा विरोधाभास बनाते हैं जिसे अनदेखा करना अब मुश्किल होता जा रहा है। यदि केंद्र इस असंतुलन को नहीं सुधारता, तो यह राज्य-केंद्र संबंधों में दरार को और गहरा कर सकता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM शिवकुमार ने नीति आयोग से क्या माँग की?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने माँग की कि केंद्रीय वित्तीय आवंटन में कर्नाटक को उसका उचित हिस्सा मिले। उन्होंने सहकारी संघवाद का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों के विकास के बिना राष्ट्रीय प्रगति संभव नहीं है।
यह बैठक कब और कहाँ हुई?
यह बैठक 2 सितंबर 2026 को बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में हुई। इसमें नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी शामिल थे।
जनसंख्या-आधारित फंड फार्मूले पर शिवकुमार ने क्या कहा?
शिवकुमार ने कहा कि जिन दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के उपाय सफलतापूर्वक लागू किए हैं, उन्हें केंद्रीय फंड वितरण में इस कारण नुकसान नहीं उठाना चाहिए। यह दक्षिणी राज्यों की वित्त आयोग फार्मूले को लेकर दीर्घकालिक शिकायत का हिस्सा है।
कर्नाटक की आर्थिक ताकत के बारे में CM ने क्या बताया?
शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक जीएसडीपी, प्रति व्यक्ति आय, एफडीआई, निर्यात और आईटी सेक्टर में देश में अग्रणी है। राज्य हर साल लगभग 1.6 लाख इंजीनियर और 13,000 डॉक्टर तैयार करता है, और बेंगलुरु में करीब 26 लाख आईटी प्रोफेशनल कार्यरत हैं।
'दूसरा बेंगलुरु' योजना क्या है?
नीति आयोग ने बेंगलुरु पर बढ़ते दबाव को देखते हुए 'दूसरा बेंगलुरु' विकसित करने का सुझाव दिया था। CM शिवकुमार ने आश्वासन दिया कि राज्य अन्य राज्यों की सफल पहलों का अध्ययन कर इस दिशा में एक ठोस योजना तैयार करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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