कर्नाटक CM सिद्धारमैया का 'कैंपस टू करियर' शिखर सम्मेलन में ऐलान: उच्च शिक्षा को रोजगार से जोड़ेगी सरकार

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कर्नाटक CM सिद्धारमैया का 'कैंपस टू करियर' शिखर सम्मेलन में ऐलान: उच्च शिक्षा को रोजगार से जोड़ेगी सरकार

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने C2C शिखर सम्मेलन में साफ कहा — डिग्री नहीं, नतीजे चाहिए। ₹30.7 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था और 875 वैश्विक क्षमता केंद्रों वाले राज्य में अब उच्च शिक्षा को सीधे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की रणनीति तैयार हो रही है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 15 मई को बेंगलुरु में 'कैंपस टू करियर (C2C) शिखर सम्मेलन' का उद्घाटन किया।
कर्नाटक का GSDP ₹30.7 लाख करोड़ ; बेंगलुरु में 875 वैश्विक क्षमता केंद्र ।
राज्य में प्रति लाख जनसंख्या पर 66 कॉलेज — देश में सर्वाधिक।
युवा निधि योजना के तहत स्नातकों को वित्तीय सहायता और कौशल प्रशिक्षण।
औद्योगिक नीति का लक्ष्य 20 लाख रोजगार ; बेंगलुरु के पास ₹40,000 करोड़ की क्वीन सिटी परियोजना प्रस्तावित।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार, 15 मई को बेंगलुरु में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा को महज डिग्री तक सीमित न रखकर उसे रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व का सशक्त माध्यम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच ठोस सहयोग को इस लक्ष्य की बुनियादी शर्त बताया।

शिखर सम्मेलन का मंच और उपस्थिति

यह संबोधन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 'कैंपस टू करियर (C2C) शिखर सम्मेलन: भविष्य के लिए तैयार विश्वविद्यालय और कॉलेज' के उद्घाटन समारोह में दिया गया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर, उद्योग मंत्री एमबी पाटील, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खड़गे, चिकित्सा शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री शरणप्रकाश पाटिल, कृषि मंत्री एन. चालुवरयास्वामी, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद और छात्र उपस्थित थे।

कर्नाटक की आर्थिक ताकत और शिक्षा का आधार

सिद्धारमैया ने रेखांकित किया कि कर्नाटक का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्तमान में ₹30.7 लाख करोड़ है और बेंगलुरु में 875 वैश्विक क्षमता केंद्र (Global Capability Centres) स्थापित हैं, जो इसे विश्व के अग्रणी प्रौद्योगिकी केंद्रों में शुमार करते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में प्रति लाख जनसंख्या पर 66 कॉलेज हैं — जो देश में सबसे अधिक है — और यह आँकड़ा उच्च शिक्षा तंत्र की व्यापक पहुँच को दर्शाता है।

उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर का संदर्भ देते हुए कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन और सशक्तिकरण का सबसे प्रभावशाली साधन है। कर्नाटक सरकार भी इसी दृष्टिकोण से ज्ञान, कौशल विकास, नवाचार और समावेशी विकास को एक साथ आगे बढ़ाना चाहती है।

नामांकन से परिणाम की ओर: सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि केवल उच्च शिक्षा तक पहुँच पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान अब नामांकन को सार्थक परिणामों में बदलने पर है — यह सुनिश्चित करते हुए कि उच्च शिक्षा में प्रवेश करने वाला प्रत्येक छात्र रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के लिए वास्तविक रूप से तैयार हो।

इस दिशा में युवा निधि योजना का उल्लेख करते हुए सिद्धारमैया ने बताया कि यह कार्यक्रम स्नातकों को शिक्षा से रोजगार की ओर संक्रमण के दौरान वित्तीय सहायता और आधुनिक कौशल प्रशिक्षण दोनों उपलब्ध कराता है। यह पहल शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई पाटने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

औद्योगिक नीति और क्वीन सिटी परियोजना

मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक नीति का भी उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य 20 लाख रोजगार सृजित करना है। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु के निकट प्रस्तावित ₹40,000 करोड़ की क्वीन सिटी परियोजना ज्ञान, स्वास्थ्य, नवाचार और रोजगार के अवसरों पर केंद्रित एक भविष्योन्मुखी अर्थव्यवस्था की नींव रखेगी। गौरतलब है कि यह परियोजना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य अपनी तकनीकी पहचान को और गहरा करने की कोशिश में है।

उद्योग-विश्वविद्यालय सहयोग पर जोर

सिद्धारमैया ने विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच घनिष्ठ साझेदारी का आह्वान किया। उनका कहना था कि पाठ्यक्रम में बाजार की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित होना चाहिए और संस्थानों को छात्रों को व्यावहारिक चुनौतियों के लिए तैयार करना चाहिए। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि C2C शिखर सम्मेलन से निकले संकल्प किस हद तक नीतिगत बदलावों में तब्दील होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है। कर्नाटक में 66 कॉलेज प्रति लाख जनसंख्या के बावजूद यदि स्नातक बेरोजगारी की दर ऊँची बनी रहती है, तो यह संख्या उपलब्धि कम, चुनौती अधिक है। युवा निधि जैसी योजनाएँ अंतरिम राहत दे सकती हैं, परंतु उद्योग-विश्वविद्यालय सहयोग को महज घोषणाओं से आगे ले जाने के लिए पाठ्यक्रम सुधार और नियमित ऑडिट की दरकार है। ₹40,000 करोड़ की क्वीन सिटी परियोजना संभावनाओं से भरी है, पर इसकी समयसीमा और जवाबदेही का ढाँचा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ — वही पारदर्शिता इस दांव को विश्वसनीय बनाएगी।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैंपस टू करियर (C2C) शिखर सम्मेलन क्या है?
यह कर्नाटक के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा बेंगलुरु में आयोजित एक नीतिगत मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों, उद्योगों और सरकार को एक साथ लाकर उच्च शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से सीधे जोड़ना है। 15 मई 2025 को इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया।
युवा निधि योजना से कर्नाटक के छात्रों को क्या फायदा होगा?
युवा निधि योजना स्नातकों को शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार मिलने तक वित्तीय सहायता और आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है। यह योजना उस अंतराल को पाटने के लिए बनाई गई है जो डिग्री मिलने और नौकरी मिलने के बीच अक्सर बना रहता है।
क्वीन सिटी परियोजना क्या है और इसका शिक्षा से क्या संबंध है?
क्वीन सिटी बेंगलुरु के पास प्रस्तावित ₹40,000 करोड़ की एक भविष्योन्मुखी परियोजना है, जो ज्ञान, स्वास्थ्य, नवाचार और रोजगार के अवसरों पर केंद्रित होगी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अनुसार यह परियोजना कर्नाटक की शिक्षा-से-रोजगार रणनीति का एक अहम स्तंभ बनेगी।
कर्नाटक की औद्योगिक नीति में रोजगार का क्या लक्ष्य है?
राज्य की मौजूदा औद्योगिक नीति का लक्ष्य 20 लाख नए रोजगार सृजित करना है। सिद्धारमैया ने C2C शिखर सम्मेलन में इस लक्ष्य को उच्च शिक्षा सुधारों से जोड़ते हुए कहा कि उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग इसे व्यावहारिक बनाएगा।
कर्नाटक में उच्च शिक्षा की स्थिति देश में कैसी है?
कर्नाटक में प्रति लाख जनसंख्या पर 66 कॉलेज हैं, जो देश में सर्वाधिक है। राज्य का GSDP ₹30.7 लाख करोड़ है और बेंगलुरु में 875 वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जो इसे भारत के प्रमुख तकनीकी और शैक्षणिक केंद्रों में से एक बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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