कर्नाटक CM शिवकुमार ने CEOs को दिया न्योता: AI विश्वविद्यालय, 100 दिन में नई नीति और ₹55 लाख करोड़ निर्यात लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 25 जुलाई 2025 को बेंगलुरु में आयोजित एक उच्चस्तरीय CEO सम्मेलन को संबोधित करते हुए उद्योग जगत के नेताओं से कर्नाटक के विकास के अगले चरण में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने एआई विश्वविद्यालय की स्थापना, बेंगलुरु से परे विश्वस्तरीय अवसंरचना के विस्तार और 100 दिनों के भीतर एक नई औद्योगिक नीति लाने की घोषणा की।
कर्नाटक की आर्थिक ताकत
शिवकुमार ने राज्य के आर्थिक प्रदर्शन के आँकड़े सामने रखते हुए बताया कि कर्नाटक का सॉफ्टवेयर निर्यात ₹43 लाख करोड़ को पार कर चुका है और इस वर्ष इसके ₹55 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इन आँकड़ों के पीछे वे युवा इंजीनियर हैं जिन्हें पहली नौकरी मिल रही है, वे डेवलपर हैं जो समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, और वे परिवार हैं जो अपने सपनों के करीब पहुँच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि कर्नाटक के वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) अब महज बैक-ऑफिस कार्यों से आगे बढ़कर नवाचार, उत्पाद विकास और उच्च-मूल्य सेवाओं के केंद्र बन चुके हैं। बेंगलुरु भारत के कार्यालय बाज़ार में अग्रणी स्थान बनाए हुए है।
बेंगलुरु की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त
दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर वैश्विक नेताओं के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए शिवकुमार ने कहा कि कंपनियाँ प्रतिभा, पर्यावरण-अनुकूल वातावरण और लागत लाभ के कारण बेंगलुरु को प्राथमिकता देती रहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ अन्य शहरों में 3.50 डॉलर प्रति इकाई खर्च होता है, वहीं बेंगलुरु में यही काम लगभग 1 डॉलर में संभव है — यह अंतर प्रतिभा और मानव संसाधन की गुणवत्ता के कारण है।
100 दिन में नई नीति, सस्ती अवसंरचना
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले 100 दिनों के भीतर सरकार एक ऐसी नीति लागू करेगी जो उद्योगों को बेंगलुरु से बाहर परिचालन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इस नीति के तहत कर्नाटक के अन्य शहरों में कार्यालय स्थान मात्र 50 सेंट प्रति वर्ग फुट की किफायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु में अवसंरचना दबाव और यातायात जाम जैसी समस्याएँ उद्योगों की चिंता का विषय बनी हुई हैं। राज्य सरकार का यह कदम विकास को अन्य शहरों तक विकेंद्रीकृत करने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।
एआई विश्वविद्यालय और नई तकनीकी नीतियाँ
शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक उद्योग जगत के सहयोग से एक एआई विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल पर गूगल के साथ विस्तृत चर्चा हो चुकी है। उनका स्पष्ट संदेश था — सरकार अकेले यह नहीं करना चाहती; उद्योग नेतृत्व करे और सरकार साथ खड़ी रहेगी।
इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा, नवाचार और सार्वजनिक डिजिटल पहुँच का केंद्र बनना है, जिसमें कक्षा 6 से ही ग्रामीण छात्रों को एआई शिक्षा देने का लक्ष्य रखा गया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार पहले ही डीपटेक, डिजिटल अवसंरचना, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और उद्यमिता पर केंद्रित नई आईटी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप नीतियाँ लागू कर चुकी है। कर्नाटक ने उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए अपना क्वांटम रोडमैप भी लॉन्च किया है।
आगे की राह
शिवकुमार ने CEO सम्मेलन में उद्योग नेताओं को 'बेंगलुरु और कर्नाटक का राजदूत' बताते हुए उनसे राज्य की वैश्विक छवि को और मजबूत करने की अपील की। नई औद्योगिक नीति के ब्यौरे अगले 100 दिनों में सार्वजनिक होने की उम्मीद है, जो राज्य के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को एक नई दिशा दे सकती है।